00:00उस रात गाउं में खुद महा देवाई लेकिन किसी ने पहचाना नहीं उस रात पूरे गाउं में कुत्ते अचाने करोने
00:06लगे मंदिरों की घंटी अपने आप बजने लगी और एक अजनवी बिखारी गाउं में परवेश कर चुका था जिसे देहकर
00:13लोगों को अजीव डर म
00:25आदी रात वो बिखारी मंदिर के पास बैटे एक गरीब भक्त के पास पहुंचा बिखारी ने दीमी आवाज में कहा
00:32क्या तुम मुझे भोजन दोगे भक्त ने देखा उसके पैरों के पास मिट्टी नहीं राख पड़ी थी बख्त के पास
00:39सिर्फ एक रोटी थी लेकिन उस
00:54का रूप बदल गया जटाय तर्शूल और तीसरी आंक स्वें भगवान शिप प्रगट हो चुके थे उन्होंने कहा मैं डर
01:02बनके आया था ताकि सच्ची भक्ती पहच्चान सको उस दिन पूरे गाउं को समझ आया भगवान प्रिक्षा लेने हमेशा सधारन
01:11रूप में आते
01:12है अगर आपको भी महादेब पर विश्वास है तो लिखो हर हर महादेब
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