00:00रामायन के बालकांड का अध्याय बारा, रामकथा का अत्यंत महत्वपून और प्रसिद्ध प्रसंग है, सीता स्वयमवर और शिवधनुष भंग.
00:08इसी अध्याय में भनवान राम पहली बार सीता से मिलते हैं और भगवान शिव के दिव्य धनुष को उठा कर
00:15तोड़ देते हैं.
00:16ये प्रसंग मिथला के राजा जनक के दर्बार में घटित होता है और यहीं से राम सीता के विवाह की
00:22भूमिका बनती है.
00:23नीचे इसका विस्त्रित कथा वर्णन प्रस्तुत है.
00:26बालकांड अध्याय बारा, सीता स्वयमवर और शिव धनुष भंग.
00:31रिशी विश्वामित्र के साथ यात्रा करते हुए राम और लक्षमन मिथला नगरी के समीब पहुँचे.
00:37मिथला उस समय अत्यंत सम्रिद्ध और पवित्र नगरी थी.
00:42राजा जनक धर्म प्रिये और न्याय प्रिये शासक थे.
00:44उनकी ख्याती दूर दूर तक फैली हुई थी.
00:47जब उन्हें ग्यात हुआ कि महान रिशी विश्वामित्र उनके राज्य में पधारे हैं, तो वे स्वयम उनका स्वागत करने के
00:54लिए आए.
00:54जनक का स्वागत
00:56राजा जनक ने रिशी विश्वामित्र को अत्यंत आदर से प्रणाम किया और उन्हें अपने महल में आमंत्रित किया
01:02वहीं उन्होंने राम और लक्ष्मन को देखा
01:05दोनों राजकुमारों का तेज और विनम्रता देखकर जनक अत्यंत प्रभावित हुए
01:10उन्होंने पूछा, हे महर्शी, ये तेजस्वी राजकुमार कौन है?
01:16विश्वामित्र ने उत्तर दिया, ये अयोध्या के राजा दशरत के पुत्र हैं, राम और लक्ष्मन.
01:22सीता की कथा?
01:23राजा जनक की एक पुत्री थी, सीता.
01:26एक बार राजा जनक खेत जोत रहे थे, तब उन्हें भूमी से एक बालिका प्राप्थ हुई.
01:31उन्होंने उस बालिका को अपने पुत्री के रूप में अपनाया और उसका नाम सीता रखा.
01:36सीता अत्यंत सुन्दर, विनम्र और गुणवान थी.
01:40स्वयमवर की घोशना
01:56ये धनुष अत्यंत भारी और शक्तिशाली था.
02:00शिव धनुष
02:01ये धनुष भगवान शिव का था और अत्यंत पवित्र माना जाता था.
02:06इसे उठाना ही लगभग असंभव था.
02:08राजा जनक के दर्बार में दूर-दूर के राजाओं और वीरों को आमंत्रित किया गया.
02:14राजाओं का प्रयास
02:16स्वयमवर के दिन मिथला नगरी में भव्य सभा आयोजित की गई.
02:19दूर-दूर के राजा और योध्धा वहां उपस्थित थे.
02:23एक-एक करके सभी ने उस धनुष को उठाने का प्रयास किया,
02:26लेकिन कोई भी उसे हिला तक नहीं पाया.
02:28कुछ वीरों ने पूरी शक्ती लगा दी,
02:31फिर भी धनुष अपनी जगा से नहीं हिला.
02:33जनक की चिन्ता
02:35जब सभी वीर असफल हो गए,
02:37तब राजा जनक चिन्तित हो गए.
02:39उन्होंने कहा,
02:40लगता है प्रिथवी पर ऐसा कोई वीर नहीं है,
02:43जो इस धनुष को उठा सके.
02:44ये सुनकर, रिशी विश्वामित्र ने राम से कहा,
02:48राम, तुम आगे बढ़ो और इस धनुष को देखो.
02:51राम अत्यंत विनम्रता से आगे बढ़े.
02:54उन्होंने पहले उस धनुष को प्रणाम किया.
02:56धनुष का उठना.
02:58राम ने सहजिता से उस धनुष को उठाया.
03:00सभा में उपस्थित सभी लोग आश्चर चकित रह गए.
03:03फिर राम ने उस धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाने का प्रयास किया.
03:07धनुष भंग.
03:09जैसे ही राम ने उस धनुष को मोड़ा,
03:11वो एक भयानक ध्वनी के साथ तूट गया.
03:13उसकी आवाज इतनी तेज थी,
03:15कि पूरी मिथला नगरी गूंज उठी.
03:18सभी लोग स्तब्द रह गए.
03:19सीता की प्रसन्नता.
03:21जब सीता ने ये द्रिश देखा,
03:23तो उनका हृदय आनंद से भर गया.
03:25उन्होंने राम को अपने पती के रूप में स्विकार कर लिया.
03:29विवाह की तैयारी.
03:30राजा जनक अत्यंत प्रसन्न हुए.
03:33उन्होंने तुरंट अयोध्या में संदेश भेजा,
03:35कि राजा दशरत को विवाह के लिए आमंत्रित किया जाए.
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