00:00जब तुफान में फसे लबकुष और मदद करने आए हनुमान जी उस राज जंगल ने सांस लेना बंद कर दिया था आकाश काला नहीं खूनी लग रहा था ते तुफान में पेट जड़ों से उखर रहे थे बिजली दर्ती को चीर्टी वे गिर रही थी उसी अंदेरे में दो
00:30तुफान थम नहीं रहे था बलकि किसी के आने से डर रहा था अचानक अधिकार में एक विशाल बानार अकरीती उबरी आंखे अगनी से ढरती देह परबसी अडिक महाबीर हनुमान उन्होंने गदा उठाई एक गरजना हुई और तुफान गुटनों पर आ गया नदी शान
01:00शीराम जै बजरंगवली
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