00:00नाजरीन ये बहुत जमाना पहले की बात है कि लुबनान पर एक नहायत रहम दिल और इनसाफ पसंद बादशाह हकूमत
00:06करता था
00:06रियाया अपने बादशाह से बहुत महबत करती थी क्योंकि वो हर लमहा उनकी फलाह बैबूत का ख्याल रखता था
00:13बादशाह की ये आदत थी कि वो अपने बुद्रगों के नक्षे कदम पर चलते हुए अकसर रातों को सादा लिबास
00:19पहन कर शहर की गलियों का चक्कर लगाता
00:22ताकि अपनी आँखों से देख सके कि उसके अवाम किस हाल में रह रहे हैं
00:26अगर उसे कोई दुखी या जरुतमन मिलता तो वो फोरण उसकी मदद कर देता
00:31एक रात गश्ट के दौरान बादशाह चलते चलते शेर की जैल के दरवाजे तक जा पहुँचा
00:36जहां सिपाई एक चोर को पकड़ कर अंदर लेकर जा रहे थे
00:39बादशाह के जी में आया कि आज जैल का मौाइना किया जाए
00:43और दिखा जाए कि वहाँ कैदी किस हाल में है
00:46बादशाह को देखते ही सिपाईों ने पहचन लिआ
00:49और बड़े आहतराम से सर जुका दिए
00:51बादशाह की खाहश पर सिपाईी उसे जैल के अंदर लेकर
01:09That's it.
01:39जो सबसे अलग थलग सर जुकाए बैठा था
01:42बादशाँ ने सिपाईों से कहा कि उसे हमारे पास लाओ
01:46ये अपना मूँ क्यों छुपा रहा है
01:48जब ओ नौजवान बादशाँ के सामने आया तो बादशाँ ने पूछा
01:51किया नौजवान तुम इतने शर्मिंदा क्यों हो
01:54उसने सिस्कियां भरते हुए कहा कि बादशाँ सलामत
01:57मैं एक बहुत बड़ा गुनागार हूँ
01:59मेरे जुर्म ने मुझे इस काबल नहीं छुड़ा
02:01कि मैं किसी से नजर मिला सकूँ
02:03बादशाँ ने पूछा कि आखिर तुमने क्या किया है
02:07नौजवान बोला कि मैं एक एमानदार आदमी था
02:09मगर एक दिन शैतान के बहकावे में आकर
02:12मैंने एक शख्स की रकम चुरा ली
02:14और उसी जुरम की सजा काट रहा हूँ
02:16बादशाँ ने मुस्करा कर हाजरीन से कहा
02:18कि यहां तो बाकी सब फरिश्टे और बेगुना है
02:21सिर्फ यही एक शख्स गुनागार है
02:23लाज़ा इतने पारसा लोगों के दर्मियान
02:26एक खताकार को रखना ठीक नहीं है
02:28इसे रहा कर दिया जाए
02:29और यूं वो नौजवान आज़ाद हो गया
02:31कुछ अरसे के बाद बादशाँ दुबारा जैल के मौाइने पर आया
02:35इस बार हर कैदी ने सोचा के शायद सच बोलने से रहाई मिल जाए
02:39चुनाचे सब ने अपने अपने जराइम की तफसिलात सुनाना शुरू कर दी
02:43बादशाँ ने सब की बातें सुनी और हुक्म दिया
02:46कि इन लोगों की सजा मजीद बढ़ा दी जाए
02:48क्यूंकि इन्हें अपने कीये पर जरा भी शर्मिंदगी नहीं
02:51बलके ये तो फखर से अपने जराइम के किसे सुना रहे हैं
02:54कैदी हैरन रह गए और बातशाँ के जाने के बाद वजीर से पुछा
02:58कि उस नौज़ां ने आधराफ किया तो वो रहा हो गया
03:01हमने आधराफ किया तो सजा बढ़ा दी गई
03:03यह कैसा इन्साफ है
03:05دانا وزیر نے جواب دیا کہ اس نوجان نے اپنی غلطی کا اعتراف اس لیے نہیں کیا تھا
03:10کہ اسے آزادی ملے بلکہ وہ واقعی اپنے کیے پر شرمندہ اور نادم تھا
03:15تم لوگوں نے پہلی بار جھوٹ اس لیے بولا کہ رہا ہو جاؤ
03:18اور اس بار سچ بھی اس لیے بولا کہ آزادی مل جائے
03:21تمہارے دلوں میں ندامت نہیں بلکہ لالچ تھا
03:25دوستو انسان سے غلطی ہو جانا بڑی بات نہیں
03:28بلکہ اس غلطی پر نادم ہونا اور اسے تسلیم کر لینا اصل نیکی ہے
03:33اللہ تعالیٰ کو بھی وہی بندہ سب سے زیادہ پسند ہے
03:36جو اپنے گناہوں پر شرمندہ ہو کر سر جھکا دے
03:39سچی ندامت ہی گناہوں کی قید سے آزادی کا واحد راستہ ہے
03:43یا اللہ ہمیں اپنے گناہوں پر سچی ندامت اور توبہ کی توفیق عطا فرما آمین
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