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अयोध्या के महल में उस रात क्या हुआ जब मंथरा ने फिर से कैकई को भड़काने की कोशिश की?
क्या कैकई अपने राम से दूर हो गई, या दिव्यता ने अंधेरे पर विजय पाई?
देखिए इस रहस्यमयी कहानी को पूरी तरह से…
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Transcript
00:00बगवान राम के बनवास के बाद मन्थरा फिर लोटी लेकिन इस वार ककई ने जो कहा उसने सब बदल दिया
00:06बगवान राम के बनवास के बाद एक रात अजोद्या के महल में ककई के कक्ष से अजीफ उस फसाने की
00:12आवाजे आने लगी
00:13आदी रात का समेता महल के दीपक अपने आप बुजने लगे और ठंडी हावा ककई के कक्ष में बढ़ गई
00:20ककई अचानक नीन से जागी दरवाजा बीना शुए दीरे दीरे खुला और अंदेरे में खड़ी थी मंत्रा
00:26लेकिन आज उसकी आँखे पहले जैसी नहीं थी उनमें अजीब चमक थी जैसे कोई और बोल रहा हो
00:32वेफुसुसाई महरानी राम लोट आए तो सब खत्म हो जाएगा भर्त का राशन जाएगा
00:38कई का दिल तेज दड़कने लगा अचानक अक्ष में रखी बगवान राम की मूर्ती से दीपक तेज जल उठा पूरा
00:45कमरा परकाश बर गया
00:47कई कामती वाज में बोली बस मंतरा तेरी बातों ने पहले ही अजोध्या को शोग दिया
00:53जैसे ही राम का नाम लिया गया मंतरा पीशे हटने लगी उसका चेहरा डर से बदल गया और अगले ही
00:59पल अंदेरे में गाय पोगी
01:01कई समझ चुकी थी कभी कभी बुराई इंसान नहीं उसके मन का भे होता है कहते है उस रात के
01:08बाद मंतरा कभी कई के कक्ष में दिखाई नहीं दीप क्या सच में आई थी जांक कई का पस्टा चाप
01:16ही उसका रूप बन गया था जैसी राम
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