Hazrat Sumayyah (RA) was the first female martyr in Islam, a woman who stood against brutality, oppression, and disbelief, holding firm to her faith in Allah despite extreme torture by Abu Jahal.
📖 In this video:
✅ Learn about her courageous stand
✅ The torture inflicted by Abu Jahal
✅ The earliest sacrifices in the path of Islam
✅ And the Prophet Muhammad’s ﷺ pain and prayers for the oppressed
🕊️ Her story isn’t just history — it’s a legacy of patience, courage, and victory through faith.
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LearningTranscript
00:28Islam
00:30लेकिन उसके दिल में इतना पुखता इमान था
00:31कि वो मक्का के सबसे बड़े दुश्मन
00:34Islam के सामने भी ना तो लरसकर
00:36बोली ना मार से डरी
00:37ना आग से ना प्यास से
00:39क्योंकि वो जानती थी जो सच है
00:41वो ही रब का रास्ता है
00:42ये कहानी अधर सुमया बिन तेखियात
00:44रजियल्लाहु अन्हा की
00:46वजीम खातून जिसने दुनिया को दिखाया
00:48कि एमान के गुट और अल्लाह पर यकीन के पुखतगी
00:51किसी भी ताकत से ज़्यादा बड़ी होती है
00:53वो ओरत जो इसलाम के रास्ते पर
00:54सबसे पहले शहीद हुई
00:56एक माँ, एक मौमिना
00:58और एक ऐसी मिसाल जो आने वाली नसलों के लिए
01:00एक जुर्रत, अज्म और एमान के निशानी बन गई
01:03बिसमिल्लाहिर रख्मान रर्रहीम
01:05अस्सलाम उलेकुम रहमतुलाहिव बरकातू
01:19नाजिन तारीक के औराक
01:24गरूर इसलाम को मिटाना आया था
01:26एक तरफ थी हज़र सुमय रजियल्लाहिव अन्हा
01:28कमजोड जिसम अगर फौलादी एमान
01:30और दूसरी तरफ था अबू जहल
01:32खुरैश का सर्दार, ताकत, दौलत
01:34और रोब का निशान, जिसका गरूर
01:37वक्त की खाक में दफन हो गया
01:39यह सिर्फ एक शहादत की कहानी नहीं
01:41यह इस्तकामत, कुर्बानी और रक की सर बलंदी
01:43का वो लम्हा है जिसने इसलाम की
01:45बनियादों को खालिस खून से सीचा
01:47आज की वीडियो में हम
01:48हज़र सुमय रजियल्लाहु अन्हों की
01:50इमान अफ्रूस दास्तान सुनाएंगे
01:52बताएंगे कि कैसे एक औरत ने
01:53तारीख का रुक मोड़ दिया
01:55साथ ही उन अजीम
01:56सहाबियाद रजियल्लाहु अन्हों का भी
01:58जिक्र करेंगे जिन्होंने
01:59इसलाम के लिए अपना सब कुछ खुर्बान कर दिया
02:02और जानेंगे कि अबुजहल का अंचाम क्या हुआ
02:04वो शख जिसने जल्म की हद कर दी
02:06मगर रब काइनात ने उसे कैसा निशान इबरत बनाया
02:10वीडियो के आखर तक हमारे साथ रहिए
02:12क्योंकि ये सिर्फ एक कहानी नहीं
02:14ये आपके इमान को जंजोर देने वाला सच है
02:16और अगर आप हमारे चैनल पर नए हैं
02:18तो अभी सब्सक्राइब करें
02:19ताके ऐसी ही हक पर मबनी दास्ताने
02:22आप तक पहुँचती रहें
02:23नाजरीं 14 सो साल पहले मक्का
02:25एक ऐसा शहर था जो बजाहर रूहानियत का
02:44मक्का का मौाशरा तबकाते नजाम में जक्रा हुआ था
02:46जहां सरदार, मालदार, ताजिर, आजाद अरब
02:50और सबसे नीचे गुलाम जिने इंसान समझ नभी
02:53गवारा ना किया जाता था
02:54इन सब के दर्मियान एक वाज़े फर्क था
