00:00अरे पायल कैसी हो तुम?
00:02हाज वो मैंने घिया चने की दाल की सबजी बनाई थी
00:04तो सोचा तुमें भी टेस्ट करवा दू
00:05अरे ये तो मेरी फेवरेट सबजी है
00:07मुझे ये काफी पसंद है
00:08तुम रुको मैं आभी आती हूँ
00:09आ जल्दी जाओ
00:11मेरी कटोरी में अपनी बनाई हुई टेस्टी वाली सबजी लेकर आओ
00:13पायल अलका से उसकी सबजी की कटोरी लेती है
00:16और किचिन से जब उसे कटोरी में अपनी बनाई हुई सबजी लाती है
00:20तो अलका के तो होश उड़ जाते है
00:21अरे तो टिंडे की सबजी है
00:23लेकिन तुम्हारे घर से तो काफी अच्छी खुश्बु आ रही थी
00:26लगता है तुमने मुझे कोई दूसरी सब्जी ला कर दी है
00:28हरी नहीं नहीं अलका वो क्या है न मुझे टिंडी की सब्जी अलग-अलग तरह से बनाने आती है
00:33यह मैंने ग्रेवी वाले टिंडी की सब्जी बनाई है
00:35खाकर बताना कैसी बनी है या तो तुम रुको मैं अंदर से रोटी लेकर आती हूँ
00:40नहीं नहीं मैं माजी के साथ खाना खालूँगी चलो अब मैं चलती हूँ
00:43अलका काप पूरी तरह से पोपट हो जाता है और अब इसी तरह कुछ समय और गुजरता है
00:53अरे वाओ, ओनलाइन फूड अप पर तो इस वक काथी अच्छा डिसकाउंट चल रहा है
00:57अच्छा मैंने ये वाला अप डाउनलोड कर लिया
00:59यहां तो डिसकाउंट ही डिसकाउंट है काम करती हूँ
01:02आज अपने लिए वाइट सॉस पास्ता और गार्लिक ब्रेड और कर लेती हूँ
01:05अलका ओनलाइन एप से फूड और करने लगती है
01:08लेकिन जब लोकेशन डालने की बारी आती है
01:10तो बार-बार अलका की लोकेशन डिकलाइन हो रही थी
01:13अरे यह क्या हो रहा है?
01:15लोकेशन डल क्यों नहीं रही?
01:17कहीं आप में कोई प्रॉब्लम तो नहीं है
01:18अरे अलका क्या कर रही हो तुम?
01:21अब इस घर में तो कभी कुछ अच्छा बनता नहीं है
01:24सबसी खा खाकर में परिशान हो गई हो
01:26इसलिए सोचा बार से ओनलाइन खाना मंगवा लेती हूँ
01:29लेकिन यहां तो बार-बार लोकेशन एरर दिखा रहा है
01:32अरे मैडम, अभी हमारा एरिया अंडर कंस्ट्रॉक्टेड है
01:36इसलिए यहां पर अभी कोई भी ओनलाइन डिलिवरी नहीं होगी
01:39जो भी होगी, कुछ चाहिए तो बाहर से ही लाना होगा
01:41अरे लाया तो था पिछले हफ़ते समों से
01:58अब तुम चटोरी हो तो मैं उसमें क्या करूँ
02:00आशू की बात सुनकर अलका को काफी ज़्यादा गुस्सा आता है
02:04और अभी इसी तरह कुछ समय गुजर जाता है
02:06अलका के ससराल के चट पर लौकी टिंडे की जो भी खेती हुई थी
02:10अब वो लगवग खतम होने को आ गई थी
02:12ये देखकर अलका काफी खुश होती है
02:14चलो सही है कम से कम इन गंदी सब्जियों से चुटकारा तो मिलेगा
02:18बैंगन मैं फिर भी खा लेती हूँ
02:20लेकिन ये लौकी टिंडे तो मेरे गले से नीचे नहीं उतरते
02:23अलका को सब्जी खतम होने की खुशी मानूँ ऐसे थी
02:26जैसे उसके हाथ कोई ख़साना लग गया हो
02:28अलका नीचे हॉल में जाकर अराम से टीवी देख रही होती है
