04:56बया हुआएचि नइए बगाएचि दो प्रस्थदोनिया भी आप्याएचि रचाव झात्याएचि की तो यह सलेड़ी लुजस्वति इसार्फिता इश्वति प्रस्वति नान्दिश्वतिन दो रहता है व्रमनिया इस बहुति दो दो से यूश्वति।
04:59प्रम जो
05:23प्रजापती दख्शिकी एक!
05:25मुझापती दख्शिकी एक!
05:27सब्त रिशे पद्हार रहे हैं
05:53इस शुब आपसार पस सब्त रिशे हो की बसती
05:56मेरे लिए सम्मान की बात है
05:59बूर्ती के अनावरण की अनमती दे मनिवार
06:04अनुमती है प्रजापती
06:06आप अपने उद्देश में सपल हो
06:08प्रजापती दक्षिकी
06:15प्रजापती दक्षिकी
06:17प्रजापती दक्षिकी
06:20प्रजापती दक्षिकी
06:23प्रजापती दक्षिकी
06:53प्रजापती ने ये क्या कर दिया है?
07:17इस अधूरी मूर्ती की स्थापना कैसे होगी?
07:23प्रजापती दक्षिकी
07:25जेए!
07:27प्रजापती दक्षिकी
07:29जेए!
07:31जीवित रहने के लिए भोग तो पशुपक्षी भी करते हैं
07:39अपने हित अपने स्वार्थ के लिए वे भी जी लेते हैं
07:45मनुष्ची एक ऐसा जीव है जिसे ईश्वर ने अपने हित के साथ साथ संसार की भलाई और और औरों के उत्धार के बारे में चिंतन करने की शमता प्रदान की हैं
08:07कि इसी कारण सभी विदी विधान सामाजिक और निजी जीवन व्यतीत करने की हर रीती नीती इसकी स्थापना करके मैंने इस सभ्यता की स्थापना की है
08:26हिंदु आज जो मैं कारी संपन करने जा रहा हूं वो मेरी करतवे परायानता की पराकाश्था होगी
08:40उस भव्य मंदिर का निर्मान और उसमें भगवान शिरी विष्णू की मूर्ती की स्थापना यह सदाय प्रतीक होगा हमारे मत का
08:53हमारे विश्वास का हमारी विचार धारा का
08:59और इस सब्सका देवों में देव यदि कोई है तो वो भगवान शिरी विष्णू है एवल भगवान विष्णू ही पूचनी है एवल भगवान विष्णू ही तरशनी है उसके अत्रिक्त और कोई नहीं
09:26वजापती दक्षी की जय की वजापती दक्षी की जय की मुर्थिकार तुमने बहुत संदर मुर्थि बनाई है
09:55तुम्हारी कला और तुम्हारा समर्पर सदानिय है
10:01नहीं प्रचापती
10:09इस मुर्थी को बनाने का सौभागी ही
10:13मेरा सबसे बड़ा पुरुसकार है
10:15रडान प्रचापती
10:18प्रचापती
10:24मूर्थी के प्रस्थान का समय हो चुका है
10:27ये दिये दुमान होता
10:47कि प्रचापती ऐसी दोश्पूर्ण मूर्थी की स्थापना करने वाले हैं
10:51तो इसके अनावरन में सम्मल ही थी नहीं होते
10:54शमा की जगा रिश्यक अश्यक
10:56किन्तु मैं
10:58इस पाप का भागिदार नहीं बन सकता
11:01मुझे आग्या दीजे
11:03रिश्यवर
11:05इस प्रचापती दक्ष के इस यग्ये से आपका चले जाना उचित नहीं है
11:10काल के जिस समय खंड पर हम इस प्रक्रिया के साक्षी हैं
12:53क्या समस्या है प्रजापती ये सब कह रहे हैं कि मूर्ती बहुत भारी है भारी है तो खीशने वालों के संक्या बढ़ा दो जी प्रजापती
13:23और बल लगवाओ संक्या कम पड़े और संक्या बढ़ाओ जी प्रजापती
13:37प्रजापती दक्ष आप कितना भी प्रयास कर लें किन्तु ये कारे संपन्य नहीं
13:53हो पाएगा आप क्यों स्विकार नहीं कर लेते कि भगवान विश्णु की ये मूर्ती अधूरी है इसलिए
14:01शिल्पकार
14:26ये क्या किया तुमने सब कह रहे हैं मूर्ती अभी तक पूरी नहीं है
14:35इसी कारण वो मंदिर में प्रवेश नहीं कर रहे