02:57ये गुलाम सिर्फ इनसान नहीं समझे जाते थे
02:59बलके इंसे जानवरों जैसा सलूक किया जाता था
03:02ये कमजोर और बेबस अफराज जिन महजद सुमया रजियल्लाह अन्हा
03:05और उनका खांदान भी शामिल था
03:07हर तरह की अज़ियत और जल्म का निशाना बनते थे
03:09इन पर जबर का हर तरीका आजमाया गया
03:12लेकिन इनकी रूहानी ताकत, इमान और इस्तकामत कभी तूटने ना पाई
03:16इस जल्म और सित्म के माहौल में
03:18अल्लाह ने अपने आखरी नबी
03:19हज़रत मुहमद स्लिल्लाह लिए वालियों को
03:22नबूत अता फर्माई
03:23और आपने मक्का की घुटन जदब फजा में
03:25तौहीद का पैगाम बूलंद किया
03:27ला इलाह इल्लाह का ऐलान जैसे ही कूँजा
03:29खुराइश के एवानों में जल्दला आ गया
03:31वो जानते थे कि अगर ये पैगाम पहल गया
03:33उनकी तमाम ताकत, दौलत और मफदात
03:35एक लम्हे में मिड़ जाएंगे
03:37उनके जूटे खुदा जिने उन्होंने अपने मफदात के लिए
03:39मुसल्ट कर रखा था
03:41उनकी सल्तनत और तिजारत सब कुछ खत्रे में पढ़ जाएगी
03:43तो इस नए पैगाम का मकाबला करने के लिए
03:46उनोंने जल्म के एक नई तारीख रकम करना शुरू की
03:48सबसे पहले उन लोगों को निशाना बनाया गया
03:50जो समाजी तोर पर कमजोड थे
03:52गुलाम, मिस्कीन और बेबस
03:53वो लोग जो मका के मौश्ड़ती ढाचे में सबसे नीचे थे
03:56और जिनके पास दिफा करने के लिए कोई ताकत नहीं थी
03:59हदर सुमया रजियल्लाह ताला अनहा और उनके खानदान को भी
04:02इसी जल्म का सामना करना पड़ा
04:03हदर सुमया रजियल्लाह अनहा ए गुलाम और थी
04:06लेकिन उनका एमान और अज्म इतना मजबूत था
04:09कि वो हर जल्म का मकाबला करती नहीं
04:11जब पुरैश ने इस नए पेगाम को दबाने के लिए
04:13हर तरह के जल्म और सित्म का आगास किया
04:15हदर सुमया और उनके खानदान को
04:17इसका सबसे ज़्यादा सामना करना पड़ा
04:19हदर सुमया बिन ते खियात रजियल्लाह अनहा
04:22मका के उन लोगों में शामिल थी
04:24जिनकी जिनकी गुलामी में गुजरी
04:25मुबनु मखजूम के कबीले के एक लॉन्डी थी
04:27और इसी हैसित में मका के रईस अबू हुसाइफा ने
04:30उन्हें हदरत यासिर बिन आमिर के निकाह हमें दे दिया
04:33हदरत यासिर गैर कुरेशी शख्स थे
04:36जो यमन से आकर मका में बसे
04:37और कुरेश के साथ हलीब बनकर जिन्दगी गुजरने लगे
04:40उनका तालिव के खानदान से था जिसे कुरेश में कम दर्जे समझा जाता था
04:44खदरत यासिर और अधरत सुमया के अज़वाजी जिन्दगी एक सादा और मामूली जिन्दगी थी
04:48लेकिन उसमें इमान का रंग कुछ खास था
04:50इन दोनों ने उस जमाने में समाजी, कश्मकष और घुलामी की जन्जीरों को सच्चाई के राष्टे में रुकावट बनने ना
04:56दिया
04:56नादिर था सुमया रजी ल्लाह उन्हा उन अजीम लमर्तबत सहाबियात में से हैं
05:00लेकिन ने राहे हक में बेपना मसीबत जहे दी, मगर इस तकामत की मिसाल बन गई
05:04अगर्चे आप एक जईव और कमजूर खातून थी, लेकिन एमान की पुख्तिगी ना आपको ऐसा होसला आता किया
05:10कि आपने जल्म और सित्म के पहाड के सामने भी कल्मा एहक कहने से इंकार ना किया
05:14आप रजी ल्लाह उन्हा उन्हें पिदाए खुशनसीबों में शामल थी, जिन्होंने आगाज में ही इसलाम कुबूल किया
