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  • 8 months ago
"इस कहानी में एक अनोखी सीख छुपी है जो आपके जीवन को बदल सकती है! यह कहानी न केवल बच्चों के लिए बल्कि बड़ों के लिए भी एक प्रेरणा साबित होगी। अगर आपको नैतिक कहानियाँ (Moral Stories), प्रेरणादायक कहानियाँ (Inspirational Stories) और हिंदी लघु कथाएँ (Short Stories in Hindi) पसंद हैं, तो यह वीडियो आपके लिए है। पूरी कहानी देखें और अपने विचार हमें कमेंट में बताएं!


🔹 वीडियो की खास बातें:
✅ सुंदर एनीमेशन और इमोशनल कहानी
✅ हर उम्र के लिए अनुकूल
✅ सीखने और समझने योग्य नैतिकता

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Transcript
00:00मा मेरा दोस्त ना आरुन उसके रूम में एक न्यू एसी आया पता उसके एसी पर ड्रोइंग भी बनी है मुझे भी मेरे कमरे में वही एसी चाहिए वैसे भी जो मेरे कमरे में एसी आप वो कूलिंग भी कम करने लगा है
00:11बेटा तुम्हारे कमरे के लिए ही क्यों हम हॉल के लिए भी नियू एसी ले लेंगे
00:15हमारा हॉल इतना बड़ा है और एक एसी इतने बड़े हॉल के लिए काफी नहीं है
00:19बहु अगर आशु के कमरे का AC ठीक से कोलिंग नहीं कर रहा तो कमपनी वालो को बुला कर उसे रिपेर कर वालो
00:26नए AC खरीदने की क्या जरूरत है और हम कौन सा पूरा दिन हॉल में बैठे रहते हैं
00:30सब तो अपने कमरे में ही रहते हैं तो हॉल में तो दो AC लगाने का मतलब ही नहीं बनता
00:35मा जी जब अगवान का दिया सब कुछ है तो क्यों हो गरीबोस ऐसी जिंदगी जी नी
00:39अब हम लोग आपकी छोटी बहू मेरी गरीब देवरानी जैसे तो नहीं है न
00:42पिचारी कभी कभी तो बहुत तरस आता है उस पर
00:45ये पंखा इतना दीरे दीरे क्यों चलता है बहुत ज़्यादा गर्मी लगती है
00:49चाची के घर में तो AC है और हमारे घर में सिप ये पंखा और ये भी ठीक से हवा नहीं देता
00:54मा हम लोग AC कब लगवाएंगे
00:56AC काफी महंगा आता है तुम्हारे बाबा एक कूलर की तलाश में लगे हुए है
01:01जैसे ही सेकेंड हैं कूलर मिलेगा तो वो ले आएंगे
01:03अमरता एक कपड़े को गीला कर उसे अपने बेटे मोनू को उड़ा देती है
01:08जिससे उसे थोड़ी देर के लिए ठंड़क मिल जाती है
01:11जहां कोई कूलर और AC की ठंडी हवा में अपने घरों में रहकर आराम कर रहा था
01:15तो वहीं इस गरीब परिवार कोबा से एक पंखे में ही गुजारा करना पड़ रहा था
01:21और जब कभी बिजली चली जाए तो ये पंखा भी उनका साथ छोड़ देता था
01:25कि बार बार बिजली क्यों जा रही है सुबा से चौथी बार बिजली गई है
01:29बेचारा हमारा मोनू अभी तो गर्मी से परिशान होकर सोया ही था और बिजली चली गई
01:33मुझे बच्पन से मशीन में दिल्चस्पी रही उन्हें बनाने उन्हें ठीक करने में
01:38अगर पड़ाई पर ध्यान देता तो आज मैं भी भाया की तरह बिजनिस समालता और आज हमारी ऐसी हालत न होती
01:44कहने को अमृता और तन्वी एक दोसे की देवरानी जिठानी थी
02:03नए एसी मंगवाई थे दो दिन बाद जैसी कंपनी वाले एसी लेकर आते हैं तो तन्वी आंगर में खड़े होकर
02:09अपने सामने आंगर में ज़ाडू लगा रही अपनी गरीब देवरानी को अपना एसी दिखा दिखा कर चिढ़ाने लगती है
02:16अरे वाँ ये एसी तो काफी ज़ादा बड़ा है और भाईया आपने कितना माहन बताया पचास हजार ये तो काफी सस्ता है
