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  • 6 months ago
"इस कहानी में एक अनोखी सीख छुपी है जो आपके जीवन को बदल सकती है! यह कहानी न केवल बच्चों के लिए बल्कि बड़ों के लिए भी एक प्रेरणा साबित होगी। अगर आपको नैतिक कहानियाँ (Moral Stories), प्रेरणादायक कहानियाँ (Inspirational Stories) और हिंदी लघु कथाएँ (Short Stories in Hindi) पसंद हैं, तो यह वीडियो आपके लिए है। पूरी कहानी देखें और अपने विचार हमें कमेंट में बताएं!


🔹 वीडियो की खास बातें:
✅ सुंदर एनीमेशन और इमोशनल कहानी
✅ हर उम्र के लिए अनुकूल
✅ सीखने और समझने योग्य नैतिकता

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Transcript
00:00कि मौसम शुरू हुआ नहीं, वहीं हर गरीब परिवार में गर्मी को लेकर परिशानी शुरू हो जाती है।
00:05कुछ ऐसा ही हाल इस परिवार का भी था।
00:07जहाए एक तरफ अमीर लोग इस गर्मी के मौसम में एसी कूलर की ठंडी हवा में बैट कर ठंडी ठंडी आइसक्रीम खा रहे थे।
00:14तो वहीं बिचारा ये गरीब परिवार गर्मी से राहत पाने के लिए अपने 20 साल पुराने कूलर को ही ठीक करने में लगा हुआ था।
00:20अरे ये कूलर किसने बंद किया है कितनी मुश्किल से तो आँख लगी थी मेरी तो 12 से बिचली चले गई क्या सुबसे चार बार जा चुकी है बच्चो बिचली नहीं गई है तुम्हारे बापू ने जो कूलर ठीक किया है न उसका नतीज़ा है ये इन्हें तो बस मौका मि
00:50चले जाते हैं और सिर्फ 10 मिनट के अंदर ही अपने हाथ पैर खुजाते हुए बुर्य बिस्तर लिए घर के अंदर आते हैं तुम लोग तो बड़े चौड से गए थे कि आंगन में सोएंगे ये 10 मिनट में वापस कैसे आ गए अरे गर्मी तो फिर भी बरदाश्ट कर लेत
01:20में चले पर खुजा आते हैं और बहुए घर के कामों में लग जाती है एक तो यह गर्मी ओपर से पानी के मुसीबत ही गर्मी का मौसम शुरू होता नहीं कि जल वे-भागवाले पानी की सप्लाई पहले बंद कर देते हैं अब इतनी गर्मी में पानी ही बंद कर दोगे हम �
01:50उठाओ और चलो पास वाले में, पानी कर आता है, अब उससे यी पानी भर कर लाना होगा।
02:20अगर अब से तुम लोगों की कपड़ी गंदे मिले न तो तुम लोगों का खेलना बन और यह कपड़ी भी मैं तुम लोगों से धुल्वाओंगी समझे अब जाओ अंदर
02:38गर्मी की वज़ा से अक्सर पांचो बहुओं का पारा हमेशा हाई रहता था
02:43जहां एक तरफ बार-बार कुलर खराब होने से गर्मी से बहुओं परेशान थी
02:46तो वहीं दूसरी तरफ पानी को लेकर भी उनका यही हाल था
02:50अरे भाईया बर्फ दे रहे हो या हीरे जो इतना दाम कर दिये चोटे से बर्फ की टुकड़ी के लिए आप तीस रुपए ले रहे हो
02:56पिछले साल तो यही बर्फ का टुकड़ा दस रुपए में बेशते थे आप
03:00ठंडा पानी पीने के लालेच के चलते की टीस रुपए देकर थोड़ी सी बर्फ लेकर घर आ जाती है
03:24और उसे मिट्टी के गड़े में डाल देती है
03:26अरे बहु तुझे मैंने पैसे दिये तो सही थे बर्फ लाने के लिए तो तु लाई नहीं
03:31यह क्या घरे का पानी तो वैसे का वैसा ही है
03:34वो क्या है न माजी यह मिट्टी का घराए कोई फ्रिज नहीं जिसमें पानी रखने के बाद वो ठंडा ही रहेगा
03:40तीस रुपे की रत्ती भर बरफ दी थी उस बरफ वाले ने घरे में बरफ डाले हुए दो घंटे से उपर हो गया
03:45तो पानी गरम नहीं होगा क्या पहले की तरह होगा
03:49अगर घर में आज एक फ्रिज होता तो इस तरह ठंडे पानी के लिए भी तरसना ना पड़ता
03:53अरे परिशान मत हो यह हम लोग आपको थोड़ी ना ताना देंगे
