00:00हारर कान्याठी
00:30अभी तक इन आवाजों को सुन नहीं पाया था
00:33क्यूंकि उसके बेटे किशन ने उसे नया नया मुबाइल फोन जुला कर दिया था शहर से
00:38और बस उसी मुबाइल फोन में इयर फोन लगा कर
00:42वो कोई पुराना गाना सुनने में मग न था
00:46लेकिन जैसे ही गाना खत्म हुआ, उस औरत की चीखनी की आवाज हर्या किसान के कानों से टक्राए
00:52हर्या का दोस्त रामू भी खेत में ही घाट पर गहरी नीन में खराटे मा रहा था
00:57रात के उस सन्नाटे में औरत की चीखनी की आवाज सुनकर
01:01ठंड के मौसम में भी हर्या किसान के माथे से पसीना टपकने लगा
01:06रामू, अरे ओ रामू, अरे जल्दी उठ, क्या खराटे मार कर सो रहा है
01:12अरे इतनी रात को ये जंगल में कौन औरत चीख रही है, बूरी तरह से चीख रही है
01:17अरे क्या हुआ, क्या हुआ कौन है, अरे भूत आ गया क्या, चोर आ गया क्या
01:24अरे न चोर आया है न भूत आया है, मैं ये कह रहा हूँ कि क्या तुने इस औरत के चिर्कने की आवाज सुनाई देती है कि नहीं
01:33अरे कौन सी औरत
01:35अरे हाँ
01:38ये आवाजे
01:39तू पहले नहीं पता सकता था
01:41पता नहीं कौन चुड़ेल जंगल में नाच रही है
01:44हम घर चले जाते हैं
01:46देखता नहीं
01:48मैंने तो कानों में ये ये लगा रखा था
01:50वो किशन ने लाके दियाना शहर से
01:53गाने सुन रहा था मैं
01:55अरे लेकिन भाई मुझे बहुत डर लग रहा है
01:58क्या करे
01:59अरे करना क्या है भागो यहां से
02:02भगवान जाने कौन है
02:04और क्यों इतना चीक रही है
02:06और उस औरत की चिकनी की आवाजे
02:08और ज्यादा तेज होने लगी है
02:11हर्या और रामू के पैर
02:13डर के मारे कांप रहे थे
02:14डर की वज़े से ना वो वहाँ पर रुक पा रहे थे
02:17और ना ही अपनी जग़ से आगे बढ़ पा रहे थे
02:20तब ही अचानक से सन नाटा चा गया
02:23सही मौका है
02:24हमें यहां से निकल लेना चाहिए भईया
02:27रामू और हर्या अपना गमचा उठा कर
02:29डबे पैरो जंगल के रास्ते से गाउं की तरफ चलने लगे
02:33गाउं की और जाने वाला ये एक ही रास्ता था
02:36और आवाज भी उसी तरफ से आ रही थी
02:39लेकिन अभी दो मिनिट पहले वो आवाज पूरी तरह बंध हो चुकी थी
02:43और जंगल में पहले जैसा सन्नाट अपसर चुका था
02:47तब ही अचानक से पेडों में किसी के चलने की सरसराहच रामू और हर्या को सुनाई दी
02:52क्या? क्या तुमने कोई आवा सुनी?
02:55आयात ऐसा लग रहा है? कोई इस तरफ ही आ रहा है?
03:01और तब ही अचानक सामने पेड से एक साया रामू और हर्या के सामने उल्टा आकर लटक गया
03:07यह देखकर रामू और हर्या की चीख निकल दे
03:09वो दोनों डर के मारे बेहोश हो गया
03:12वो साया जमीन पर आकर खड़ा हुआ
03:15उसने रामू और हर्या के बालों को पकड़ कर खींचना शुरू कर दिया
03:19अब तुम गाव वालों के से कोई जिन्दा नहीं बचीगा
03:23मैं तुम सब को ले जाकर उस गट्टे के नीचे तफ़न कर दूँगी
03:27अगले सुबा रामू की पत्नी कमला हर्या के घर आई और उसने हर्या की पत्नी सुमन से अपने पति के बारे में पूछा
03:41सुमन कल रात को ये तुमारे ही पत्ती के साथ गये थे खेट पर अभी तक लाटकर नहीं आए है
03:47हाँ बहन मैं भी वही सोचकर परिशान हूँ मेरे पती भी अभी तक खेट से लाटकर नहीं आए
03:53भगवान जाने क्या बात है दो पैर हुने आई है अब तक तो उन दोनों को लाटकर आ जाना चाहिए था
03:59क्या करे कैसी पता करे कि वो दोनों कहा है
04:03मेरा बेटा भी शहर गया हुआ है वना उसी को भेज देते खेट पर
04:07मेहन मुझे लगता है कि हम दोनों को वहाँ जाकर अपने पतियों को ढूंडना चाहिए
04:12ठीक कहती हो तुम चलो मैं तुमारे साथ चलती हूँ
04:15और वो दोनों जंगल के रास्ते खेट की तरफ आगे बढ़ती हैं
04:19वहाँ जाकर देखती है कि हरिया और रामो आग जलाकर आग की उपर कुछ पकाकर खा रहे थे
04:25आप यहाँ पार्टी बना रहे हैं और वहाँ घर पर हमारी जान सुखी जा रही थी कि कहीं कुछ हो तो नहीं गया
04:31मुझे कुछ नहीं हो सब्ता मैं कभी कभी नहीं मर सकता समझे तू
04:41अरे तब यह तो ठीक है? ये किस तर के आवाज में बात करें आप? कुछ हुआ है क्या?
