Skip to playerSkip to main content
रामायण अयोध्या कांड — अध्याय 24 l Ramayana: Ayodhya Kanda — Chapter 24.
#ramayan

Category

😹
Fun
Transcript
00:00अयोध्या कांड का अध्याय 24 अत्यंत करुण और भावनात्मक प्रसंग है।
00:05इसमें भगवान राम अयोध्या की प्रजा को कष्ट से बचाने के लिए चुप चाप आगे बढ़ जाते हैं।
00:11जब लोगों को ये पता चलता है कि राम उन्हें छोड़ कर चले गए हैं तो पूरा अयोध्या राज्य गहरे
00:17शोक में डूब जाता है।
00:19अयोध्या कांड अध्याय 24 प्रजा को छोड़ कर राम का आगे बढ़ना और अयोध्या का शोक रात गहरी हो चुकी
00:27थी।
00:28आकाश में चंद्रमा की हलकी रोशनी फैल रही थी और चारों और घना सन्नाटा था।
00:34तमसा नदी के किनारे हजारों लोग ठक कर सो चुके थे। वे दिन भर भगवान राम के रत के पीछे
00:40चलते रहे थे।
00:41उनके मन में केवल एक ही इच्छा थी। अपने प्रियराजकुमार को अकेला वन में न जाने देना।
00:47लेकिन राम का हृदय ये द्रिश्य देखकर अत्यांत व्यतित था।
00:51राम का करुण निर्णै।
00:53राम ने देखा कि अयोध्या की प्रजा उनके कारण वन के कष्ट सहने को तैयार है।
00:58ये देखकर उनका हृदय करुणा से भर गया।
01:01उन्होंने धीरे से कहा।
01:03मैं नहीं चाहता कि मेरे कारण अयोध्या की प्रजा कष्ट उठाए।
01:06उनके साथ थे सीता, लक्षमन और सार्थी सुमंत्र।
01:11राम ने सुमंत्र से धीरे से कहा,
01:13जब सभी लोग गहरी नींद में सो जाएं, तब हमें यहां से आगे बढ़ना होगा।
01:17लक्षमन की पहरेदारी।
01:19पूरी रात लक्षमन जाकते रहे।
01:21उनकी आखों में नीन नहीं थी।
01:23वे अपने धनोश और बान के साथ चारों और पहरा दे रहे थे।
01:27कभी वे सोती हुई प्रजा को देखते, कभी अपने बड़े भाई राम को।
01:31उनके मन में अनेक भावनाएं उमड रही थी।
01:34दुख, क्रोध और करुना।
01:37प्रस्थान की घड़ी
01:38रात का अंतिम पहराया।
01:40अधिकांग्ष लोग गहरी नींद में थे।
01:42राम ने एक बार उन सभी लोगों की ओर देखा,
01:45जो प्रीम और विश्वास के कारण उनके साथ आये थे।
01:48उनकी आखों में करुना भराई।
01:50उन्होंने मन ही मन प्रार्थना की।
01:52हे प्रभू, इन सभी लोगों को सुख और शान्ती प्रदान करना।
01:56फिर उन्होंने सुमंत्र को संकेत दिया।
01:59चुप चाप प्रस्थान।
02:01सुमंत्र ने धीरे से रत तयार किया।
02:03राम, सीता और लक्षमन चुप चाप रत में बैठ गए। रत धीरे धीरे आगे बढ़ने लगा। कोई भी जागा नहीं।
02:10राम बार बार पीछे मुड़कर उन सोते हुए लोगों को देखते रहे। प्रातह काल का द्रिश्य। सुभा जब सूरी की
02:16पहली किरणे तमसा नदी
02:18के किनारे पड़ी तब लोग धीरे धीरे जागने लगे। उन्होंने चारों और देखा, लेकिन राम का रत वहां नहीं था।
02:24पहले तो उन्हें विश्वास ही नहीं हुआ। फिर अचानक किसी ने पुकारा, राम कहा है। प्रजा का विलाप। जब लोगों
02:32को ये समझ में
02:32आया कि राम उन्हें छोड कर आगे बढ़ गए हैं तो वहां विलाप की आवाज गूंज उठी। कुछ लोग रोने
02:38लगे, कुछ लोग जमीन पर बैठ गए, कुछ लोग राम को खोजने के लिए चारों दिशाओं में दौडने लगे। लेकिन
02:57राम बहुत दूर निकल च�
02:58शोक में डूबी अयोध्या। जब वे अयोध्या पहुँचे तो पूरे नगर में शोक की लहर फैल गई। लोगों ने जब
03:06सुना कि राम सचमुच वन चले गए हैं तो पूरा राज जरो पड़ा। जिस नगरी में उत्साव होना था, वहां
03:12आप केवल दुख और सन्नाट
03:14दशरत की स्थिती। उधर राज महल में राजा दशरत अपने प्रियपुत्र के वियोग में टूट चुके थे। वे बार बार
03:21राम का नाम लेकर रोते थे। उनका हिर्दय अपराद बोध और दुख से भरा हुआ था।
Comments

Recommended