00:00शिवरातरी की वे रात जब महादेव पंची बन गे आई ये जानते हैं
00:05शिवरातरी की एक रात ऐसी जब अकाश में उड़ रहा पंची असल में स्वे महादेव थे और जो उन्होंने देखा बे देकर कैलाश भी काँ पुठा
00:16शिवरातरी की वे रात ना चान दिख रहा था ना तारे चमग रहते हावा अचानक रुप गी मंदिरों की घंटी अपने अब बजने लगी और दर्ती पर अद्रिश्य आँखे खुल चुकी थी
00:27कहते हैं महादेव ने उस रात एक रहसे में पंची का रूप लिया लाल चमक्स्ती आंके काले पंख और ऐसी दिरिश्टी जो आत्मा के बीतर तक देख ले बे पंची उपर से नहीं सीधे लोगों के करम देख रहा था
00:42महादेव ने देखा कुछ लोग शिवरातरी पर भक्ती का डोंग करे थे मन में पाप हरिद्य में हंकार और जुबान पर शिप का नाम तबी आकाश फट गया शिवरातरी को दोखा मत समझो मैं मोन हूँ अंदा नहीं अगले ही पल बे पंची काले धुए में बदल गया और
01:12महादेव अब भी देख रहे है जे कथा सिर्फ कहानी नहीं एक चेताबनी है इस वीडियो को अंत तक देखे सची बक्ती क्या होती है समझ आ जाएगा हर हर महादेव
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