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रामायण बाल कांड – अध्याय 7 l Ramayana Bala Kand – Chapter 7.
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00:00रामायन के बालकांड का अध्याय साथ, भगवान राम और उनके भाईयों के बचपन, स्वभाव, शिक्षा और संसकारों का वर्णन करता
00:08है।
00:08इसी अध्याय में ये दिखाया जाता है कि कैसे चारों राजकुमार बड़े होकर आदर्श विक्तित्व बनते हैं।
00:44नीचे इसका विस्ट्रित कथावर्णन प्रस्तुत है।
00:45शांत और विनम्र स्वभाव के थे। उनका चहरा तेजस्वी था और उनकी आँखों में करोणा और प्रेम जलकता था।
00:52जब भी वे महल में खेलते तो उनके साथ लक्षमन हमेशा रहते थे।
00:56लक्षमन अपने बड़े भाई राम से अत्यंत प्रेम करते थे और एक शन के लिए भी उनसे दूर नहीं रहना
01:02चाहते थे।
01:03उधर भरत और शत्रोगन भी एक दूसरे के बहुत प्रिय थे। वे दोनों भी साथ साथ खेलते और समय बिताते
01:09थे। इस प्रकार चारो भाईयों के बीच गहरा प्रेम था।
01:13अयोध्या के लोगों का स्नीह अयोध्या की प्रजा भी इन चारो राजकुमारों से अत्यंत प्रेम करती थी। जब राम महल
01:21से बाहर निकलते और नगर की गलियों में जाते तो लोग उन्हें देख कर प्रसन्न हो जाते। वे उनके लिए
01:27आशिरवात देते और कहते। ये �
01:42पुत्र केवल राजकुमार ही नहीं बलकि धर्म और ज्यान से युक्त महान व्यक्ती बने। इसलिए उन्होंने उनके लिए श्रेष्ट शिक्षकों
01:50की विवस्था की। चारो राजकुमारों को प्रारमधिक शिक्षा राजमहल में ही दी जाने लगी। उन्हें शिष्टा
01:57अचार, धर्म के नियम और नैतिक जीवन के सिध्धान्त सिखाए गए। गुरु वशिष्ट के आश्रम में शिक्षा कुछ समय बाद
02:05राजा दश्रत ने अपने पुत्रों को महान रिशी वशिष्ट के आश्रम में भेज दिया। वहां राजकुमारों की शिक्षा विधि
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