00:00ऐसा क्या हुआ कि बगवान शिर्राम खुद अपने अंसू रोक नहीं पाए लंका जुद खतम हो चुका था लेकिन उसरात
00:06कुछ ऐसा हुआ जिसे देखकर सवें बगवान भी बाबुख हो गे
00:09राद का गहरा अंदिका समुंदर के किनारे अकेले बैठे ते शिर्राम चारो और सुनाटा ता जैसे प्रक्दिती भी किसी अनकहे
00:16रहस्रे को सुन रही हो जीत के बाद भी उनके चेरे पे शांती नहीं तीमानो हरिद्दे किसी गहरे विचार में
00:22डूबबा हो अचानक पीशे
00:24से कदमों की दिमी अवाजय हवा तेज चरने लगी दिपक की लोग कांप उठी बहां खड़े थे हनुमान उनकी आंखों
00:31में अदबू तेज तापा चेरा भी नम हनुमान धीरे से बोले प्रभु संसारा आपको बगवान कहता है पर मेरा हरिद्दे
00:37जानता है आपके बिना ह
00:50और चूटी अकाश में बिजली चमकी और उशी संसीदी राम की आंखों से आंसू बहा निकले बगवान अपने बगत की
00:56बगती से भाबुख हो चुके थे उन्होंने हनुमान को गले लगाया और समय जैसे ठहर गया कहा जाता है उस
01:03राद देवताओं ने भी देखा बगती क
01:05शक्ती बगवान को जुका सकती है जहां सच्चा संबर्पन होता है बहां बगवान और भक्त अलग अलग नहीं रहते अगर
01:12आपने भी जे दिब्बे रहस्य मसूस किया हो तो लिखिए जैसीडी राम
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