00:00नर्मदा किनारे बगवान राम के साथ क्या हुआ था कहा जाता है एक राद नर्मदा नदी के किनारे ऐसा कुछ
00:06हुआ जिसे देहकर स्वें बगवान राम भी कुछ पल के लिए मोन होगे
00:09बनवास के दोरान बगवान राम माता सिता लक्षमन गनेक जंगलों से गुजरते हुए नर्मदा नदी किनारे पहुंचे
00:15लेकिन उस राद ना नदी की अवास्ती ना पंशियों की पूरा जंगल जैसे अधरिश्य सक्ती से गिरा हुआ था
00:21लक्षमन जी ने दीरे से कहा भहिया जहां कुछ अलोकिक है जैसे ही बगवान राम ने नर्मदा जलकोष हुआ पानी
00:28अचानक गोल गोल गुमने लगा लहरों के बीच एक परकाश उठा जल से एक दिब्य इस्तरी का स्वर गुंजा राम
00:34मैं नर्मदा हूँ अचानक चारों औ
00:37द्वानी सुनाई देने लगी नर्मदा मैया बोली कल जुग में अदकार बढ़ेगा लोग पापों से गिर जाएगे तब मेरा जल
00:44बिना तबके भी उन्हें मुक्त करेगा जे सुनकर बगवान राम ने आंखे बंद कर आशिरवाद दिया और उशिसन जंगल में
00:51तेज हवा
00:52चलने लगी कहते हैं आज भी अममस्या की रात नर्मदा की नारे कभी कभी जल अपने आप चमकने लगता है
01:00और द्यान से सुनो तो लहरों में एक आवाज आती है राम राम शायद बो रात आज भी खतम नहीं
01:08हुई अगर आप भी नर्मदा मैया की सक्ति मानते हो तो कमेंड
01:12में लिखे जै शिरिराम
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