00:00अरे कोई है बाहर, बात्रूम का दर्वाजा नहीं खुल रहा, कमबक्त, पता नहीं इस घर में लोग कैसे हैं, कुछ ठीक ही नहीं करवाना चाहती, 200 रुपे खर्च करने में इनको पता नहीं क्या हो जाता है, भकवान ना करे कभी कुछ पैसे बचाने की चलते कोई बड़ा �
00:30सिमरन अपने परिवार से परेशान होकर अब उन्हें जवाब देने लगती है, इसी तरह कुछ दिन बीच जाते हैं और एक दिन राजू स्कूल से घुस्से में घर आता है, और फ्रिज में ठंडा पानी ना देखकर फ्रिज के धकन को जोर से पटक कर बंद करता है, जिस व
01:00अंदर, आज मैं इसका सारा भूत उतारती हूँ, मेरी बहुने बच्चा नहीं आतंगवाद पैदा कर रखा है, बस घर में नुकसान करना आता है, पैसे क्या पेड़ पर उखते हैं, तुझे क्या लगता है, कि तू तोड़ फोड़ करेगा और हम चुटकियों में सामान ल
01:30बहुत दस रुपाई का फ्रिज नहीं आता जो नए आले आएंगे, अब अगले महीने आएगा, जो आएगा, जब तक किसी से काम चलाओ
01:37इतना बोलकर विनूद फ्रिज का धंकन उठाकर उसे लगा देता है, और फ्रिज के धंकन को बंद रखे रहने के लिए बाहर से कुटसी लगा देता है, ये देखकर सिम्रन को और गुस्सा आता है, इसी तरह कुछ दिन बीच जाते हैं और एक दिन जब सिम्रन रसोई में �
02:07सब तोरफोर करने में लगे हुए हैं, वहु कुकर ही तो है, हो गया खराब बिना कुकर के भी खाना बन सकता है, और रही कुकर की बार अगले महीने ला दूंगे नया कुकर
02:16इस बार अपनी सास के हरकतों से उसको बहुत गुस्सा आता है और अब कुछ बोलना ही बंद कर देती है
02:21ऐसे एक दिन गाड़ी खराब होने की वज़ा से अमित गाड़ी को गाराज में छोड़ कर रिक्षा से घर आता है और उसे घर आते हुए काफी रात हो जाती है
02:29लो जी आ गई जनाप जी फोन स्विच आफ करके बैठे थे और आज इतना समय कहां लग गया और तेरी गाड़ी कहां गई
02:35क्यों पापा? आपको नहीं पता उनकी गाड़ी खराब है गराज में पड़ी होगी गाड़ी और आप उस गाड़ी को बेच कर नई गाड़ी ले लिजए अगर इस घर में अब गाड़ी नहीं आई तो मैं भी नहीं रहूंगी
02:45मा, अब मैं कमाने लगा हूँ, तो मैं नहीं सुनने वाला आपकी, मुझे गाड़ी की ज़रूरत है और सिम्रन बिल्कुल सही कह रही है
02:51अमित और सिम्रन अपना फैसला सुना कर वहां से चले जाते हैं
02:55कुछी दिनों में अमित अपनी पुराने गाड़ी बेच कर नई गाड़ी ले ले लेता है और ये देखकर आशा का मुझे बन जाता है
02:59और इसी तरह कुछ महीने बीट जाते हैं और एक दिन पूरा परिवार घूमने के लिए बाहर जाता है
03:04घर में विकास का फोन अच्छा था इसलिए पूरा परिवार उसी में फोटो खिचवाता है
03:08पर सिम्रन और अमित अलग जाकर फोटो खिचवाते हैं और ये देखकर आशा अपने बेटे बहु से कहती है
03:14बहुत जब से तु घर में आई है मेरे घर का हिसाब किता भी बिगड़ चुका है
03:19हमारे पास क्या फोन नहीं है देख पुरी दुनिया फोन में फोटो किचवा रही है और तू सो रोपे देखर अपने पती के साथ अलग से फोटो किचवा रही है
