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  • 5 days ago
श्रीमद् भगवद गीता अध्याय 10- विभूति योग।Srimad Bhagavad Gita Chapter 10– Vibhuti Yoga.

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00:00दशम अध्याय, विभूती योग, भाग एक, परमात्मा की दिव्य विभूतियों का रहस्य
00:08कुरुक्षीत्र की विशाल भूमी, सुभह की हलकी धूप युद्ध भूमी पर फैल चुकी थी
00:13हजारों योद्धा अपने अपने रतों पर तैयार खड़े थे
00:17घोडों की टापों की आवाज, द्वजों का हवा में लहराना और युद्ध की प्रतीक्षा में खड़ा पूरा संसार
00:25लेकिन इस युद्ध भूमी के बीच एक रत पर ऐसा समवाद चल रहा था
00:29जो केवल उस युद्ध के लिए नहीं था, बन की पूरे मानव जीवन के लिए एक दिव्य मार्ग दर्शन था
00:35रत पर खड़े अर्जुन अब पहले जैसे भ्रमित नहीं थे
00:39भगवान स्री कृष्ण के उबधीशों ने उनके मन में गहरी समझ जगा दी थी
00:43फिर भी उनके मन में एक जिग्यासा अभी भी बाकी थी
00:47अर्जुन की जिग्यासा
00:49अर्जुन ने धीरे धीरे कृष्ण की ओर देखा
00:52उनकी आँखों में अब भय नहीं था, लेकिन गहरी जिग्यासा अवश्य थी
00:57अर्जुन बोले, हे माधव, आपने मुझे भक्ती का मार्ग बताया
01:02समर्पन का रहस्य बताया
01:04और यह भी बताया, कि परमात्मा हर जगे उपस्थित है
01:07लेकिन मैं यह समझना चाहता हूँ
01:10मैं आपको इस संसार में किस-किस रूप में देख सकता हूँ
01:13कृष्ण मुस्कुराए, यह वही प्रश्ण था जो हर साधक के मन में कभी न कभी उठता है
01:19मनुष्य जानना चाहता है, अगर परमात्मा हर जगे हैं, तो उन्हें पहचाने कैसे?
01:25कृष्ण का उत्तर
01:26कृष्ण ने शांत स्वर में कहा
01:28हे अर्जुन, मेरी दिव्य विभूतियां अनन्त हैं
01:32इस संसार में जो भी महान है, जो भी अद्भुत है, जो भी शक्ती सौंदर्य और तेज से भरा हुआ
01:38है, वो सब मेरी ही जलक है
01:40कृष्ण आगे कहते हैं
01:43इस ब्रम्हान में जितनी भी महान शक्तियां हैं, वे सब पर्मात्मा की शक्ती का केवल एक छोटा सा अंच है
01:50पर्मात्मा का अनन्त विस्तार
01:52कृष्ण कहते हैं
01:53हे अर्जुन, इस संसार में जो कुछ भी दिखाई देता है, वो सब पर्मात्मा की उर्जा से ही उत्पन्न हुआ
02:00है
02:00सूरज की रोष्णी, चांद की शीतलता, नदियों का बहाव, पहाडों की स्थिरता, ये सब केवल प्रकृती नहीं है
02:08ये सब पर्मात्मा की अभिव्यक्ती है
02:11मनुष्य की भूल
02:12कृष्ण कहते हैं, लेकिन हे अर्जुन, मनुष्य अकसर इस सत्य को भूल जाता है
02:18वो प्रकृती को देखता है, लेकिन उसके पीछे छिपी दिव्य शक्ती को नहीं देख पाता
02:23वो सूर्य को देखता है, लेकिन उसकी दिव्यता को नहीं पहचानता। वो नदी को देखता है, लेकिन उसकी पवित्रता को
02:30नहीं समझता।
02:31विभूती योग का अर्थ।
02:33कृष्ण कहते हैं कि विभूती योग का अर्थ है, इस संसार में मौजूद हर महान चीज में परमात्मा की जलक
02:41को पहचानना।
02:42जब मनुष्य यह समझने लगता है कि संसार में जो भी स्रेष्ट है, वो परमात्मा का ही अंश है, तब
02:49उसका द्रिष्टि कोण बदल जाता है।
02:51भक्ती की नई द्रिष्टि, क्रिष्ण कहते हैं, हे अर्जुन, जब कोई भक्त संसार को इस द्रिष्टि से देखता है, तो
02:59उसे हर जगह परमात्मा दिखाई देने लगते हैं, सूर्य में, चांद में, हवा में, पानी में, और यहां तक की
03:06हर जीव के भीतर भी, ग्यान औ
03:21वो अनुभव है, और वही अनुभव मनुष्य को सक्ची भक्ती की ओर ले जाता है, भक्त का जीवन, क्रिष्ण कहते
03:29हैं, हे अर्जुन, जो भक्त मेरी विभूतियों को पहचान लेता है, उसका जीवन पूरी तरह बदल जाता है, वो प्रकृती
03:36को नश्ट नहीं करता, बल
03:42की हर जीव में परमात्मा को देखता है, सच्चा ज्यान, क्रिष्ण कहते हैं, हे अर्जुन, सच्चा ज्यान केवल पुस्तकों में
03:51नहीं होता, सच्चा ज्यान तब होता है, जब मनुष्य संसार को दिव्वे दृष्टी से देखना सीख जाता है, तब उसे
03:58हर जगह परमात
04:27Krishna says,
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