04:03ताना तो उन्हीं दिया जाता है जिससे सुनकर लोग काम कर सके
04:06और आप लोग तो ठहरे बैल आप लोगों से बोलना और दिवार में सर मारना दोनों एक बराबर है
04:12इसी तरह पाँचो बहू अपने पतियों को हर रोज कभी फ्रेज कभी कूलर तो कभी किसी चीज का ताना मारते हुए
04:18गर्मी में अपने दिन गुजानने लगती है
04:20हर दिन की तरह पाँचो आंगन में बरतन जाडू वगेरा का काम कर रही होती है
04:25कि तभी उनकी पड़ोसन कलपना अपने घर से बाहर निकलती है
04:28जिसे देख
04:29अरी कलपना क्या बात है आजकल तो तुम इद का चान बनी फिर रही हो
04:33दो हफते पहले देखा तो तुमको पूरा दिन क्या करती रहती हो घर में
04:36जरा हमारे घर भी आ जाया करो
04:39और क्या बताओ मैं तुम लोगों को
04:41जब से मेरे घर में एसी लगा है तब से किसी और के घर जाने का मनी नहीं करता
04:45मैं तो पूरा दिन अपने कमरे में बैठी रहती है
04:47एसी की ठंडी ठंडी हावा के सामने
04:49तुम्हारे घर में एसी लग गया
04:51तुम्हारे घर में तो पहले से ही दो कूलर थे न, तो AC की क्या जरूरता पड़ी?
04:56अरे ऐसे कैसे जरूरत नहीं थी गर्मी देख रही हो बार कितनी गर्मी हो रही है
05:00दो कूलर से कहा ही हम सब का काम चलता इसलिए हमने घर में एसी लगवा लिया
05:04देखो अब जरा एसी से बाहर क्याने के लिए मुझे तो बेचैनी सी होने लग गई
05:08तुम लोग उसे में बाद में मिलती हूँ ठीक है
05:11इतना कहकर कलपना वहां से चली जाती है
05:14अपने पड़ोसन की घर में एसी लगने की बात को सुनकर
05:17पांचो बहुए अपने पतियों के आने का इंतजार करती है
05:19जैसे वो शाम में आते हैं
05:22ये क्या तुम लोगों ने अभी तक चूला नहीं चलाया
05:24अरे शाम हो गई ये खाना बनाने का इरादा है या नहीं है
05:27अब घर में चूला भी जलेगा जब हमारे घर में एसी आएगा
05:31कलपना है ना उसके घर में भी अब एसी आगया
05:34हमारे घर में कब आएगा
05:36पता है वो अपने AC की बारे में कितना बढ़ा चड़ा के तारीफ कर रही थी
05:40ऐसा लग रहा था कि वो अपने AC की तारीफ कम हमारी गरीबी का भी मजाख उड़ा रही है
05:45अरे कूलर तो फिर भी ठीक था लेकिन अब तुम पांच लोगों की AC की डिमांड कहां से शुरू हो गई
05:51अरे महीने में हम पांचों का मिलकर मुश्किल से घर में 7000 रुपए आते हैं
05:55अब इतने रुपए में तुम लोगों को AC कहां से ला कर दें
05:58अरे तो आजकर लोग किष्ट पर भी तो AC खरीदते हैं
06:01वो मनोरमा बुआ को भूल गया आप उनके घर में 2-2 AC हैं
06:04वो दोनों किष्ट पर ही तो लेकर आई थी
06:06तो हम क्या एक किष्ट पर नहीं ला सकते AC
06:09हमें नहीं पता अब हुमारे घर में भी AC लगेगा
06:12पाचो बहुएं घर में AC लाने की जिद करने लगती हैं
06:15जिसे परिशान होकर उनके पती अगले दिन उन्हें AC की दुखान पर ले जाते हैं
06:19जहां वो पाचो घर के लिए एक AC पसंद कर लेती हैं
06:22आपके AC के 12 महिने की किष्ट बनी है
06:25और हर एक किष्ट पूरे 4000 रुपई की है
06:28हर महिने की 10 तारिक को आप लोग 4000 रुपई भिजवा दी जिएगा
06:32क्या 4000 रुपई भाई साथ थोड़ा सही सही लगा लीजे
06:37आप AC लेने के लिए आई हैं या प्यास चमाटर लेने
06:40जो सही सही लगा लीजे
06:41मैंने तो आपको रिस्काउंट करके ही बताया भई
06:43एक महिने की इतनी जादा किष्ट सुनकर
06:46पांचो बहुएं अब अपने पतियों के साथ
06:48बिना AC लिए वापस घर आ जाती है
06:50क्या हुआ? AC क्यों नहीं लिया तुम लोगों ने?