05:20अगराण में अज़त ख़्दीजा रजी लौाह उन्हाच अधर अववा करसिदीक रजी। ख़्द बिलाल रजी लौए उन्हों धर्थ पाबाब रजी लौह
05:27उन्हों थ्यासिर व्यासिर रजी लौह उन्हों आपक के शोहर और अमार रजी लौह manipulation ते
05:36This was the most recent
05:37There were many people who had to be
06:07اس وقت آیا جب نبی کریم صلی اللہ علیہ وآلہ وسلم
06:09نے توحید کی دعوت دینا شروع کی
06:11اسلام کی آفاقی حقیقتوں
06:13کو جاننے کے بعد حضرت سمیہ
06:15ان کے شہر یاسر اور بیٹے امار
06:17رضی اللہ عنہم نے بلا ججر کے اسلام
06:19قبول کر لیا یہ وہ لمحہ تھا
06:21جب ایک کمزور غلام عورت نے
06:23دل سے اللہ کی وحدانیت کو تسلیم کیا
06:25اور سچ کے ساتھ کھڑی ہو گئی
06:26جانتے ہوئے کہ یہ فیصلہ انہیں کتنی بڑی
06:29آزمائش میں ڈال دے گا ان کے لئے
06:30ایمان کا یہ فیصلہ کسی بھی طور پر
06:33آسان نہیں تھا کیونکہ مکہ کے
06:34معاشرتی اور مذہبی ماحول میں جہاں
06:36شرک کا غلبہ تھا توحید کا پیغام
06:38نہ صرف سیاسی بلکہ سماجی طور پر بھی
06:41ایک بڑا چائلنج تھا حضرت سمیہ
06:43کی استقامت کا آغاز اس وقت ہوا
06:44جب وہ نبی کریم صلی اللہ علیہ وآلہ وسلم
06:47کی دعوت پر ایمان لائیں
06:48انہوں نے نہ صرف ایمان قبول کیا
06:50بلکہ اس پر ڈٹ بھی گئیں
06:51ان کے جررت استقامت اور اللہ پر یقین
06:53ایسا تھا کہ جب بڑے بڑے سردار بھی
06:55دبا میں آ کر جھکتے وہ ایک تنہا عورت
06:57ہونے کے باوجود سچائے پر جم کر
06:59کھڑی رہیں ان کا ایمان اتنا پختہ تھا
07:01کہ کسی بھی تکلیف یا ظلم کے سامنے
07:03وہ سر جھکانے کو تیار نہ ہوئیں
07:05جب قریش کے سرداروں نے اسلام
07:07کس نئی دعوت کو اپنی حکومت
07:08کاروبار اور معاشرتی عہدوں کے لئے
07:10خطرہ سمجھا تو انہوں نے مسلمانوں پر
07:12ظلم و ستم کی ایک نئی لہر شروع کی
07:14غلاموں اور کمزور طبقات کو
07:16سب سے پہلے نشانہ بنایا گیا
07:17حضرت سمیہ رضی اللہ عنہ پر بھی
07:19اتنے ہی ظلم کیے گئے
07:20کہ ان کی جسمانی عذیتیں
07:22اور روحانی تکلیف بیان کرنا مشکل ہیں
07:24لیکن ان تمام عذابوں کے باوجود
07:26ان کی زبان پر
07:27ہمیشہ اللہ کا ذکر تھا
07:28اور ان کا ایمان کس بھی قسم کی
07:30تکلیف یا جبر کے سامنے
07:31ٹوٹا نہیں
07:32حضرت سمیہ کے قربانی
07:33اور ان کی ہمت کا اندازہ
07:34اس بات سے لگایا جا سکتا ہے
07:36کہ انہوں نے اپنے ایمان کے لئے
07:37اپنی جان کے قربانی دے دی
07:38جب قریش نے انہیں
07:39اور ان کے خاندان کو
07:40عذیتوں میں مبتلا کیا
07:41تو حضرت سمیہ رضی اللہ عنہ کے
07:43شوہر یاسر اور بیٹے امار بھی
07:45ان کے ساتھ تھے
07:46لیکن حضرت سمیہ کا صبر
07:47اور حوصلہ ان میں
07:48سب سے نمائے تھا
07:49ان کی مسلسل عذیتیں
07:50اور تکلیف
07:51اس بات کی گوائی دیتی ہیں
07:52کہ وہ اللہ کے راستے میں
07:53قربانی دینے کے لئے تیار تھیں
07:54اور ان کا یہ عظم ہی تھا
07:56جس نے اسلام کی تاریخ میں
07:57انہیں ایک عظیم مقام دیا
07:59ناظرین ابو جہل
08:00جس کا اصل نام
08:00عمر بن حشام تھا
08:01مکہ کے قریش قبیلے کے
08:03ایک بڑے سردار
