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उस रात समुद्र शांत नहीं था…
क्योंकि हनुमान जी पहली बार लंका की ओर उड़ान भर रहे थे।
सुरसा, सिंहिका और राक्षसों की नगरी —
हर बाधा को पार करते हुए रामदूत ने साबित किया कि
भक्ति और शक्ति जब साथ हों… तो अधर्म का अंत तय है।

क्या लंका को उस रात अपने विनाश का संकेत मिल गया था?

अगर आपको ऐसी रहस्यमयी और रोमांचक पौराणिक कथाएँ पसंद हैं,
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🔥 जय श्री राम
🔥 जय बजरंगबली
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Transcript
00:00उस रात लंका क्यों काम पुठी थी आई ये जानते हैं इस कथा में जब लंका काम पुठी उस रास
00:05मुंदर शांत नहीं तब वो डर रहा था क्योंकि पहली वार कोई ऐसा आ रहा था जिसे खुद मरित्यू भी
00:10नहीं रोक सकती थी हनुमान जैसे ही उन्होंने परबत पर कदम
00:13रखा दर्ती थरगी आसमान में काले बादल गूमने लगे और हवा में एक अजीब सी चिंग गूज उठी उन्होंने आंके
00:20बंदगी बस एक नाम लिया रहा और अगले ही पल उनका शरीर बनने लगा पहार शोटा लगने लगा सुमुदर सुरकरने
00:26लगा फिर एक गर्जना
00:27हुई लंका के महलों में बैठे राक्षकों के दिपक अपने आबुजगे पर जे जात्रा आसान नहीं थी अचानक सुमुदर से
00:34निकल ये सूर्सा उसका बिशाल मूँ आसमा जितना बढ़ा मैं तुमें निकल जाऊंगी उसकी आवाज में मोती हनुमान जी मुसकुराए
00:41
00:41और उससे भी बड़े होगे फिर आई हिसका जो परशाई पकर का आत्मा को कैद कर लेती थी लेकिन वो
00:47बूल गई थी जे कोई साधारन परानी नहीं है जे बगवान राम का सेबक था जब पहली वान हनुमान ने
00:54लंका को देखा तो सोना चमक नहीं रहा था वो जल रहा था ह
00:57पंकार की आग में और उस रात लंका को पता नहीं था कि एक बानर नहीं उसका काल उसकी और
01:04उट्टा आ रहा है जै शिरी राम जै बजरंग बली
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