06:53अब पता चला कि हम क्यों मना कर रहे थे?
06:56ना जाने इस बहेंकर गर्मी से चुटकारा कब मिलेगा
06:58मैं तो परिशान हो वही हूँ इस गर्मी से
07:00एक तो गर्मी और उपर से आए दिन पानी की कमी के चलते
07:03पांचो बहु का मूड काफी जादा खराब रहता था
07:06गर्मी और पानी की कमी से पांचो परिशान हो ही रही होती है
07:09कि तब फिर से उनके बच्चे मिट्टी से अपने कपड़े काफी गंदे करके घर आते हैं
07:14ये तीनो की तीनो भी अपने बाप पर गए हैं
07:17कितनी बार समझा लिया कपड़े गंदे मत करना लेकिन रोज कपड़े गंदे करके आते हैं
07:21अरे आस परोस के बच्चे भी तो खेलते हैं
07:25उनके कपड़े तो इतने गंदे नहीं होते जितने इनके कपड़े गंदे होते हैं
07:28जरूर कोई बात है, आज हम इनका पीछा करेंगे और देखेंगे, ये कहां जाकर खेलते हैं
07:33थोड़ी देर बाद बच्चे फिर से खेलने के लिए जाते हैं, तो पांच ओ बहुएं उनका पीछा करती हैं
07:38और देखती हैं कि सभी बच्चे पेड़ों की छाओं के नीचे मिट्टी के अंदर गड़ा करके आराम से बैठ कर खेल लए हैं
07:45ये देखकर बहुएं उनके पास जाती हैं
07:47अच्छा, तो अब हमें पता चला कि तुम लोगों के कपड़े तने गंदे क्यूं होते हैं
07:51आज से तुम तीनों का खेलना बन
07:53ऐसा मत करो मा, अगर खेलना बन कर दोगी तुम लोग क्या करेंगे, हमें कपड़े गंदे नहीं करते
07:58बलकि यहां इस तरह जमीन में गड़ा करके बैटने पर काफी थंड़क मिलती है
08:02इसलिए रुजाना हम यहां आगर बैट जाते हैं
08:05हाँ, प्रेना बिल्कुल ठीक है रही है, आप लोग भी एक बार बैट के देखिया, काफी थंड़ा थंड़ा लगता है
08:09अपने बच्चों के कहने पर पाजो बहुएं जब उन मिट़्ी के गड़ों में बैटती हैं, तो उन्हें भी काफी थंड़क में हसूस होने लगती है
08:17अरे, हमने तो बच्चों पर खामफा उसा कर दिया, उन्होंने तो बढ़िया जुगार निकाला है, थोड़ी देर के लिए ही सही, लेकिन थंड़क तो मिलती है
08:24अब तो मुझे यकीन हो गया, कि हमारे बच्चे हम पर ही गए हैं, ना कि अपने बाप पर
08:29पाँचों बढ़िये काफी ज़्यादा खोश होती है, और अब अकसर घर के काम निफटा कर बढ़िये इसी तरह जमीन में गड़्धा करके मिट्टी की ठंड़क में बैट जाया करती थी, और ऐसे ही कुछ दिन गुजर जाते है, यहां इस तरह बैटकर गर्मी से राहत तो
08:59अभी तो ऐसा करी सकते हैं ना, हम भी जमीन के अंदर एक काफी बड़ा गड़ा खो देंगे और उसके अंदर आराम से रहेंगे, पुर शरी को गर्मी सिराहत मिल जाएगे, और रात में तो और साधा ठंड़क महसूस होगी हम लोगों को, थोड़ा अजीब है, लेकिन जब
09:29अरे तो जमीन के नीचे रहने का भी आइडिया भी तो तुम्हारा ही था ना, तो अब करो महनत, जब तक महनत नहीं करेंगे, फल कैसे मिलेगा?