02:31कि तबी महले में रहने वाली लाजवन्ती
02:34देर सारी लौकी टिंडे और तोरई लेकर अलका के घर आती है
02:37अरे अनीता बेटा ये देखो मैं क्या लेकर आयू
02:40मेरी बहु ने तो कुछ जादा ही सब्जियों की खेती कर दी थी
02:44अब ये कही रखे रखे खराब ना हो जाए तो तो तुम्हारे घर ले आई
02:47ये सही किया आपने हमारी सब्जी तो खत्म होने को आगई थी
02:50आज तो मैं घिया कराय तो और साथ में कोफते की सब्जी भी बनाऊंगी
02:53एक काम क्यों नहीं कर दी है घिया टमाटर गले में टांग कर घूम लो
02:58पतानी कब इन लोगों का ये सब्जी का भूत उत्रेगा
03:01तीन-चार तरह की वही सब्जियों को खा खा कर अलका का मन हटसा गया था
03:06और आज अलका दोपेर में खाना न खा कर
03:08अलका अपने कमरे में लेटे लेटे फोन चला रही होती है
03:12कि तभी उसे सब्जियों की बनी होई एक बहुत मज़िदार रेसिपी दिखती है
03:15ये क्या सब्जियों से इतनी टेस्टी चीज भी बन सकती है
03:18ये तो मैंने कभी सोचा ही नहीं था
03:20ये साड़ी सब्जिया तो हैं ही घर में
03:22ये काम करते हूं जा कर ट्राइ करते हूं
03:25अलका रसुई में जाती है और सबसे पहले सब्जियों को लंबा-लंबा
03:28कद्दूकस कर लेती है
03:29और अब उन्हें कम तेल में फ्राई करके उस पर काली मिर्च, नमक
03:32और भी 3-4 तरह के मसाले डालती है
03:35कि तभी अलका की जिठानी अनीता
03:36रसुई में आती है और यह सब देखकर
03:38अरे अलका यह तुम ज्या कर रही हु
03:40यह सब्जियों को इस तरह से
03:42कद्धुकस क्यों कर लिया है
03:46जब भाबी इस से vegetable noodles कहते है
03:47एक तो यह healthy भी है
03:49और काफी टेस्टी भी
03:50अब यहाँ तो चाउमीन वाला आथा नी
03:52तो इसलिए मैंने सबजियों के ही नूडल्स बना दिये
03:54अलका आप जल्दी जल्दी अपनी सबजियों के नूडल्स बनाती है
03:58और जब वो उसे टेस्ट करती है
03:59तो उसे काफी अच्छी लगती है
04:00वैसे इसका टेस्ट इतना भी बुरा नहीं चितना मैंने सोचा था
04:04मतलब इसके रिव्यू सच में असली थे
04:05खराब रोड की वज़ा से आशु को कई बार घराने में काफी वक्त लगता है
04:10जिसके चलते वो बार बार अलका की चाह के मुताबिक
04:12उसके पसंद की चीज नहीं लाबाता
04:14तो वहीं बाहर की चीज़ों की क्रेमिंग को पूरा करने के लिए
04:17अलका घर पर ही इसी तरह के सब्जियों के अलग-अलग तरह की चीज़ बना कर खाती है
04:21लेकिन अब समय के साथ अलका इस से भी उबने लगती है
04:24और आज अलका सुबा सुबा ही अपने माई के के लिए निकल जाती है
04:27कितने दिनों के बाद आई मेरी बच्ची
04:30आज तो मैं सबकु तेरे पसंद का बनाऊँगी
04:32अभी अभी मंडी से ताजी ताजी मटर लेकर आयो
04:35मटर के पराटे और तो जिब बिंडी की सबजी काफी पसंद है न
04:37वो भी बना दूँगे और साथ में गिया का रायता
04:40इन सबजीों का राम मेरे सामने ना ही लो तो बहता रहे