08:04ایک طاقتور و سرکش شخصیت تھا
08:05جس کا غرور اور زد
08:06اسے اپنی ہدایت کے راستے سے
08:08مکمل طور پر منحرف کر چکا تھا
08:10ابو جہل کو
08:11اپنی قوم
08:12دولت
08:12عزت
08:13اور سرداری پر
08:13اتنا فقر تھا
08:14کہ اس کے دل میں
08:15کسی بھی سچ کو
08:15تسلیم کرنے کی جگہ نہیں تھی
08:17اور اس نے اسلام کو
08:18محض ایک خطرے کے طور پر دیکھا
08:19جب نبی کریم صلی اللہ علیہ وآلہ وسلم
08:21نے اسلام کا پیغام دینا شروع کیا
08:34ابو جہل اس میں
08:35مسلمانوں
08:35خاص طور پر
08:36کمزوروں
08:37اور غلاموں کی حالت پر
08:38شدید غصہ آتا تھا
08:39کیونکہ وہ سمجھتا تھا
08:40کہ اگر یہ لوگ
08:41اسلام کو قبول کر لیں گے
08:42تو ان کا معاشرتی نظام
08:43جو طاقتوروں کا نظام تھا
08:45تباہ ہو جائے گا
08:46حضرت سمیر رضی اللہ عنہ
08:47حضرت یاسر
08:48اور حضرت امار رضی اللہ عنہ
08:49قریش کے ان مظلوم غلاموں میں شامل تھے
08:52جن ابو جہل
08:52اور اس کے پیروکاروں کی طرف سے
08:53ظلم و ستم کا سامنا تھا
08:55ان تینوں کی داستان
08:56ایک ایسی قرمانی کی کہانی ہے
08:58جسے سن کر انسان کا دل چھلنی ہو جائے
08:59ابو جہل نے ان پر بیشمار عذیتیں دیں
09:01جو انسان کی برداز سے باہر تھیں
09:03انہیں زمین پر لٹایا جاتا
09:04تبتی ہوئی ریت پر گرایا جاتا
09:06اور ان کے جسموں پر
09:07گرم لوہی کی ذرہیں
09:08پہنا دی جاتیں
09:09تاکہ سورج کی تیز دھوپ میں جل کر
09:11ان کی حالت اور بھی بتر ہو جائے
09:13انہیں پانی تک نہ دیا جاتا
09:14اور نہ ہی انہیں کھانے میں کچھ ملتا
09:16صرف عذیتیں اور تکالیف
09:18ان کا مقدر بنی
09:18حضرت سمیہ رضی اللہ عنہ کے ساتھ
09:20اس ظلم کا خاص معاملہ یہ تھا
09:22کہ ابو جہل کی ذاتی نفرت
09:23ان کی طرف مرکوز تھی
09:24ایک عورت کا ایمان پر ڈڑ جانا
09:26اور اس کا اپنے نبی کی حمایت کرنا
09:27اور ابو جہل کے لئے ناقابل برداشت تھا
09:30ایک عورت کا ایمان پر ڈڑ جانا
09:31اور اس کا اپنے نبی کی حمایت کرنا
09:33ابو جہل کے لئے ناقابل برداشت تھا
09:35اس نے حضرت سمیہ کو
09:36نہ صرف جسمانی عذاب دیا
09:37بلکہ زبان سے بھی گالیاں تانے
09:39اور ہر طرح کی توہین کی
09:40تاکہ وہ اسلام چھوڑ دیں
09:41لیکن حضرت سمیہ رضی اللہ عنہ کا قلب
09:44اتنا مضبوط تھا
09:45کہ ان تمام عذیتوں کے باوجود
09:47نہ تو وہ پگلیں
09:47نہ کمزور ہوئیں
09:48اور نہ ان کے دل میں ایمان کے شما مدھم ہوئی
09:50ہر تپش ہر درد کے باوجود
09:52وہ بار بار ایک ہی بات کہتیں
10:03نفرت کی علامت تھی
10:04وہ چاہتا تھا کہ حضرت سمیہ ایک عورت ہو کر
10:06اس کی طاقت اور جاہو جلال کے آگے
10:08سر خم تسلیم کرے
10:09وہ چاہتا تھا کہ وہ خوف اور جبر کے ذریعے
10:11ان کا ایمان توڑ سکے
10:12لیکن حضرت سمیہ کی استقامت
10:14اور بے خوفی نے
10:15ابو جہل کو ایک بار پھر شکست دی
10:17اس کی ہر کوشش ناکام ہوئی
10:19حضرت سمیہ رضی اللہ عنہ کا ایمان
10:21اتنا مضبوط تھا
10:21کہ ان کے قربانی نے
10:22ابو جہل کو اندر سے توڑ کر رکھ دیا تھا
10:25آخر کار ابو جہل نے
10:26ایک سنگین قدم اٹھایا