03:26पैसे नहीं लगता क्या, मा जी मैंने आपसे तो पैसे तो नहीं लिये न, और रही पैसे के बाद तो सौर रपी की फोटो कोई महंगी नहीं है, और मैं अपने जेटी की फोन में अपने पती के साथ कैसे फोटो किछवा सकती हो, मुझी क्या अजीब नहीं लगेगा
03:39अब सिम्रयन अपनी सास की एक बात एक कांसे सुनती और दूसरे कांसे निकाल देती
04:06देखते ही देखते कुछ महीने और बीट जाते हैं और एक दिन आशा के घर कुछ महमान आते हैं और सिम्रन अपनी मा और जिठानी के सास्थ शॉपिंग करने के लिए मौल जाती है
04:14कुछ ही देर में तीनों शॉपिंग करके घर आती है और मेहमानों के लिए खाना बनाने लगती है
04:31इतना बोलकर सिम्रन जब गीजर आन करती है तो उसे हलका सा करेंट लगते है और वो बाहर जाकर सबसे बोलती है
04:46मैं बता रही हूँ आप लोगों की लापरवाही और गंजूसी की वज़े से किसी दिन कोई बड़ा हाथसा हो जाएगा
04:51किचिन में जो गीजर रखा हुआ है आपका 20 साल पुराना उसमें करंट आ रहा है
04:56स्विच बोर्ड बदल दीजे या तो फिर वहाँ से गीजर हटा दीचे
05:00गीजर से करंट आ रहा है कोई चालू मत करना
05:02मुझे लगा है बहुत तेसका करंट इसलिए कह रही हूँ
05:05बहु हमें तो ये समझ नहीं आ रहा कि तुमने गीजर क्यों चालू किया
05:09अरे बहु अभी कौन सा बहुत ज़्यादा ठंड आ गही जो तुमने गीजर रॉन कर दिया
05:14गर में रॉड भी तो रखी थी, पानी ही करम करना था तो उसमें कर ले ती
05:17पर तुम्हें क्या, तुम्हें तो बस बिल बढ़ाना आता है, पैसे तुम्हारे जेब से थोड़े न जाते हैं
05:22विनूद की बाते सुनकर सिम्रन मुँ बनाकर रसोई में जाती है और महमानों के लिए खाना बनाने लगती है
05:27कुछी देल में घर में महमान आते हैं और पूरा परिवार एक साथ खाना इंजॉई करते हैं
05:31सिम्रेन बहु मेरा तो बड़ा मन था अमित की शादी में आने का
05:35पर भाया ने शादी ही तब रखी जब बच्चों की पेपर चल रही थे
05:38मैं चाहा कर भी नहीं आ सकी
05:40इसलिए आज जब टाइम मिला तो इस्पेशल तुम से मिलने के लिए आ गई
05:43वो भी तुम्हारे हादों का खाना खाने
05:46अरे बहु क्या बताऊं तुम्हारी बुगा ने तो मेरे जीना हैं हराम कर दिया था
05:51आखिर अमित इसका लाड़ना भतीजा जो है
05:54वैसे खाना तो तुमने बड़ा ही मज़ेदार बनाया है
05:56भावी बहु तो तुम्हारी दोनों ही गुनी है
05:59वो तो है मेरी बहु दोनों ही हर चीज में तेज है
06:03मैं तो भगवान का शुक्र गजार करती हूँ जो मुझे इतनी अच्छी बहुए मिली
06:07आशा सभी के सामने अपनी दोनों बहु की बहुत तारीफ करती है
06:10कुछी देर में घराई महमान खाना खाकर चले जाते हैं
06:12और पूरा परिवार अपने कमरे में जाकर रहराम करता है
06:15इसी बीच आशा को प्यास लगती है और वो रसोई में जाती है
06:18जहां उसकी नज़र सिंख में पड़े कुछ बरतन पर पड़ती है
06:20जिसे देख वो बढ़डाना शुरू कर देती है
06:22अब तो ये लोग अपनी मनमानी करने लगे हैं
06:37अब मुझे ही धोना पड़ेगा बरतन
06:39इतना बोलकर जैसे या आशा नल चालू करती है
06:42अब पानी ठंडा होनी के वज़ए से वो नल बंद कर देती है
