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सीता स्वयंवर की यह अद्भुत और रहस्यमयी कथा बताती है कि शक्ति नहीं, बल्कि भक्ति और विनम्रता ही सच्ची जीत दिलाती है।
जब लंकापति रावण भगवान शिव का दिव्य धनुष उठाने में असफल हुआ, तब पूरी सभा सन्न रह गई।
फिर आए प्रभु राम — और एक क्षण में इतिहास बदल गया।

यह कहानी प्रेम, आस्था और धर्म की उस शक्ति को दर्शाती है जिसने अहंकार को पराजित कर दिया।

🙏 अगर आप भी सनातन धर्म और पौराणिक कथाओं से प्रेम करते हैं तो वीडियो को लाइक और शेयर जरूर करें।

जय श्री राम
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Transcript
00:00जब रावन ने शिब दनुष उठाने की कोशिश की और सवा में कुछ भ्यानक हुआ आईए जानते हैं इस कथा
00:06में उस दिन स्वंबर में सिर्फ विवहा नहीं तया हो रहा था बलकि एक शराफ जागने वाला था और रावन
00:13को इसका अंदाजा भी नहीं था
00:15मिथला की सबा में रखा था बगवान शिफ का दिब्वय दनुष जिसके बारे में कहा जाता था जिसमें हंकार होगा
00:21उसका बिनाश निश्चित होगा राजा जनक ने गोशना की जो इसे उठाएगा बही सीता का पती बनेगा लेकिन किसी को
00:29नहीं पता था आज सबा में बिना
00:31का संकेत आने वाला है अचानक अकाश में काले बादर शागे और परवेश हुआ लंका के राजा रावन का उसकी
00:39हसी ने पूरा महल काप उठा रावन ने गरव से दनुष पकड़ा लेकिन जैसे ही उसने बल लगाया दर्ती हिलने
00:46लगी दीपक भुजने लगे और दनुष में
00:48ब्यानक कंपन निकलने लगा मानो स्वेम देवता उसे चितावनी दे रहे हो रावन पूरी शक्ती लगाने के बाद भी दनुष
00:56को हिला तक नहीं पाया उससन उसका हंकार चूर हो गया सबा में सनाटा था तभी शांत कदमों में आगे
01:03बड़े राम ना करोध ना शक्ती का �
01:06परदर्शन बस भक्ती जैसे ही राम ने दनुष को सुवा भ्यानक कंपन शांत हो गया और अगले ही पल दनुष
01:13तूटने की गूंज से अकाश फट गया सब समझ गे जे केवल सबंबर नहीं जे हंकार और धरम के बीच
01:20पहली लड़ाई थी सीटा ने भरमाला पहनाई और उ
01:36एची दिराम
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