10:28وہ قدم جو نہ صرف حضرت سمیہ کی جان کے لیے
10:30بلکہ تاریخ میں ہمیشہ کے لیے
10:32ان کی عظمت کا سبب بنا
10:33ابو جہل نے ان پر اتنے
10:35بے دردی سے حملے کیے
10:37کہ اس کے ہاتھوں حضرت سمیہ کی شہادت ہوئی
10:39اور اس کے ساتھ ہی
10:40اسلام کی پہلی شہید عورت کی داستان رقم ہوئی
10:42حضرت سمیہ کی شہادت
10:43نہ صرف
10:44اسلام کی تاریخ کا ایک روشن باپ بن گئی
10:46بلکہ اس نے دنیا کو یہ پیغام دیا
10:48کہ ایمان کی راہ میں
10:49سب سے بڑی قربانی بھی
10:50اللہ کے راستے میں خوشی سے دی جاتی ہے
10:52اور اس قربانی کے بدلے
10:53اللہ کی رضا اور جنت حاصل ہوتی ہے
10:56حضرت سمیہ رضی اللہ عنہ
10:58حضرت یاسر رضی اللہ عنہ
10:59اور حضرت امار بن یاسر رضی اللہ عنہ کی زندگی میں
11:03استقامت اور ایمان کی کہانیاں
11:05ہر زاویے سے دل کو چھو لیتی ہیں
11:07ان کی قربانیاں صرف جسمانی عذیتوں تک محدود نہیں تھی
11:10بلکہ ان کے دلوں میں
11:11ایک ایسی ایمانی طاقت چھپیتی
11:12جس کا مقابلہ
11:13کوئی ظلم یا تشدد نہیں کر سکتا تھا
11:15حضرت امار بن یاسر رضی اللہ عنہ
11:17جن ابو جہل کی جانب سے
11:18سب سے زیادہ عذیتوں کا سامنا تھا
11:20اکثر بے بسی کے عالم میں
11:21اپنی والدہ سمیہ
11:23اور والدہ یاسر کو تکلیف میں مبترہ دیکھتے
11:25ان کا دل میں شدید درد ہوتا
11:27لیکن وہ جانتے تھے کہ
11:28اس عذیت کا مقصد صرف ایک چیز ہے
11:30ان کے ایمان کو توڑنا
11:31حضرت یاسر رضی اللہ عنہ کی حالت بھی کمزور اور ناتما تھی
11:34اور وہ اتنی شدید عذیتوں کا سامنا کرنے کے باوجود
11:37ہر لمحہ ایمان کے راستے پر ڈٹے رہے
11:39اسی دوران
11:40سمیہ رضی اللہ عنہ کا
11:42صبر استقامت کا ایک بے مثال منظر سامنے آتا ہے
11:45جب ابو جہل نے ان پر ظلم کے انتہا کی
11:47اور ہر ممکن کوشش کی
11:49کہ وہ اسلام سے منحرف ہو جائیں
11:51تو حضرت سمیہ نے نہ صرف جسمانی عذیتیں جھیلیں
11:53بلکہ اپنی زبان سے بھی
11:55اپنا ایمان پکا اور مضبوط کیا
11:57وہ ہر عذیت کے باوجود
11:58اللہ کی بہدانیت کا اعلان کرتی رہیں
12:01اور لا الہ الا اللہ کی صدائیں
12:03بلند کرتی رہیں
12:04ان کے لبوں سے نکلنے والا یہ کلمہ
12:07ایمان کا ایک جیتا جاکتا ثبوت تھا
12:09جس نے مکہ کی اتب تیریت
12:11اور ابو جہل کی تمام کوششوں کو بے اثر کر دیا تھا
12:13اسی دوران نبی کریم صلی اللہ علیہ وآلہ وسلم کا گزر
12:17اس عذیت بھری جگہ سے ہوا
12:18حضرت سمیہ حضرت یاسر اور حضرت امار
12:21رضی اللہ عنہم کی حالت دیکھ کر
12:23نبی صلی اللہ علیہ وآلہ وسلم کی آنکھوں میں
12:25محبت اور حمدردی کے جذبات اُبل پڑے
12:28آپ علیہ السلام نے ان کی طرف دیکھ کر
12:30ان کے صبر کی تعریف کی
12:31اور فرمایا
12:32صبر کرو عالی یاسر تمہارے لئے جنت ہے
12:35یہ کلمات صرف تسلی نہیں تھے
12:36بلکہ ایک زبردست وعدہ تھا
12:38جو اللہ کی رضا کی جیت کے بعد
12:40ان کے لئے جنت کا دروازہ کھول رہا تھا
12:43یہ الفاظ حضرت سمیہ حضرت یاسر
12:45اور حضرت امار کے لئے تسکین کا باعث بنے
12:47بلکہ آج تک ہر مسلمان کے دل میں
12:49ان کی عظمت و قربانی کی یاد تازہ کرتے ہیں
