00:00उस रात लंका क्यों काम पुठी थी आई ये जानते हैं इस कथा में जब लंका काम पुठी उस रास
00:05मुंदर शांत नहीं तब वो डर रहा था क्योंकि पहली वार कोई ऐसा आ रहा था जिसे खुद मरित्यू भी
00:10नहीं रोक सकती थी हनुमान जैसे ही उन्होंने परबत पर कदम
00:13रखा दर्ती थरगी आसमान में काले बादल गूमने लगे और हवा में एक अजीब सी चिंग गूज उठी उन्होंने आंके
00:20बंदगी बस एक नाम लिया रहा और अगले ही पल उनका शरीर बनने लगा पहार शोटा लगने लगा सुमुदर सुरकरने
00:26लगा फिर एक गर्जना
00:27हुई लंका के महलों में बैठे राक्षकों के दिपक अपने आबुजगे पर जे जात्रा आसान नहीं थी अचानक सुमुदर से
00:34निकल ये सूर्सा उसका बिशाल मूँ आसमा जितना बढ़ा मैं तुमें निकल जाऊंगी उसकी आवाज में मोती हनुमान जी मुसकुराए
00:41औ
00:41और उससे भी बड़े होगे फिर आई हिसका जो परशाई पकर का आत्मा को कैद कर लेती थी लेकिन वो
00:47बूल गई थी जे कोई साधारन परानी नहीं है जे बगवान राम का सेबक था जब पहली वान हनुमान ने
00:54लंका को देखा तो सोना चमक नहीं रहा था वो जल रहा था ह
00:57पंकार की आग में और उस रात लंका को पता नहीं था कि एक बानर नहीं उसका काल उसकी और
01:04उट्टा आ रहा है जै शिरी राम जै बजरंग बली
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