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Voiced By: Qadir Kalhoro
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Transcript
00:00पुराने वक्तों की बात है कि एक पहलवान फन पहलवानी में बेमिसाल था
00:04उसे कुष्टी के 360 दाओ पेच आते थे
00:08और वो अपनी महारत की बदोलत हर मुकाबले में फत्र हासल करता था
00:12उसके पास बहुत से शागिर्द तर्बियत लेते थे
00:15जिनमें से एक शागिर्द उसे बहुत अजीज था
00:18पहलवान ने उसे फन के तक्रीमन तमाम गुर सिखा दिये
00:22सिवाए एक खास दाओ के
00:24शागिर्द अक्सर इसरार करता कि उसे वो आखरी दाओ भी सिखा दिया जाए
00:29मगर उस्ताद हमेशा ये कहे कर टाल देता कि वक्त आने पर सिखाऊंगा
00:33वक्त गुजरता गया और वो शागिर्द 369 दाओ सीख कर एक ताकतवर और मायानाज पहलवान बन गया
00:40अब पूरे मुलक में कोई उसका मकाबला करने वाला ना था
00:44इस शौरत और ताकत ने शागिर्द के दिल में तकब्र पैदा कर दिया
00:48यहां तक के एक दिन वो बादशा के दरबार में बोल उठा
00:51कि मैं सिर्फ अपने उस्ताद के बुड़ा पे और उनके एहतराम की वज़ा से खामोश हूँ
00:56वरना ताकत में मैं उन से बढ़ चुका हूँ और फन में उनके बराबर हूँ
01:01अगर मकाबला हो तो मैं उने पचाड सकता हूँ
01:04बादशा को शागिर्द की ये अहसान फरामशी और गुस्ताखी पसंद ना आई
01:09उसने हुकम दिया कि एक बहुत बड़ा दंगल सजाया जाए जहां उस्ताद और शागिर्द का मकाबला हो
01:15मुकररा दिन पूरा शहर उसनों के मकाबले को देखने के लिए उमड आया
01:20शागिर्द किसी मस्त हाथी की तरह पूरे जाहो जलाल के साथ मैदान में उतरा
01:25जबके उस्ताद खामशी से मैदान में आए उस्ताद जानते थे के जिसमानी टाकत में जवान शागिर्द उन पर भारी है
01:32इसलिए उन्होंने जहन में उसी एक दाओ को इस्तमाल करने का फैसला किया जो उन्होंने शागिर्द को नहीं सिखाया था
01:40مقابلہ شروع ہوا تو شاگرد نے اپنی طاقت کے بلبوتے پر استاد کو زیر کرنا چاہا
01:46مگر این اسی لمحے استاد نے وہ خفیہ داؤ آزمایا جس سے شاگرد بالکل نواقف تھا
01:52شاگرد سنبھل نہ سکا اور پلک جھپکتے میں پیٹ کے بل زمین پر آگرا
01:58پورا میدان استاد کی واہ واہ سے گونج اٹھا اور مغرور شاگرد سب کے سامنے زلیل و رسوہ ہو گیا
02:04بادشاہ نے استاد کو قیمتی انعامات سے نوازا اور شاگرد کو ڈانٹے ہوئے پوچھا
02:10کہ تم تو اپنی طاقت کے دعوے کرتے تھے پھر آج ہار کیوں گئے
02:14نادان شاگرد نے جواب دیا کہ حضور استاد مجھ سے طاقت میں نہیں جیتے
02:18بلکہ انہوں نے وہ داؤ استعمال کیا جو مجھے کبھی سکھایا ہی نہیں
02:23استاد نے مسکرا کر جواب دیا میں نے وہ داؤ آج ہی کے دن کے لیے بچا کر رکھا تھا
02:29کیونکہ مجھے ڈر تھا کہ ایک دن تمہارا غرور تمہیں میرے ہی سامنے لا کھڑا کرے گا
02:34دوستو استاد صرف علم نہیں دیتا بلکہ وہ تجربے کی اس منزل پر ہوتا ہے
02:40جہاں شاگرد کی رسائی نہیں ہوتی
02:43جو شاگرد اپنے استاد کا احترام نہیں کرتا
02:46وہ فن سیکھنے کے باوجود حقیقت میں ناکام رہتا ہے
02:50جو شاگرد کی رسائی نہیں ہوتی
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