'राज़ियम' शब्द आज की राजनीतिक भाषा में एक खतरनाक हथियार बन गया है। मूल रूप से लैटिन शब्द 'रेजिमेन' (शासन) से निकला यह शब्द ऐतिहासिक रूप से एक तटस्थ अर्थ रखता था, लेकिन फ्रांसीसी क्रांति के बाद 'एंसियन रेजिम' के संदर्भ में इसने नकारात्मक अर्थ ग्रहण कर लिया। आज यह शब्द प्रचार का एक शक्तिशाली उपकरण बन चुका है।
विडंबना यह है कि हम इस शब्द का प्रयोग केवल दूसरों के लिए करते हैं, अपने लिए कभी नहीं। जब एक अत्याचारी राज्य दूसरे अत्याचारी राज्य पर आक्रमण करता है, तो अचानक वह दूसरा राज्य "राज़ियम" बन जाता है - वास्तविक तथ्यों या अपने स्वयं के देश में नागरिक स्वतंत्रता की डिग्री से स्वतंत्र। यह एक प्रचार स्टीरियोटाइप बन जाता है जो वास्तविकता के टूटे हुए आईने की तरह विकृत प्रतिबिंब पेश करता है।
वास्तविक खतरा सिर्फ बाहरी नहीं है। लोकतांत्रिक देश भी आंतरिक रूप से अधिनायकवादी प्रवृत्तियों के शिकार हो सकते हैं। जब सरकार की विभिन्न शाखाएं एक-दूसरे को कमजोर करने लगें, शहरों का सैन्यीकरण किया जाए, मीडिया और विपक्षी आवाजों को दबाया जाए, या नागरिक नियंत्रण से परे अर्धसैनिक बलों को शक्ति दी जाए - तो ये सभी लोकतंत्र के लिए खतरे के संकेत हैं।
अंततः, लोकतंत्र की रक्षा की जिम्मेदारी नागरिकों पर आती है। हमें दूसरों पर "राज़ियम" का लेबल चिपकाने से पहले अपने स्वयं के समाज में हो रही अधिनायकवादी प्रवृत्तियों पर सचेत रहना चाहिए। सक्रिय भागीदारी, सतर्कता और सही राजनीतिक शब्दावली का इस्तेमाल ही हमारे लोकतंत्र के "टूटे आईने" को ठीक कर सकता है। लोकतंत्र की सुरक्षा का रहस्य दूसरों की आलोचना में नहीं, बल्कि आत्म-निरीक्षण और सतर्क नागरिक भागीदारी में निहित है।
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