02:22अगर लाख रुपए का भी एसी होता ना तो मैं तो यूही खरीद देती हैं हमारे घर में तो पहले से इतने सारे एसी लगे हैं
02:29लेकिन फिर भी मैंने दो एसी नए मंगवा ली हैं पैसा हो तो इंसान क्या कुछ नहीं कर सकता लेकिन कुछ बिचारे तो सिर्फ पंके की हवा में गुजारा करते हैं किस्मत किस्मत की बात होती है
02:38क्यों भाई सहाब सही कहा ना मैंने
02:40इतना कहकर तन्वी नई AC को फिट करवा कर गर्मी में नई AC की ठंडी ठंडी हवा खाती है
02:46ऐसे एक दो दिन गुज़र जाते है
02:48मोनू बीटा क्या हुआ तुम रो क्यों रहे हो किसी ने कुछ कहा
02:56मोनू की ये बास सुनकर अमरता को काफी जादा दुख होता है
03:13जिसके बाद अब विजह जैसे ही शाम को काम से घर आता है
03:17मैं सोच रही हूँ कि क्यों ना मैं भी आसपास कहीं काम देख लो
03:21गर्मी काफी जादा बढ़ चुकी है
03:23हम तो फिर भी गर्मी बर्दाश कर लेते हैं लेकिन मोनू अभी काफी चोटा है
03:27पता है अब एसी लानी की तो हमारी हैसियत नहीं ये कम से कम एक कूलर ही ले आते है
03:31ठीक है अगर ऐसा ही है तो तुम आसपास कहीं काम देख लो
03:36कम से कम गर्मी से रहत तो मिले
03:38अमर्ता को एक घर में बर्तन और जाड़ू पोचा का काम मिल जाता है
03:42अमर्ता हर रोज की तरह अपनी मालकिन तारा की घर में काम कर रही होती है
03:46कि तब ही वहां तन्वी आती है
03:48दरसल तन्वी और तारा दोस्त होती है
03:51तन्वी जैसे ही अमर्ता को फर्श पर पोछा लगाते हुए देखती है तो सब समझ जाती है और उसके काफी मजाग उलाती है
03:58और बिचारी अमर्ता इस बार भी तन्वी से कुछ नहीं कहती
04:01अमर्ता तारा से घर खर्च के लिए 500 रुपई लेकर घर जा रही होती है
04:07कि तभी उसे कबारी के दुकान पर एक AC दीखता है जिसे देख वो उसके पास आती है
04:12ये आपकी कबारी की दुकान पर AC कब से आने लगे देखने में तो नया लग रहा है
04:17नया ही है बस इसकी एक दो वायर खराब हो गई है तो इसके मालक ने इस कबारी में बेच दिया
04:23इन अमीर लोगों के भी अपने अलग चोचले हैं
04:26ये नहीं थोड़े पैसे लगा का चीज को ठीक करवा ले
04:29वैसे ये कितनी का है?
04:32वैसे तो ये AC 700 रुपई का बेच रहा था
04:34लेकिन अगर आप इसे लेना चाहती हैं तो 500 रुपई में दे सकता हूँ
04:38अमरता के पास 500 रुपई ही थे
04:40वो ज़्यादा देरी न करते हुए
04:41500 रुपई से वो AC खरीद कर घर ले आती है
04:44और अपने पती विजय को दिखाती है
04:46ये AC तो पूरा का पूरा सही है
04:49बस एक दूतार में ही दिक्कत है
04:51इसे तो मैं ही ठीक कर दूँगा
04:52विजय मशीन की फैक्टरी में काम करता था
04:55इसलिए उसे इन चीजों के काफी जानकारी थी
04:58अगले दिन वायर को ठीक कर उसे घर में लगा देता है
05:01और 500 रुपई लिया हुआ बिलकुल नई AC जैसे ठंडी हवा देने वाला लगा देता है
05:06घर में AC आने के बाद मोनू आशु को बताता है और आशु अपनी दादी और मा को बताता है
05:12अपनी सास की बाते सुनकर तन्वी का मूँ बन जाता है
05:30जैसे जैसे दिन गुजरते हैं वैसे वैसे गर्मी भी काफी बढ़ने लगी थी
05:34तन्वी के घर पर काफी सालों से एक सिंगल डोर फ्रिज था
05:38जिसे देख अब तन्वी उसे कबाडी वाले को देकर घर के लिए
05:42पचास हजार का एक डबल डोर फ्रिज लेकर आती है
05:45और अब बेसन के लड़ू लेकर अमृता के घर पहुन जाती है
05:48आप यहां और यह लड़ू कैसे? कोई कुछ कबरी है क्या?