12:52حضرت سمیہ کی زمان سے نکلنے والا
12:54لا الہ الا اللہ کا کلمہ
12:56نہ صرف ان کی ایمان کی پختگی کا نشان تھا
12:59بلکہ یہ اسلامی تاریخ میں ایک سنگے میل بن گیا
13:01جو ہر مسلمان کو صبر اور استقامت کا درس دیتا ہے
13:04نازین ابو جہل کا غصہ اور شرمندگی
13:07اس وقت اپنے عروج پر پہنچ گئی
13:09جب وہ حضرت سمیہ رضی اللہ عنہ کی استقامت
13:11اور ایمان کی پختگی کو دیکھ رہا تھا
13:13اس کے ظلم و ستم کی تمام حدیں پار ہو چکی تھی
13:16لیکن حضرت سمیہ کا ایمان ٹوٹنے کے بجائے
13:19اور مضبوط ہو گیا تھا
13:20ابو جہل کو یہ برداشت نہیں ہو رہا تھا
13:22کہ کمزور سی غلام عورت اس کے تمام تشدد
13:24اور عذیتوں کے باوجود
13:26اپنے ایمان پر قائم ہے
13:28اس کے دل میں جلتی ہوئی نفرت اور عذیتیں
13:30حضرت سمیہ کے لیے نئی نہیں تھی
13:32اور وہ ان سب کا مقابلہ
13:34ایک بے خوف عورت کی طرح کر رہی تھی
13:36ابو جہل کا دل اس بات سے جل رہا تھا
13:38کہ غلام عورت اس کے ظلم و جبر کے باوجود
13:40نہ صرف ایمان پر قائم ہے
13:42بلکہ سر جھکانے کو بھی تیار نہیں
13:44اسی دوران ابو جہل نے حضرت سمیہ رضی اللہ عنہ کو
13:47اپنے سامنے بلائیا اور تیز غصے میں کہا
13:50کیا تو اب بھی محمد صلی اللہ علیہ وآلہ وسلم کے دین پر ہے
13:53حضرت سمیہ رضی اللہ عنہ نے
13:55اپنے آنکھوں میں بے خوفی اور ایمان کی چمک کے ساتھ جواب دیا
13:59ہاں میں اسی رب کو مانتی ہوں جو اکیلا ہے
14:02محمد علیہ السلام کو اس کا رسول مانتی ہوں
14:05حضرت سمیہ کی الفاظ ابو جہل کے لیے
14:07تیز تلوار سے کم نہ تھے
14:09ان کے جواب میں
14:10ابو جہل کا غرور اور تقبر چکنا چور ہو چکا تھا
14:13اور اس کا کفر اور ظلم
14:14اس کے سامنے بے اثر ہو چکا تھا
14:16ابو جہل کا غصہ اس وقت اور بڑھ گیا
14:18اور اس نے اپنی درندگی کا مظاہرہ کرتے ہوئے
14:21حضرت سمیہ رضی اللہ عنہ پر
14:23نیزہ مارا جو اس کے ظلم کا
14:25بدترین ہتھ کنڈا تھا
14:26اس کے نیزے کے حملے سے حضرت سمیہ کا جسم
14:28لہو لہان ہو گیا مگر وہ پھر بھی
14:31اپنے ایمان سے ایک ایچ بھی پیچھے نہ ہٹی
14:33حضرت سمیہ کا دل دہلا دینے والا منظر
14:36اس وقت تاریخ کا ایک سب سے عظیم اور دل گداز لمحہ بن گیا
14:40ان کی آنکھوں میں نہ کوئی خوف تھا
14:42نہ شکست کی جھجک
14:43بلکہ ان کے چہرے پر ایک سکون اور تسلی تھی
14:45وہ جانتی تھی کہ ان کی قربانی
14:47اللہ کی رضا کے لیے ہے
14:48اور وہ اپنی جان کے قربانی دے کر
14:50جنت کا رستہ پا رہی تھی
14:52حضرت سمیہ رضی اللہ عنہ کی شہادت کے بعد
14:54ابو جہل کا غرور اور تقبر بڑھنے کے بجائے
14:57زلت کی انتہا کو پہنچ گیا
14:59ان کے دل میں وہ سکون اور امن نہ تھا
15:01جو حضرت سمیہ کے دل میں تھا
15:03ابو جہل کا زلت آمیس خاتمہ
15:05اور اس کی موت تاریخ میں ہمیشہ کے لیے
15:07اس کے نام کے ساتھ جڑ کر رہ گئی
15:09حضرت سمیہ رضی اللہ عنہ کی شہادت
15:11نہ صرف اسلام کے عظیم قربانیوں کے ایک مثال بن گئی
15:14بلکہ اس نے ہمیں یہ سبق دیا
15:16کہ ایمان کی قیمت
15:17دنیا کی سب سے بڑی قربانی سے بھی زیارہ قیمتی ہے