09:36पांचो बहुएं पांच से छे दिन लगातार महनत के बाद जमीन के अंदर एक काफी बड़ी जगह बना लेती हैं, और साध में उपर से नीचे और नीचे से उपर जाने के लिए थोड़ी सी सीड़िया भी बनाती है, आखिरकार हमने गर्मी से बचने का जुगार कर लिया
10:06पड़ेगा, काफी अच्छी जगह बनाई है तुमने, अभी तो दिन है यहां, तो रोश्णी है लेकिन शाम होते होते काफी अंधिरा हो जाता है, इसलिए हमने सोचा है कि थोड़ा बहुत घर से सामान और लाल्टीन वगेरा भी ले आते हैं, आदे से जाद समय पूरा पर
10:36आपस जाना पड़ेगा, इतनी गर्मी में तो यहां से निकलने का मनी नहीं करता, यह बात तो है, वो तो अच्छा हुआ कि हमने पानी का घड़ा लाकर यहीं रख दिया, वरना उसके लिए भी ना जाने हमें कितने चक्कल लगाने पड़ते, घर से वहां तक के?
10:48अरे तो फिर तुम पांचो एक काम क्यों नहीं करती, जिस तरह जमीन के अंदर रहने के लिए तुमने ये जगा बनाई ठीक उसी तरह, यहीं चूलहा भी बना लो और रसोई का सामान लाकर, यहीं रख लो वैसे भी, पूरा दिन तो हम यहीं रहते हैं, तो आराम से बैठक
11:18उस मिट्टी के चूले से लगकर एक गड़ा भी कर लेती हैं, जिससे सारा दुआ जब गड़े से ओकर बाहर जाता है, जिससे जमीन के नीचे रह रहा है यह पूरा परिवार बिना खासे आराम से रहता है
11:28अरे, आगे आप लोग, आज हमने आपका पसंद का पुलाव बनाया है, जल्दी से आ जाईए और खाना खा लीजे
11:35अरे अभी कहाँ, अभी तो हम घर जा रहे हैं नहाने के लिए, पसीने में सारा शरी चिपचपासा हो गया है
11:41काश, यहीं एक गुसल खाना भी होता, तो नहाने के लिए घर नहीं जाना पड़ता
11:46अब जब तक नहा कर वापस आएंगे, तो फिर से पसीने से भीग जाएंगे
11:49बात में दम तो है तुम्हारी, लेकिन गुसल खाना बनाने के लिए अगले दिन थोड़ी दूर पर जमीन में गड़्धा करना शुरू करती है
12:08कि तब ही उस जगा हलका हलका पानी जमा होने लगता है
12:11अरे ये क्या, जैसे जैसे हम गड़्धा कर रहे हैं, यहां तो काफी सारा पानी जमा हो रहा है
12:16थोड़ी देर और लगा कर गड़्धा करने अपर पांचों देखती हैं
12:20कि जिस जगा उन्होंने गड़्धा किया है, उस जगा जमीन के अंदर से बाहर पानी निकल रहा है
12:25ये देख पांचों की खुशी का ठिकाना ही नहीं रहता
12:28ये तो किसी चमतकार से कम नहीं, हम तो गुसल खाना बनाने के लिए गड़्धा खोद रहे थे
12:33और यहां तो उपर वाले ने नदी ही हांथों में थमा दी, अगर हम और गड़्धा खोदेंगे तो हमें और पानी मिल सकता है
12:39फिर हमें गर्मी से पानी को लेकर परिशान होने की कोई जरुत नहीं पड़ेगी
12:43मुझे तो अभी भी अपनी आँखों पर यकीन नहीं हो रहा
12:46पहले हम जस तरह गर्मी और पानी को लेकर परिशान होते थे अब धीरे धीरे वो सभी परिशानिया हमारी खत्म हो रही है