05:52तुम तो जानती ही हो कि कुछ दिन पहले ही मैंने पचास हजार रुपए का एक नया एसी लिया
05:57और अब आज ही पचास हजार का डबल डोर फ्रिज लिया है
06:00मेरे घर में एक लाख रुपए का एसी और फ्रिज आया
06:02उसी की कुछी में आस पर उसमें मिठाई बाट रही थी
06:05अब और लोगों को तो मैंने काजुकतली दी थी
06:07पर तुम्हारे लिए मैं बेजन के लड़ू लेकर आई हूँ
06:09वो क्या है ना काजुकतली थोड़ी मेहंगी मिठाई होती है
06:12और ये अमीरों को तो आराम से हजब मुझाती है
06:14लेकिन तुम तो ठहरे गरीब इतनी मेहंगी मिठाई खाने की आदत नहीं होगी न
06:18इसलिए सस्ते लड़ू लेकर आई हूँ
06:20खाओ
06:20एक बार फिर तन्वी अमर्ता की गरीबी का मज़ा गुड़ा कर वहां से चली जाती है
06:25ऐसे कुछ दिन गुजर जाते है
06:27आशु अपनी आंगन में बैट कर कभी मैंगो शेक तो कभी आईस क्रीम खा रहा था
06:31जिसे देख मोनू उसके पास आता है
06:33मोनू रोते हुए गर आता है और सारी बात अपनी माँ को बताता है
06:54अमर्ता काफी समय से फिर लाना चाह रही थी
06:56लेकिन पैसों की कमी के चलते अमर्ता एक सेकंड हैंड फिर भी नहीं ले पाती
07:01और ऐसे ही एक दो दिन और गुजर जाते है
07:03अमर्ता के पड़ा उसमें रहने वाली आचल अपने घर का पुराना फ्रिज बाहर निकाल कर उसे बेच रही होती है
07:08बाई सहब पुराना फ्रिज है इसका मतलब ये थूड़ी ना है कि दो सो रुपे में दे दो
07:14कम से कम पात सु रुपे तो दीजे
07:16जादा से जादा मैं आपको तीन सो रुपे दे सकता हूँ फ्रिज की इससे जादा मैं नहीं दे सकता
07:22आचल अगर तुम मुझे कल तक का वक्त दो तो मैं तुम्हें पांच सु रुपे दी दूँए
07:27ठीक है लेकिन सिर्फ मैं एक दिन का वक्त दे रही हूँ
07:29अगले दिन अमरता आचल को 500 रुपे दे कर उससे उसका पुराना फ्रिज ले ले लेती है
07:35और अब उसकी भी मरमत कर उसे मेहनत करती है
07:38जहां एक तरफ अमीर बहु ने लाख रुपे का फ्रिज एसी लिया था
07:42तो वहीं दूसरी तरफ गरीब बहु ने हजार रुपे में एक एसी और फ्रिज का जुगार कर लिया था
07:48और अब ऐसे ही कुछ दिन गुजर जाते हैं
07:50रर्दीब ने कुछ समय पहले किसी से अपने बिजनिस के लिए लाख रुपे लिये थे
07:54लेकिन बिजनिस ना चलपाने के कारण रर्दीब को काफी नुकसान होता है
07:58और अब उसे अपने शियर्स बेच कर उस आदमी के पैसे चुकाने पड़ते हैं
08:02लेकिन इसमें भी एक लाख रुपे रर्दीब को कम पड़ते हैं
08:05मैंने जो तुम्हें एक लाख रुपे दिये थे मुझे वो दे दो
08:09उन पैसों से तो मैं एक और फ्रिच लेकर आ गई थी और जो मेरी सेविंग थी उनसे तो मैंने शॉपिंग कर ली थी
08:17ये तुमने क्या किया वो पैसे मैंने बुरे वक्त के लिए तो मैं समाल कर रखने के लिए दिये थे
08:22मुझे नहीं पता था कि तुम उन पैसों से वो समाल लेकर आई हो
08:25ओ गौड
08:26करणी चुकाने के लिए रणमीर एक लाक रोपे में लाया हुआ एक आफिस बेचकर उससे जिससे पैसे लिया था उससे दे देता है
08:34तो वहीं अब घर में बिना धन के एसी और बिना फ्रिज के थंडे पानी से सब काफी परेशान हो जाते हैं
08:40सबसे पहले मादूरी अपनी गरीबी के घर जाकर उसके एक हजार रोपे वाले एसी के थंडी हवा और फ्रिज का थंडा पानी पीती है तो वहीं थोड़ी देर में आशु अपने पिता के साथ अमरता के घर चला जाता है
08:51और अमरता उनका बड़े भी प्यार से स्वागत करती है और आखर में नच आते हुए गर्मी से परेशान होकर तन्वी को भी अमरता के घर जाना पड़ता है
09:00अमरता के बास उनका तन्वी को अपनी गल्दी का एसास होता है तो वहीं रर्दीब को भी अपने भाई के लिए काफी बुरा लगता है
09:17जिसे देखर अर्दीब विजय को उसके हिस्से की जमीन और जाइदा दे देता है जिसे अब गरीब बहु का परिवार भी हंसी को अपने है
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