00:00रामायन के बालकांड का अध्याय 10 उस महत्वपून घटना का वणन करता है जिसमें भगवान राम महान रिशी विश्वामित्र के
00:07यग्य की रक्षा करते हुए राक्षस मारीच और सुबाहू को पराजित करते हैं। उनके साथ उनके भाई लक्षवन भी होते
00:14हैं। ये प्र
00:29हुआ था, वो धीरे-धीरे शांत होने लगा था। रिशी विश्वामित्र राम और लक्षमन को लेकर अपने आश्रम की ओर
00:36आगे बढ़ने लगे। मार्ग में वे उन्हें अनेक दिव्य अस्त्रों का ज्यान भी देते जाते थे। राम अत्यंत ध्यान से
00:43उन अस्त्रों के
00:44प्रयोग और उनके नियमों को सीखते थे। आश्रम में आगमन। कुछ समय बाद वे विश्वामित्र के आश्रम पहुचे। ये आश्रम
00:52घने वन के बीच स्थित था और वहां अनेक रिशी मुनी तपस्या करते थे। लेकिन लंबे समय से राक्षसों के
00:59भाई के कारण वह
01:14गिशाला को शुद्ध किया गया और वेद मंत्रों का उच्चारण होने लगा। राम और लक्षमन को यग्य की रक्षा का
01:20कारे सौपा गया। रिशी विश्वामित्र ने कहा, राम जब तक ये यग्य पूरा नहीं हो जाता, तब तक तुम्हें इसकी
01:27रक्षा करनी होगी।
01:28राम ने विनमरता से उत्तर दिया। गुरुदेव मैं पूरी शक्ती से इसकी रक्षा करूँगा। यग्य के दिन। यग्य कई दिनों
01:36तक चलता रहा। राम और लक्षमन दिन रात सतर्क रहते थे। वे धनुषबान लेकर आश्रम के चारों ओर पहरा देते
01:43थे। वन में
01:58अकाश से दो भयानक राक्षस प्रकट हुए, मारीच और सुबाहु। उनके साथ कई अन्य राक्षस भी थे। वे आकाश में
02:06उड़ते हुए यग्य शाला के उपर आ गए। यग्य को नश्ट करने का प्रयास। राक्षसों ने यग्य को नश्ट करने
02:13के लिए रक्त और मा
02:25अस्तर का प्रयोग किया। उन्होंने मारीच की ओर एक शक्तिशाली बान छोड़ा। ये बान इतना शक्तिशाली था कि मारीच को
02:32दूर समुद्र की ओर फेंक दिया। वो घायल होकर बहुत दूर जा गिरा। सुबाहु का अन्त। इसके बाद राम ने
02:39अपना दूसरा बान
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