04:43सबजीों से नफरत हो गई है मुझे नफरत
04:45अलका बेटा क्या हुआ ऐसा क्यों कह रही है तू तो सबजी शौक से खाती थी न
04:50और ये मा में क्या बताऊ मेरे ससुराल के पूरे महले में लोगों ने चत पर सबजी उगा रखी है
04:55कंस्ट्रक्शन के काम की वज़े से आस पास कोई दुकान भी नहीं
04:58अलका इतना परेशान देखकर मम्ता को भी अच्छा नहीं लगता और उसके लिए बाहर से उसका मन पसंद फास फूड ओनर करती है
05:10जिसे खाकर अलका काफी खुश होती है
05:12ऐसा लग रहा है कि इन कुछ महीनों में आज जाकर मेरा पेट भरा है मैं तो परिशान हो गई हूँ
05:18मेरा बस चले तो मैं तो अपने माई की आकर ही ठहर जाऊँ
05:23अलका का जब भी कुछ बाहर का खाने का मन करता तो अलका फॉरण अपनी मा के घं निकल जाया करती
05:28जिससे नहीं उसे सास के ताने सुनने को मिलते और नहीं अपना मन मार न पढ़ता
05:32इसी तरह कुछ दिन गुदर जाते हैं अलका अपने आंगर में जारू लगा रही होती है
05:36कि तब ही अपनी छट की बालकानी पर खड़ी रोशनी
05:39अरे अलका बेहन कैसी हतम कुछ दिने से दिखाई नहीं देरियों कहीं बाहर गई थी क्या
05:44वैसे आज क्या बनाया खाने में तुमाई केचन से बार बार कुक करके सीटी के आवाज आ रही थी
05:48आरे वो तुम्हें आलू बाल रही थी पराठी के लिए
05:51पूच तो ऐसे रही है जैसे मेरे घर पर विर्यानी बनी हो पता नहीं लोग सब्जी खा खा कर इतना खुश कैसे है
05:57ऐसे ही कुछ और समय गुजर जाता है जहां महले की चट पर सब्जी अउगाने के कई ज़्यादा फाइदे भी थे
06:03तो वहीं अब धीरे धीरे उन लोगों को नुकसान भी महसूस होने लगा था
06:07माजी ज्यादा उग गई थी और रोज इतना बनता नहीं है खाना तो इसलिए बच गई
06:24आज पडोस में भी इतनी सब्जी थी कि किसी ने ली ही नहीं
06:27एक तरब सब्जी सड गई थी तो वहीं चट पर सब्जी अउगाने के कारण
06:31अब लोगों की चट हमेशा कवे कवुतरों से भरी ही रहती जो अपनी चोच मार मार के हमेशा सब्जीयों को खराब कर देते
06:38अब इसी तरह को समय और गुजर जाता है तो वहीं बार बार अपने माई के जाना अलका को भी कुछ अच्छा नहीं लगता
06:56तो इसलिए अब वो आशू से जब घर बदलने को कहती है तो
07:00तुम्हारे दिमाग तो नहीं खराब हो गया है इतनी मुश्कल से सेविंग करके मैं और भीया ने इस जगा पर घर लिया
07:06और तुम हो कि अब यहां से घर बदलने की कह रही हो
07:08और ऐसे कुछ समय है और है और फिर यह सारा कंस्ट्रक्शन का काम खतम हो जाएगा और हम आराम से रहेंगे
07:13मैं तो यहां जब से आई हूँ तब से बस यही सुन रही हो कुछ समय कुछ समय यह कर करके पूरा साल निकलने को आ गया है
07:19मैं बस यहां और नहीं रहूँगी मैं जारी हो अपने माई के अब जब सब काम खत्म हो जाएगा तो मुझे बुला लेना
07:25अलका इस तरह से घर नहीं चलता है इतनी सी बात पर कौन अपने ससुराल छोड़ कर जाता है अच्छे तुम परेशान मत हो आज मैं तुम्हें लंच के लिए बहार ले चलता हूँ
