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रामायण बाल कांड – अध्याय 15 l Ramayana Bala Kand – Chapter 15.

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Transcript
00:00रामायन में परंपरागत रूप से बाल कांड का समापन राम सीता विभा और परशुराम के परसंग के बाद हो जाता
00:06है।
00:07लेकिन यदि कथा को क्रमबद अध्यायों में आगे बढ़ाया जाए तो अगला अध्याय अयोध्या वापसी और नई जीवन की शुरुवात
00:14को दर्शाता है।
00:15नीचे अध्याय पंद्रा अयोध्या में राम सीता का आगमन और नई शुरुवात का विस्तृत वर्णन दिया गया है।
00:45सीता ने अपने पिता के चरणों को स्पर्श किया और आखों में आसू लिये विदाली।
00:50यात्रा का मार्ग
00:52अयोध्या की और लोटते समय बारात फिर से उसी मार्ग से गुजर रही थी जहां सिवे पहले आये थे।
00:58अब वातावरन पहले से कहीं अधिक प्रसन और शांत था।
01:01वनों में पक्षियों की मधुर आवाज सुनाई दे रही थी।
01:04राम और सीतारत में बैठे थे जबकि उनके साथ लक्षमन भरत और शुत्रुगन भी अपनी पत्नियों के साथ यात्रा कर
01:10रहे थे।
01:11अयोध्या में उत्साह।
01:13उधर अयोध्या नगरी में ये समाचार पहले ही पहुँच चुका था कि राजा दशरत अपने पुत्रों और बहुओं के साथ
01:19लोट रहे हैं।
01:20पूरी नगरी में उत्साह की लहर दोड़ गई।
01:22लोगों ने अपने घरों को सजाना शुरू कर दिया।
01:25सडकों को साफ किया गया और जगे जगे फूलों की सजावट की गई।
01:29भव्य स्वागत
01:30जब बारात अयोध्या के द्वार पर पहुँची तो वहां हजारों लोग उनका स्वागत करने के लिए एकत्र हो गए।
01:37मंदिरों में घंटियां बजने लगी और शंखनाध होने लगा।
01:40राज महल में रानिया, कौसल्या, कैकेई, सुमित्रा अपने पुत्रों और बहुओं के स्वागत के लिए खड़ी थी।
01:49जैसे ही राम और सीता महल में पहुँचे, रानी कौसल्या ने आरती उतारी।
01:53सीता ने विनम्रता से अपनी सास के चरण सपर्ष किये।
01:56इसी प्रकार उर्मिला, मांडवी और शुतिकीर्ती ने भी अपनी सासों का आशिरवाद लिया।
02:01महल में आनंद का वातावरन फैल गया।
02:04अयोध्या में नया जीवन।
02:06समय बीतने लगा और चारों भाई अपनी पत्नियों के साथ अयोध्या में सुख पूर्वक रहने लगे।
02:11राम और सीता का जीवन प्रेम, सम्मान और धर्म के आधर्शों से भरा हुआ था।
02:16राम राज्य के कारियों में अपने पिता की सहयता करते थे।
02:19वे प्रजा की समस्याओं को सुनते और न्याय पूर्ण निर्ने देते थे।
02:24प्रजा का प्रेम
02:25अयोध्या की प्रजा राम से अत्यंत प्रेम करती थी।
02:28वे जानते थे कि राम एक दिन महान राजा बनेंगे।
02:31राम का सभाव इतना विनम्र था कि वे हर व्यक्ति से समान प्रेम और सम्मान से मिलते थे। आने वाला
02:38परिवर्तन। लेकिन समय के साथ एक ऐसी घटना आने वाली थी जो पूरे अयोध्या राज्य का भाग्य बदल देगी। राजा
02:44दशरत धीरे-धीरे ब्रिद्ध हो रहे �
02:46थे। उन्होंने सोचना शुरू किया कि अब राज्य की जिम्मेधारी राम को सौंप दी जाए। ये निर्णे आगे चलकर रामायन
02:53की कथा को एक नए और नाटकिये मोड पर ले जाएगा।
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