00:00कहते हैं, जब बगवान शिवर होते हैं तो श्रिष्टी बच जाती है, लेकिन जब शिप करोधिर होते हैं, तो सवेम
00:06कारजनम लेता है, राजा दक्ष ने जग किया, देवता को बुलाया, लेकिन जान गुठ कर अपमान किया बगवान शिवर का।
00:30से जनम हुआ रक्त पिकासु जोदा बीर बदर का और अकास से प्रकट वी भ्यानक सक्ती मां भदर काली जग्य
00:37स्तल्प तुफान आया आसमान काला पड़ गया देपता शिपने लगे बीर बदर ने करोध में जग तोड़ दिया और दक्ष
00:45का अभिमान उसी अगनी में जल गय
00:47लेकिन असली वे अभी बाकीता शिप के करोध से प्रगट हुआ स्वेम का स्वामी मरिट्यू का प्रहारी काल भैरब जिसकी
00:56एक ड्रिष्टी से ही पाप जल जाते और जिसका नाम सुनकर जमराज भी ठहर जाते जाद रखना शिप प्रेम है
01:04पर उनका करोध स्वेम अंत है
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