00:00शिपजी जी ने हनुमान जी पर तेशूल क्यों चलाया आई ये जानते हैं इस कथा में
00:04कहते हैं एक रात ऐसी आई जब स्वे महादेव ने करोध में आकर हनुमान जी पर अपना तेशूल उठा लिया
00:10था और उस पल पूरा भ्रहमांड काम उठा
00:12समय था कल जुक्के अरम का दर्ती पर अधरम भड़ रहा था लेकिन हनुमान जी गहरे ध्यान में थे इतने
00:19गहरे की देवताओं की पुकार भी उन तक नहीं पहुँच रही थी अकाश काला हो गया तभी हवा अचानक भारी
00:26होगी देवताओं ने भेवी तो होकर शिपजी जी
00:28को पुकारा तभी केलाश परबरबर महादेव की तीसरी आंख दीरे-दीरे खुलने लगी दर्ती हिनने लगी नदिया उल्टी दिशा में
00:36बहने लगी शिपजी परगट हुए रूदर रूब में उन्होंने हनुमान जी को जुगाने के लिए पुकारा पर कोई उत्तर नही
00:42अचानक महादेव ने अपना तर्शूल अकाश में उठाया बिजली चमकी और तर्शूल सीदे हनुमान जी की और बढ़ा जैसे ही
00:49परहार होने वाला था हनुमान जी के होंठ हीले जै शिरी राम और उसी शन तर्शूल हवा में जम गया
00:56समय रुग गया महादेव मुस्कुर
01:12બકતી પર બશ્વાસ થો તો અભી લીખો જે બજરંગ બલી
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