14:39दोश तुम्हारा और अपमान पिताजी को सहन करना पड़े
14:44आप मुझे सिखाएंगे कि भगवान श्री विश्णु का ये रूप पूरा है या नहीं
14:51अपने कारी छेत में हस्तक छेप करने कादिकार
14:56पजाबदी दक्ष ने अभी तक किसी को नहीं दिया
15:00देभी मैं चालता हूँ इससे आप मेरा दोस्त मानकर मुझे पर क्रोधी थो रही है
15:13लेकिन मैं उतना ही कर सका जितना करने की मुझे अनुमत ही दी गई थी
15:19स्वायम ईश्वर द्वारा स्थापित इस नियम को आप कैसे बदल सकते हैं प्रजापती
15:25अभी भी समय है
15:29आप कोई भी ऐसा कारे ना करें जिससे आपको अपनी ही प्रजा के सामने लच्जित होना पड़े
15:59गुर्ती स्थापना में जो भी बात आएं उन्हें दूर करने के लिए विश्णु जी को और प्रसंद करना होगा
16:23और उसका एक मात रुपाय है नाराइन यग्य
16:29प्रजा पती जी
16:35नाराइन यग्य कोई साधारण यग्य नहीं है
16:39इसके सफलता के लिए हमें 108 प्रकार के फूलों की आवश्यक्ता होगी
16:44विशेशकर पारिजात के फूलों की
16:48लेकिन यहाँ कहां मिलेंगे पारिजात के फूल
16:52मैं लेकर आऊंगी पारिजात के फूल
16:58सती तुम
17:03नहीं
17:06मैं तुम्हें उस घने वन में नहीं जाने लोगा
17:09इसके लिए मैं किसी और को भीचूँगा
17:12आपकी सीवा करने का अफसर मुझसे न छीनिये पिताजी, यह तो मेरा सवभाग्य है, सवभाग्य तो मेरा है, कि मुझे तुम जैसी पुत्री प्राप्त हुई है, मेरे कारण तुम्हे तनिक विकष्ट पहुचे, इसके लिए मैं अपने आपको कभी शमा नहीं कर पाऊ, मु
17:42आपकी सती को कुछ नहीं होगा, हमारा विश्वास कीजिए
18:12झाल झाल
18:42प्रेस ही बादरी सांगा सब्सक्राइब Silakanda
18:59लेक लेखज में में पराइब
19:05अंच बादाध
19:12कर दो कर दो कर दो दो
19:42कर दो कर दो कर दो
20:12कर दो कर दो कर दो कर दो
20:42करते हैं
20:55करते हैं
21:02करते हैं
21:11अराव थाव झाल
21:41कर दो कर दो कर दो
22:11प्रणाम दे
22:27महर्शी दधीची के आश्रम में आपका स्वागत कर था
22:32मैं
22:34मैं दिशा भटक दे
22:37दिशा भटक ना ही दिशा को पाना है
22:41कर दो कर दो कर दो कि कर दो है
23:11कि देशंगा
23:41कि ऐसे संसार से फिर मोग कैसा और ये पीज है रुद्राक्षी के पीज कभी नहीं मुर्षाते हैं कभी नहीं मरते हैं वो तो जीवन दाई है आत्मा की तरह
24:11इस सत्य से हम कभी दूर नहीं इसलिए हम रुद्राक्ष बीज की माला धारण करते हैं यहीं हम शिव भक्तों की पैचान है
24:22शिव
24:26हाँ देवी शिव
24:31भगवान शिव शंकर महादेग जिनकी तिव्यता को आपके पिताश्री प्रजापती दक्ष ने हमेशा से नका रहा है
24:41हमें लोटना होगा
24:49हमारी बेहने हमें ढून रही होंगी
24:53चिंतित हो रही होंगी
24:55हम कहीं खोतों नहीं गए
24:57पारिजात फुल की खोज में आपका यहां तक आना
25:01पहले से ही निशित था
25:04दक्ष पुत्री सभी
25:11यदि सब कुछ पहले से ही निशित है
25:17तो मूर्ती का मंदिर में प्रवेश ना होना
25:20भी पूर्वनिर धारित ही होगा
25:21हाँ
25:23और प्रजापती द्वारा किये गए इस नारायन यग्यका असफल होना भी
25:28अधूरी मूर्ती की स्थापना नहीं की जा सकती है सती
25:34ऐसा क्या है जिसके बिना वो मूर्ती अधूरी है