07:33आशो की एक नहीं सुनती और वो अपने माई के जाकर बैट जाती है महीन भर होने को आ गया था लेकिन अलका ससुराल जाने का नाम ही नहीं ले रही थी जिसे देखकर ममता
07:42अलका बेटा कब तक इस तरह माई के में बैट जाती है अलका बी अपने ससुराल वालों को चोड़ कर खुश नहीं थी लेकिन अपनी परिशानी को देखती वुए अलका माई के में ही रहने का फैसला करती है
08:01इसी तरह कुछ समय और गुदर जाता है और आज अचानक आशुक अलका के पास कॉल आता है
08:07मैडम जी अब जल्दी से सामान बाद लो यहां कंस्ट्रक्शन का काम पूरा हो चुका है और आपके लिए एक और सर्प्राइज है
08:13सच कह रहे हैं आप कंस्ट्रक्शन का काम पूरा हो गया इसका मतलब अब आने जाने में कोई दिक्कत नहीं होगी अब आप मेरे लिए रोज अच्छे चे काने की चीज़ ला सकते हैं
08:22ऐसा ही कुछ समझ लो लेकिन अब इसकी जरूरत नहीं पड़ेगी अब जल्दी से तुम सामान पैक करो मैं तुम्हें लेने आ रहा हूँ
08:27अलका खुश होकर जल्दी से अपना समान पैक करने लगती है
08:30कुछी देर में आशू अलका की घर आता है और अब दोनों पती पतनी घर के लिए निकल जाते है
08:35अलका जैसे अपने महले में आती है तो देखती है कि सारा कंस्ट्रक्शन का काम पूरा हो चुका है
08:40रोल बिल्कुल क्लीन है आने जाने में भी कोई दिक्कत नहीं है
08:43तो भाई अलका अब थोड़ा और अंदर आती है तो देखती है कि उसके महले में अब एक बहुत बड़ा कंप्लेक्स बन चुका है
08:49जिसमें राशन सब्जी के साहरँ साहर गर की कई सारी जरूरत का समान है
08:53यया तो कॉंप्लेक्स है लेकिन यहाँ कब बना मुझे तो लगा था यहां कोई बिल्डिंग बन रही है
08:58यहाँ पर अब complex बन चुका है
09:00अब हमें समाल लेने के लिए कहीं दूर नहीं जाना होगा
09:03घर से बाहर निकलते ही कुछ दूर पर सब कुछ मिल जाएगा
09:05यहाँ तो तुम्हारी तरह तरह की खाने पीने की चीज भी है
09:09चलो अब हम अंदर चलते हैं
09:11अलका अपने सस्राल वालों और महले के कई सारे लोगों के साथ
09:14उस परिसर के जब अंदर आती है तो वहाँ सब्जियों के साथ साथ
09:18और भी कई तरह के खानी पीने की चीज हैं थी
09:20वो देखो वो मेरा फेवर बिस्कीदे मुझे दिलाओ ना
09:24हाँ बेटा क्यों नहीं वैसे भी तू काफी परिशान हुई है कुछ महीनों में
09:27आज मैं तुझे सब कुछ तेरा मन पसंद दिलाओंगी
09:30चलो सरकार ने हम लोगों को कुछ महीने की परिशानी थी
09:34लेकिर आखिर में सब कुछ ठीक भी कर दिया
09:36कॉंपलेक्स बन जाने की वज़ा से अब किसी को भी छट पर सबजियां होगाने की जरूरत नहीं थी
09:41इसलिए अब धीरे-धीरे सारी सबजियां खत्म होने के बाद सभी महले के लोग
09:44उन सबजियों के गमले को हटा देते हैं
09:46महले में कॉंपलेक्स बनने की सबसे ज़ादा खुशी अलका को थी
10:03तो अब अलका आराम से हर रोज बिना मूँ बनाए गए
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