06:44अरे बापरे रात में पानी कितना ठंडा हो गया है
06:47गीजर चलाना ही पड़ेगा
06:49इतना बोलकर आशा गिले हातों से गीजर ओन करती है
06:52और उसे जोरदार करेंट लगता है
06:53करेंट लगने की वज़ए से वो नीचे जमीन पर गिर जाती है
06:56और शौर्ट सरकेट होने की वज़ए से गीजर फट जाता है
06:59गीजर फटने की आवाज सुनके तूरा परिवार भागता हुआ रसोई में आता है
07:02और वो लोग देखते हैं कि आशा जमीन पर बेहोश पड़ी है
07:05जिसके बाद आमेत और विकास अपनी मां को उठाते हैं
07:08और अपनी नई गाड़ी में बैट कर अस्पताल ले जाते हैं
07:10जहां विनोध अपनी सालों की जमापूरी अस्पताल में भड़ता है
07:13अच्छा हुआ बेटा जो तुमने नई गाड़ी ले ली थी
07:30अगर आज तुम्हारी वही पुरानी खटारा गाड़ी होती तो हम तुम्हारी मां को सही समय पर हॉस्पिटल न दे कर जा पाते
07:35हमें लगा था कि नई गाड़ी लेने में पैसे वेस्ट हो जाएंगे
07:39इस पुरानी गाड़ी को दो साल और चला लेगे पर अब लगता है कि तुम लोग सही कहते थी
07:43जरूरत की चीजों में पैसा लगाना भी बहुत जरूरी होता है
07:47अब बस एक बार आशा को होश आ जाए तो मेरी जान में जान आए
07:50पापा मैंने डॉक्टर से बात की है करन तेज लगने की वज़ा से मा बेहोश हो गई है
07:55सिर में थोड़ी सी चोट लगी है वो दो घंटे में होश में आ जाएंगी
07:58और आज हमें समझ में आ गया कि आप और मा क्यों पाई पाई बचाते थे
08:02हमारे पास तो आज पैसे ही नहीं थे
08:03अगर आप अपनी जमा पूंजी हॉस्पिटल में न भरते तो शायद मा का इलाज भी न हो पाता
08:08इसे एक छोटे से हाथसे से ना सिर्फ विकास और बाकी लोगों को ये सीख मिलती है
08:18कि थोड़ी कंजोसी करके पैसे बचाने चाहिए तो वही विनोध को भी ऐसास होता है
08:22कि जरूरत पढ़ने पर कुछ चीजों के लिए पैसे खर्च कर देने चाहिए
08:26कुछी देर में आशा होश में आती है और अगली सुबा वो अपने घर आती है
08:29घर आते ही विनोध सबसे पहले घर में रखी पुरानी चीजों को निकालता है
08:32और अपनी बचाई हुई जमापूंजी से नया गीजर, फ्रिज, बात्रूम के दर्वाजा, कुकार, नई बर्तन जैसी चीज लाता है
08:38जिसे देखकर सिम्रन काफी खुश होती है
08:40अमित आज में बहुत खुश हो, इस छोटे से एकसिदेंट से सब को सीख चो मिल गई है
08:45अरे, वो सब तो ठीक है पर कोलगेट का रख़ा है
08:48क्या अमित, तुम्ही तो सामने की चीज नजर नहीं आती, ये तो रहा कोलगेट
08:53अरे, पर ये तो खतम है
08:54इतना बोलकर सिम्रन रसोई से बेलन लेकर आती और बेलन की मदद से कोलगेट निकालती है
09:03जिसके बाद अमित ब्रश करके बाहर आता है
09:05तो वही स्कूल से आकर राजू भी अपनी पुरानी सारी कॉपियों को जमा करता है
09:09और उसके खाली पेज को फाल कर एक नई कॉपिय बना कर अपनी मासे कहता है
09:35इस तरह अब दोनों तरफ लोग समझ जाते हैं
09:38मिलकर पैसों की बजट के साथ-साथ जो जरूरत के समान होते हैं उस पर
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