25:37बताता हो
25:40इसे स्पर्ष करके अपने पिता द्वारा बनवाई विष्णू की उस मूर्ती का स्मरन कीजी
26:09आपको उत्तर मिल जाएगा
26:39प्रप्रे शया में अधियर ऑज़िस्द्ट करके यह नहीं की लिए आपको आपको नहीं की जा सकती है
26:41प्रप्रे भी घ्ट。 यहीड़िस्ट की बिस्वार्म
26:43अपको जुड़र्स पित्वार्म
26:44बाल्स क्वार्स
26:45प्रादस
26:47लगज साल
27:17जिस प्रकार ब्रभ्भा संसार के रचाईता है
27:37विश्णो संसार के संद्रक्षक
27:40उसी तरह संसार के विनाशक है
27:45देव के देव
27:46भगवान शिव
27:48जिस प्रकार स्रिष्टी इन तीनों के बिना अधुरी है
27:53उसी तरह
27:54अनन्त शैन में विश्णू की वो मूर्थी कैसे संपूर हो सकती है
27:59जिसमें प्रह्मा तो है
28:01लेकिन शिव नहीं
28:04इश्वर की दिव्य नियमों में हस्तक्षीप करने का दुस्सा हस वही करते है देवी
28:10जो या तो मूर्ख हो या जिनके मन में ज्ञान का अहंकार वास कर रहा हो
28:16शमा कीजेगा महर्चे
28:18पर उन्तु मेरे पिता के लिए ऐसे अपशब्दों का प्रयोग ना करे
28:22अस्विकार गरने से सत्या सत्य तो नहीं हो जाता देवी
28:26उस मूर्थी में शिवलिंग को उसका दिव्य स्थान प्रदान किये बगैर
28:32प्रजापती दक्ष उस मूर्थी की स्थापना कभी नहीं कर पाएंगे
28:37और मात्र कहे देने से आपकी बानी भविश्यवानी नहीं बन जाएगी
28:41मैं सुवर्चाम रिशीद अदीची की पत्नी
28:56प्रणा
28:58यह आपके लिए
29:02पारिजात के फूलों के लिए धन्यवाद
29:07अब पिताजी का यक्के अवश्य सफल होगा
29:28स्वयम को पाने के लिए मुझे भ्रमित होने की क्या भटकने के आवश्यक्ता नहीं है
29:40भटक तो आप चुकी है सती
29:51बस अब देर है तो केवल स्वयम को पाने की
29:56अब आप कितना भी मूँ मोड ले
30:00आपके जीवन का हर मार्ग आपको पुना इसी रुद्राक्ष तक लाता रहेगा
30:07तब तक जब तक आप उसे ही स्विकार नहीं करती
30:26प्रवश्यक्ता नहीं करता रहेगा
30:56क्या यह सत्य है
31:01कि पिताजी ने तुम्हें मूर्ती में शिवलिंग सम्मेलित नहीं करने का आदेश दिया था
31:06तुम्हारे मौन का अर्थ हाँ है या ना
31:23क्या इसी कारण मूर्ती मंदिन में प्रवेश नहीं कर रहे
31:26देवी यदि और कोई कारण हो
31:30तो मुझ जैसे तुछ मनुश्य के समस्य से बाहर है
31:34शिवलिंग रखने से मूर्ती मंदिर में प्रवेश करेगी
31:44ये कहां लिखा है
31:46शिवलिंग नहीं रखने से मूर्ती प्रवेश करेगी
31:48ये भी कहां लिखाए देवी
31:50यह शिवलिंग है बेरे पास
32:05यदि आपको विश्वास करना हो
32:09तो इसे रख दीजिए वहाँ
32:11इसके स्थान पर
32:20अबान विश्व्नो की
32:31अबान विश्नो की
32:33अबान विश्नो की
32:35जेए!
32:53देवी, शेवलिंग स्थाफित कर देजिये!
32:57मुर्ति का मंदीर में प्रयुष ना करना आपके पिता के लिए अत्मान जनक होगा!
33:02प्रजा का उन पर से विश्वास उठ जाएगा!
33:05सब को जान के भी
33:11अपने पिदा के सम्मान की रक्षा ना करना
33:15ते कैसे धर्म का पालन है देवी
33:35जान को जान की रिदेशन
33:50का ल episód हुआं है
34:05बहुता कि या या संविता कि रस में गाने का 절क्प लोड़ुने करने, कि रस दोगे।
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