00:00रामायन के बालकांड का अध्याय तेरह अत्यंत पवित्र और आनंद मय प्रसंग है राम सीता विवाहा
00:07भगवान रामद्वारा शिव के धनुष को तोड़ने के बाद मिथला में विवाह की भव्य तयारियां शुरू होती हैं और अंततह
00:14राम का विवाह सीता से संपन्न होता है
00:16नीचे इस अध्याय का विस्तरित कथा वर्णन दिया गया है
00:21बालकांड अध्याय तेरह राम सीता विवाह
00:24शिव धनुष के भंग होने के बाद मिथला नगरी में आनंद की लहर दोड़ गई
00:29सभा में उपस्थित सभी लोग आश्चर्य और प्रसंणता से भर उठे
00:47सभा में उपस्थित सभी रिशिमुनी और राजाओं ने इस निर्णय का स्वागत किया
00:52दशरत को निमंत्रण
00:53राजा जनक ने तुरंत अयोध्या में संदेश भेजा कि राजा दशरत अपने परिवार सहित मिथला आए
00:59संदेश वाहक कई दिनों की यात्रा के बाद अयोध्या पहुँचे और उन्होंने दशरत को पूरी घटना बताई
01:05कि राम ने शिव धनुष को उठा कर तोड़ दिया है और सीता स्वयमवर में विजई हुए है
01:10यह सुनकर दशरत अत्यंत प्रसंण हुए
01:13अयोध्या से बारात
01:15राजा दशरत ने तुरंत विवाह की तैयारियां शुरू कर दी
01:18अयोध्या से एक भव्य बारात मिथिला के लिए रवाना हुई
01:22इस बारात में शामिल थे गुरु वशिष्ठ, अनेक मंत्री, सैनिक और अयोध्या के प्रमुखनागरिक
01:29चारो ओर संगीत, उत्सव और आनंद का वातावरन था
01:32मिथिला में स्वागत
01:34जब बारात मिथिला पहुँची तो राजा जनक ने उनका अत्यंत भव्य स्वागत किया
01:38पूरी मिथिला नगरी को फूलों और दीपों से सजाय गया था
01:42सडकों पर रंगोली बनाई गई थी और हर ओर उत्सव का माहौल था
01:46अन्य विवाह
01:47राजा जनक के भाई कुश ध्वच की भी दो पुत्रियां थी
01:51मांडवी और शुरुतिकीर्ती
01:54राजा जनक की दूसरी पुत्री थी उर्मिला
01:56निर्ने लिया गया की चारों भाईयों का विवाह एक साथ होगा
02:00राम का विवाह सीता से
02:02लक्षमन का विवाह उर्मिला से
02:04भरत का विवाह मांडवी से
02:06शत्रुघन का विवाह शुरुतिकीर्ती से
02:08विवाह की रस में
02:10विवाह का शुभ महुर्त निर्धारत किया गया
02:12वेद मंत्रों के बीच सभी विवाह संसकार प्रारंब हुए
02:16राम और सीता ने अगणी के सामने साथ फेरे लिए
02:19रिशी मुनी मंत्र पढ़ रहे थे और पूरा वातावरन अत्यन्ट पवित्र हो गया था
02:24सीता का प्रण
02:25विवाह के समय सीता ने राम के प्रती आजीवन समर्पन का संकल्प लिया
02:30राम ने भी सीता की रक्षा और सम्मान का वचन दिया
02:34दोनों के इस पवित्र मिलन को देख कर सभी लोग भावुख हो गए
02:37चारों भाईयों का विवाह
02:39इसके बाद लक्ष्मन उर्मिला, भरत मांडवी और शत्रुघन शुरुती कीर्ती का विवाह भी संपन्न हुआ
02:45पूरी मिथिला नगरी आनंद और उत्सव से भर उठी
02:48उत्सव
02:49विवाह के बाद कई दिनों तक उत्सव चलता रहा
02:52रित्य, संगीत और भोज का आयोजन हुआ
02:55रिशी मुनी, राजा और प्रजा सभी इस दिव्य विवाह के साक्षी बने
03:00अयोध्या लोटने की तैयारी
03:02कुछ समय बाद राजा दशरत ने अयोध्या लोटने की तैयारी शुरू की
03:05अब राम और सीता सहित, चारों भाई अपनी पत्नियों के साथ अयोध्या जाने वाले थे
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