15:20حضرت سمیہ کی جرت و بہادری نے
15:21ان کی تقدیر کو جنتیں بدل دیا
15:23اور ان کے شہادت نے پوری امت مسلمہ کو
15:26ایک صبر اور احتقامت کا
15:28ایک نا ختم ہونے والا درس دیا
15:29حضرت سمیہ رضی اللہ عنہ کی شہادت کی خبر
15:32نبی کریم صلی اللہ علیہ وآلہ وسلم تک پہنچی
15:35تو آپ علیہ السلام کا دل غم سے بھر گیا
15:37حضرت سمیہ حضرت یاسر
15:39اور حضرت امار بن یاسر
15:41رضی اللہ عنہ کی قربانیاں
15:42نہ صرف مسلمانوں کے لئے
15:43ایک روشن مثال بن گئیں
15:45بلکہ نبی کریم صلی اللہ علیہ وآلہ وسلم کے دل میں
15:48ان کی محبت اور عزت کا
15:50ایک الگی مقام تھا
15:51حضرت یاسر رضی اللہ عنہ کی شہادت کے بعد
15:53حضرت سمیہ کی شہادت نے
15:55نبی علیہ السلام کے دل پر
15:57گہرے اثرات چھوڑے
15:58آپ علیہ السلام نے
16:00ان کی قربانیوں کو ہمیشہ یاد رکھا
16:02اور جب حضرت سمیہ
16:03اور حضرت یاسر کی شہادت کا ذکر آتا
16:05تو آپ علیہ السلام کی آنکھوں میں
16:07غم اور محبت کی جھلک صاف نظر آتی
16:10حضرت امار بن یاسر رضی اللہ عنہ
16:12جو اس دوران اپنی والدہ اور والد کو
16:14عزیت میں دیکھ کر بے بس ہو گئے تھے
16:16نبی علیہ السلام کے سامنے آ کر
16:18اپنے دل کی تکلیف کا اظہار کرتے
16:19نبی علیہ السلام نے
16:21حضرت امار کو تسلی دی
16:22اور ان کے دل میں سکون پیدا کیا
16:24آپ صلی اللہ علیہ وآلہ وسلم نے
16:26انہیں یہ بھی بتایا کہ ان کے قربانی
16:28بے سود نہیں جائے گی
16:29اور اللہ ان کے قربانیوں کا
16:31بہترین بدلہ دے گا
16:32حضرت سمیہ رضی اللہ عنہ کی شہادت کے بعد
16:34نبی علیہ السلام نے ان کے ایمان کی
16:37ایسی گواہی دی جو آج تک
16:38ہر مسلمان کے دل میں تازہ ہے
16:40آپ صلی اللہ علیہ وآلہ وسلم نے فرمایا
16:42آلِ عاصر کا صبر
16:43تمہاری جنت کی زمانت ہے
16:45نبی علیہ السلام نے
16:47حضرت سمیہ اور ان کے خاندان کی
16:49ایمان کی پختگی کو
16:50نہ صرف سراحہ بلکہ
16:51ان کا جنت میں مقام بلند کرنے کی
16:53بشارت بھی دی
16:53ان کے ایمان اور قربانیوں نے
16:55اسلام کی تاریخ میں
16:56ایک احساس سنگے میل قائم کیا
16:58کہ آج بھی جب کسی کو
16:59ایمان اور صبر و استقامت کی بات کی جاتی ہے
17:01تو حضرت سمیہ رضی اللہ عنہ کا نام
17:03عزت اور احترام کے ساتھ لیا جاتا ہے
17:06نبی صلی اللہ علیہ وآلہ وسلم
17:08کا یہ فرمان ہے
17:09کہ جنت تمہاری ہے
17:10حضرت سمیہ رضی اللہ عنہ کی
17:11قربانیوں کی سب سے بڑی تسلی تھی
17:13آپ علیہ السلام نے ان کے ایمان
17:15ان کی قربانی اور ان کے صبر کی پذیرائی کی
17:18اور ان کو جنت کی بشارت دے کر
17:20ایک ایسا وعدہ کیا
17:21جو حضرت سمیہ کے لئے سکون
17:23اور اتمنان کا باعث بن گیا تھا
17:24ان کی شہادت نہ صرف ایک شجاع عورت کی قربانی تھی
17:27بلکہ اس نے امت مسلمہ کو یہ سکھایا
17:29کہ دین کے لئے اپنی جان دینا بھی
17:31سب سے عظیم عبادت ہے
17:32ناظرین جب ہم حضرت سمیہ رضی اللہ عنہ کی
17:34شہادت کو یاد کرتے ہیں
17:36تو دلخون کے آثور ہوتا ہے
17:37ایک کمزور معصوم اور بے بس عورت
17:39صرف اس لئے شہید کر دی گئی