12:52इस पानी का हम लोग खुद इस्तमाल करने के साथ उन लोगों को भी बताएंगे जिन लोगों को अक्सर पानी के जरुत परती है
12:59हमारी तरह ही हमारे महले में काफी सारे ऐसे लोग है जिनके घर में भी पानी को लेकर काफी किल्लत रहती है
13:05इससे गर्मी में उनकी भी मदद हो जाएगी
13:08जहां अब पांचों बहुएं गर्मी में आराम से ठंड़क में अपने पूरे परिवार के साथ जमीन के नीचे रह रह रही थी
13:14तो वहीं अब उनकी गर्मी और पानी को लेकर परिशानी भी खतम हो चुकी थी
13:18तुम लोगों ने तो जमीन के नीचे पूरा घर ही बसा लिया लेकिन अभी भी यहां किसी चीज की कमी सी लगती है
13:24मा जी अब किस चीज की कमी लगती है बैटने के लिए जगा है खाना बनाने के लिए चूला है और नहाने के लिए गुसल खाना
13:31तो और अब तो हमने अपने बच्चों के लिए जमीन में गड़ा करके काफी जगा बना लिये, जिससे कब वो आराम से धूप गर्मी से बच कर खेलते हैं।
13:41वो तो ठीक है बहू लेकिन अब सोने वगेर का क्या करें, अगर सब पैर पसारते हैं तो ठीक से बैटने तक की भी जगा नहीं मिलती।
13:49ये तो है, काश ये जगा थोड़ी और बड़ी होती, तो हम आराम से यहाँ सो भी जाते।
13:55उसके लिए तो हमें यहाँ दो-तीन कमरे और बनाने पड़ेंगे, जिसमें काफी महनत लगेगी।
14:25गमरे, हॉल, किचिन, बात्रूम, यहाँ तक के बच्चों के खेलने के लिए भी अब जमीन के नीचे ही जगा बन चुकी थी, जिसके चलते अब कई दिनों तक पूरा परिवार आराम से जमीन के नीचे ही रहता है, और सिर्फ काम पढ़ने पर ही बाहर निकलता, तो वहीं �
14:55कि हम बिना पानी के पूछो मत, हफते में मुश्किल से दो बार पानी आता था, वो भी मिटी से भरा, और तो और अगर महले में कभी टैंकर भी आ जाता, तो वहाँ इतनी भीर होती कि पूछो ही मत, कई बार तो मेरी चपपली तूट गई उस भीर में, अरी हाँ महिमा, हम �
15:25लेकिन ये तो काफी जादा मुश्किल लगता है, पता नहीं मुझसे ये, हो भी पाएगा या नहीं?
15:55चोटी चोटी कमरे बना कर दहने लगते हैं, तो वहीं दूसरी तरफ.
16:25पहले घर के सारे पंके और दो-दो कूलर चलते थे, लेकिन कितना कम बिलाता था, लेकिन अब देखो, अब सुबा शाम एक एक घंटा ये ऐसी चलेगा, बस, वरना अगली बार इतना बिलाया ना, तो तुमसे ही भरवाऊंगा, भले उसके लिए तुम्हें अपनी सारी बे
16:55पर नहीं तो क्या अच्छा हुआ, हमने ऐसी कूलर नहीं लिया, वरना हमें भी ना जाने कितना बिल भरना पड़ता, पैसो की बचट के साथ साथ, प्री में हमने गर्मी से राहत पाली
17:04अब इसी तरह पाचो बहुएं अपने पूरे परिवार के साथ कड़ी गर्मियों में जमीन के नीचे रहती हैं, वो भी बिना एक भी पैसा खर्च किये, और जब गर्मिया खतम हो जाती हैं तो वापस अपने नॉर्मल घर में आ जाती है
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