00:00जब प्रेम तूटता है तो इंसान रोता है लेकिन जब शिब का प्रेम तूटा तो ब्रहमांड काम बुठा आईए जानते
00:08हैं इस कथा में एक रात ऐसी भी आई जब पूरी स्रिष्टी डर से काम पुठी थी केलाश पर अजीव
00:15सरनाटा था अकाश काला हो चुका तो और महा
00:17देव गहन समादी में थे तबी एक इस्तरी हिमाले की बर्फ पर नंगे पाउंच चलती हुई पूंची ना ठंड का
00:25असर ना भेबस आँखों में एक ही नाम शिब देवताओं ने चिताबनी दी महांदेव का करोद जा गया तो परले
00:33हो जाएगी लेकिन वो नहीं रुकी द
00:47इसे भी बड़ा है पूरी स्रिष्टी ठंगी और उसी सन बहुत पस्मनी शक्ती बनगी करोद शान्त हुआ अंदकार परकाश में
00:56बदल गया तब भ्रहमांट ने जाना सच्चा प्रेम वो है जो बिनास के सामने भी अधिक रहे क्यूंकि शिब प्रिक्षा
01:05लेते हैं लेकिन
01:06सच्ची आस्ता को कभी हारने नहीं देते हर हर महादेव आप सबी को महाशिबरातरी की बहुत बहुत भधाई हो
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