00:00क्या आप देख पाएंगे उस बियानक रात को जब हनुमान जी पहली वार लंका के और उड़े और मोट की
00:05आंदी उनके रास्टे में थी अंदेरा समुंदर की लहरे उर्ग और लाल जैसी आग की तरह फट रही हो और
00:11उस बीच एक अकरिती जो हवा को चीरते हुए परबत की �
00:15और चाई से सलांग मार रही थी हनुमान जी उनकी आंखों में केवल एक चीज सीता माता की तलाश लेकिन
00:21रास्ता आसान नहीं था पहले आई सुरसा की ब्यानक शाया उसके मूँ जैसे अगनी ओ दुमर के साथ खुल रहो
00:29हनुमान जी का शरीर बढ़ा फिर सुरग गया और �
00:32चलाकी से उस भूतिया सक्ति को मात देगे फिर आई सिक्सका की गहरी काली परशाय जो उनकी आत्मा तक को
00:40शू रही थी लेकिन हनुमान जी ने अपनी शक्ति और तेज बुद्धी से उसे चकमा दे दिया और उसके पंजे
00:46को लहरों में सैंग दिया आखिरार उनने लंका की
00:49और देखा सोने की नगरी लेकिन उसके चारों और अंधकार और भेके साया रावन का महल राक्षो का डेरा और
00:57वहां हवा में गुसता था मरित्यू का संदेश लेकिन हनुमान जी का हरिद्य कह रहा है था सीता माता को
01:03डोड़ना है चाहे पूरा रावन और उसकी सेना क्यों �
01:07और तब ही उनकी उडान ने समुंदर और अकाश दोनों को ठरा दिया जैसे आने वाला बिनाश पहले ही चेतावनी
01:14दे रहा हो जैशिर राम
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