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रामायण अयोध्या कांड — अध्याय 26 l Ramayana: Ayodhya Kanda — Chapter 26.
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00:00अयोध्या कांड का अध्याय 26
00:02रामायन का अत्यंत भावुक और प्रसिद्ध प्रसंग है
00:06इसमें भगवान राम का मिलन एक सरल लेकिन महान भक्त केवट से होता है
00:11यह कथा भक्ती, विनम्रता और प्रेम की सर्वोच भावना को दर्शाती है
00:17अयोध्या कांड अध्याय 26
00:20केवट प्रसंग और गंगा पार
00:23रात बीच चुकी थी, पूर्व दिशा में सूर्य की हलकी किर्णे फैलने लगी थी
00:27पवित्र गंगा नदी का तट उस समय अत्यंत शांत और पवित्र दिखाई दे रहा था
00:32गंगा का जल स्वर्णिम प्रकाश में चमक रहा था और हलकी हलकी हवा बह रही थी
00:38उस तट पर खड़े थे भगवान राम, माता सीता और उनके छोटे भाई लक्षमन
00:44उनके साथ थे निशादों के राजा, निशाद राज गुहु
00:48गंगा पार करने की इच्छा
00:50राम ने गंगा की ओर देखते हुए कहा
00:52अब हमें गंगा पार करके वनके भीतर आगे बढ़ना होगा
00:56गुह ने तुरंत अपने सेवकों को आदेश दिया
00:59एक अच्छी नाव तुरंत ले आओ
01:01कुछी समय में एक नाव लेकर एक साधारन नाविक वहाँ पहुँचा
01:05वो था केवट
01:06केवट का संदे है
01:08जब केवट ने राम को देखा तो वह समझ गया कि ये कोई साधारन मनुष्य नहीं है
01:12उसने हाथ जोड़कर प्रणाम किया
01:14लेकिन जब उसे राम को नाव में बैठा कर गंगा पार कराने को कहा गया
01:18तो वो थोड़ी देर चुप रहा
01:19फिर उसने विनम्रता से कहा
01:21प्रभू, मैं आपको बिना एक शर्थ के नाव में नहीं बैठा सकता
01:25सबको आश्चर्य
01:27केवट की बात सुनकर सभी आश्चर्य चकित हो गए
01:29लक्षमन को थोड़ी नाराजगी भी हुई
01:32उन्होंने कहा
01:33तुम जानते हो कि ये अयोध्या के राजकुमार है
01:35लेकिन केवट मुस्कुराया
01:37केवट की अद्भुद बात
01:39केवट ने हाथ जोड़कर कहा
01:40प्रभु मैंने सुना है कि आपके चरणों की धूल से पत्थर भी स्त्री बन जाते हैं
01:45वह अहिल्या के प्रसंग की ओर संकेत कर रहा था
01:48फिर उसने हस्ते हुए कहा
01:50मेरी नाव तो लकडी की है
01:51अगर वह भी किसी सुन्दर स्त्री में बदल गई
01:53तो मेरा परिवार भूखा मर जाएगा
01:55चरण धोने की विनती
01:57केवट ने विनम्रता से कहा
01:59इसलिए पहले मुझे आपके चरण धोने दीजिए
02:01फिर मैं आपको नाव में बैठाऊंगा
02:03यह सुनकर वहाँ उपस्थित सभी लोग भावुक हो गए
02:06राम मुस्कुरा दिये
02:08भक्ति का अद्भुद रिश्य
02:10केवट ने गंगा का जल लाया
02:12वह अत्यंत प्रेम और श्रधा के साथ
02:14राम के चरण धोने लगा
02:15उसके हाथ काप रहे थे
02:17उसकी आँखों से आसू बह रहे थे
02:19वह बार-बार चरणों को अपने माथे से लगा रहा था
02:22गंगा बार
02:23इसके बाद केवट ने बड़ी श्रधा के साथ
02:26राम, सीता और लक्ष्मन को नाव में बैठाया
02:29नाव धीरे-धीरे गंगा के शांत जल पर आगे बढ़ने लगी
02:32चारों ओर केवल जल और आकाश दिखाई दे रहा था
02:35वहद्रिश्य अत्यंत दिव्य और शांत था
02:38गंगा के मध्य
02:39नाव जब गंगा के मध्य पहुँची तो केवट बार-बार राम को देख रहा था
02:44उसे विश्वास नहीं हो रहा था कि स्वयम भगवान उसकी नाव में बैठे हैं
02:48उसका हृदय आनंद और भक्ती से भर गया
02:50दूसरी और पहुँचना
02:52कुछी समय बाद नाव गंगा के दूसरे तट पर पहुँच गई
02:55राम, सीता और लक्षमन नाव से उतर गए
02:58केवट का पुरसकार
02:59राम ने केवट को पार उतराने के बदले कुछ देने की इच्छा प्रकट की
03:03लेकिन केवट ने हाथ जोड़ कर कहा
03:05प्रभू, नाविक नाविक से पार उतरने का मूल्य नहीं लेता
03:09फिर उसने कहा, आज मैंने आपको गंगा पार कराया है
03:12जब मेरा समय आएगा, तब आप मुझे भवसागर से पार कर देना
03:16राम की करुणा
03:17केवट की बात सुनकर राम अत्यंत प्रसन्न हुए
03:20उन्होंने प्रेम से उसे गले लगाया और आशिरवाद दिया
03:23केवट की आखों से आशु बह रहे थे
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