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जब माता सती के अपमान और मृत्यु की खबर भगवान शिव तक पहुँची, तब सृष्टि ने पहली बार उनका प्रचंड क्रोध देखा।
उनकी जटा से जन्म हुआ महान योद्धा वीरभद्र और उग्र शक्ति माँ भद्रकाली का।

लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई…
शिव के क्रोध से प्रकट हुआ समय और मृत्यु का रक्षक — काल भैरव।

यह कथा बताती है कि जब प्रेम का अपमान होता है, तब न्याय स्वयं देवों के देव करते हैं।
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Transcript
00:00कहते हैं, जब बगवान शिवर होते हैं तो श्रिष्टी बच जाती है, लेकिन जब शिप करोधिर होते हैं, तो सवेम
00:06कारजनम लेता है, राजा दक्ष ने जग किया, देवता को बुलाया, लेकिन जान गुठ कर अपमान किया बगवान शिवर का।
00:30से जनम हुआ रक्त पिकासु जोदा बीर बदर का और अकास से प्रकट वी भ्यानक सक्ती मां भदर काली जग्य
00:37स्तल्प तुफान आया आसमान काला पड़ गया देपता शिपने लगे बीर बदर ने करोध में जग तोड़ दिया और दक्ष
00:45का अभिमान उसी अगनी में जल गय
00:47लेकिन असली वे अभी बाकीता शिप के करोध से प्रगट हुआ स्वेम का स्वामी मरिट्यू का प्रहारी काल भैरब जिसकी
00:56एक ड्रिष्टी से ही पाप जल जाते और जिसका नाम सुनकर जमराज भी ठहर जाते जाद रखना शिप प्रेम है
01:04पर उनका करोध स्वेम अंत है
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