17:41کیونکہ وہ لا الہ الا اللہ کہنے سے
17:43پیشے ہٹنے کو تیار نہ تھی
17:44اور جس نے یہ ظلم کیا
17:45وہ تھا بوجہل
17:46اسلام کا بدترین دشمن
17:48ظلم و ستم کا علم بردار
17:50مکہ کا فراؤن
17:51لیکن اللہ تعالیٰ کی قدرت کام نہ دیکھئے
17:54وہ ظالموں کو فوراں نہیں پکڑتا
17:55بلکہ محلت دیتا ہے
17:57تاکہ وہ اپنی رسی کو اور دراز سمجھیں
17:59اور پھر جب پکڑ آتی ہے
18:00تو ایسی عبرتناک
18:01کہ زمانہ یاد رکھتا ہے
18:03حضرت سمیہ رضی اللہ عنہ کو شہید کرنے والے
18:05ابو جہل کا انجام
18:07بدر کے میدان میں ہوا
18:08وہی بدر
18:09جہاں مٹھی پر مسلمانوں نے
18:11کفر کے غرور کو خاکم ملا دیا
18:13وہی میدان
18:13جہاں اللہ نے ایمان والوں کے ساتھ
18:15اپنے فرشتے اتارے
18:16اور وہی دن
18:17جب حضرت سمیہ رضی اللہ عنہ کا قاتل
18:20ابو جہل
18:21زلط کے ساتھ گرا
18:22خون میں لطپت رسوہ و برباد
18:24حضرت عبداللہ بن مسعود رضی اللہ عنہ
18:26روایت کرتے ہیں
18:27کہ انہوں نے بدر کے میدان میں
18:28ابو جہل کو آخری سانسیں لیتے ہوئے پایا
18:30اس کا غرور اس وقت بھی کم نہ ہوا
18:32اس نے پوچھا
18:33کیا آج بھی ہم نے کسی کو شکست دی
18:35لیکن
18:35عبداللہ بن مسعود رضی اللہ عنہ نے
18:37اس کے غرور کو توڑتے ہوئے فرمایا
18:39آج اللہ نے تمہیں رسوہ کر دیا
18:41اے اللہ کے دشمن
18:42پھر انہوں نے
18:43اس اسلام دشمن کے سر کو تن سے جدا کیا
18:45کیا یہ تفاق تھا
18:46نہیں
18:47ہرگز نہیں
18:48ناظرین یہ مسلمان خواتین
18:50جنہوں نے اپنے ایمان کی حفاظت کے لیے
18:51ہر قسم کا دکھ جھیلا
18:53اس بات کی گواہی دیتی ہیں
18:54کہ تبتے ہوئے سہرہ
18:55سرد راتیں اور ظلم ستم کا سامنا بھی
18:57ان کے ایمان کو کمزور نہ کر سکا
18:59ان کے عزم و حمت نے
19:02ہمیشہ کے لیے تاریخ کے صفات پر
19:04ان کے قربانیوں کو محفوظ کر لیا
19:06صحابیات رضی اللہ عنہم کے قربانیاں
19:08اس قدر عظیم ہے کہ ہمارا موجود عمل
19:10ان کے قدموں کے نشانوں کے مقابلے میں
19:12کچھ بھی نہیں ہے
19:13مگر اگر ہم ان نفوس قدسیہ کے نقش قدم پر
19:16چلتے ہوئے اپنے دین کی پاشداری کریں
19:18اور شریعت کے مطابق زندگی گزاریں
19:20تو انشاءاللہ ہمیں
19:21اللہ کی رضا اور اس کا فیضان حاصل ہوگا
19:23اور ہمارا خاتمہ بھی خیر و برکت سے ہوگا
19:27انشاءاللہ
19:27ناظرین یہ تھی ہماری آج کی ویڈیو
19:29ہم امید کرتے ہیں کہ آپ کو ہماری آج کی یہ ویڈیو
19:31ضرور پسند آئی ہوگی
19:32اگر آپ کو ہماری آج کی یہ ویڈیو پسند آئی ہے
19:34تو آپ سے گزارش کرتے ہیں
19:35کہ آپ ہماری چینل کو ضرور سبسکرائب کر لیں
19:38اور ساتھ ہی لگے بیل کے بٹن کو بھی پریس کر لیں
19:40تاکہ آپ کے پاس
19:41ہماری آنے والی مزید معلوماتی ویڈیوز کا نوٹفیکشن
19:44بروقت ملتا رہے
19:45سبسکرائب کے ساتھ ہماری ویڈیوز کو لائک بھی کریں
19:47اور اپنی تین تیرائی کے اظہار کمیٹس میں ضرور کریں
19:49کمیٹس میں آپ اپنے سوالات بھی ہم تک پہنچا سکتے ہیں
19:52اللہ تعالیٰ آپ کو اپنے حفظ و مان میں رکھے
19:54آمین
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