04:48कुछ नहीं हुआ, कुछ नहीं हुआ, बस जोरो की भूक लग रही थी, इसलिए खाना बना कर खा रहे थे
04:55अच्छा, इतनी बदबू आ रही है, ऐसा क्या बना कर खा रहे हैं आप? जरा हमें भी तो बताएए
05:01अरे भाभी, क्यों परिशान हो रही हैं? मास पका कर खा रहे हैं
05:07एक जंगली जानवर कल रात को खेत में आ गया था, हम दोनों ने उसे मार दिया
05:12और बस उसी का मास पक रहा है, आप भी खाये न, बहुत बहुत ही स्वादिस्ट है
05:19दिमाग खराब हो गया क्या आप दोनों का, आप दोनों मास कब से खाने लगे? और वो भी जंगली जानवर का, चलिए, अभी कभी घर चलिए
05:29चलेंगे, चलेंगे, लेकिन पहले ये मास तो खतम कर ले
05:32कुछ देर बाद रामू और हरिया, कमला और सुमन के पीछे-पीछे गाउं के तरफ चल देते हैं
05:38रामू और हरिया की आँखे पहले जैसी नहीं रही थी, उनमें कुछ बदल गया था
05:43रामू अपनी पतनी कमला के साथ घर चला जाता है और हरिया अपने घर आ जाता है
05:48देखे, आपने जो कुछ भी किया, मैं उसके लिए आपको माफ कर देती हूँ
05:52लेकिन आज के बाद, ये रामू के साथ जाकर मांस पका कर खाया ना, तो इस घर में घुसने नहीं दूँगी आपको
05:58अरे दिमाग मत खराब करो, मैं वहाँ खार्ट पर लेट कर गाने सुन रहा हूँ, मुझे परिशन मत करना आप
06:05इतिन हाँ तमाशा खड़ा कर दिया, तो पैर तक घर लाटकर नहीं आये, और अब गाने सुने
06:10लेकिन हर्या घर के बाहर आंगन में जाकर, चुप चाप लेट गया, और गाने सुनने लगा
06:17गाने सुनते सुनते हर्या को नेंद आ गई, सुमन ने उसके कान से ये अपलग हटाया और अपने आप से कहा
06:23सरह मैं भी तो सुन कर देखू, ऐसे कौन से गाने सुनते हैं, उदर मोबाल में एक अजीब सा गाना बचने लगा
06:31मैं मात हूँ, मात हूँ, मात हूँ, मात चाप सरी जालू, चुमाएगी गई से, नगल जाएगी सुनते हूँ
06:54मैं मात हूँ, मात हूँ, मात हूँ, मात हूँ, अल्माच रखे नहीं किसी कर
07:08सुमन ने घबरा कर मुबाल फोन दूर रख दिया, वो बुरी तरह से डर गई थी, तब ये अचानक हरिया अपनी नीन से जागा, और गर्दन टेड़ी करते हुए सुमन के पास आया
07:28क्या क्या कर रही थी, गाने सुन रही थी, वो ये कैसा गाने सुन रहे थी, तुम मुबाल के अंदर, मौत है, मौत
07:39अरे ये सारी बाते छोड़ो और ये बताओ, आज शाम को तुम मेरे साथ खेच चलोगी, लेकिन क्यों, और तुम इस तरह से क्यों बात कर रहे हो, अपनी गर्दन सीधे रखकर बात करो ना
07:52वो, वो मेरी गर्दन में सोते सोते थोड़ा दर्द हो गया है, मेरे साथ आज खेच चलो न, तुम्हारे साथ पूरी रात रहना चाहता हूँ
08:02क्या जिवात कर रहे हैं दिन दहाडे, जरा भी शर्म नहीं आती क्या
08:08अरे, इसमें शर्माने वाली क्या बात है, तुम पत्मी हो मेरी, पूरी रात खेच पर रहता हूँ
08:16मुझे भी तो तुम्हारे पास आने का हक है की नहीं
08:21अच्छे, ठीक है ठीक है, चलती हूँ आपके साथ खेच पर, लेकिन फिर उस रामो को मत बुलाना
08:28अरे, कैसी बाते कर रही हो, अगर तुम मेरे पास होगी, तो मैं किसी को नहीं बुलाओंगा, सिर्फ तुम और मैं, और रात का सन्नाटा
08:39शाम के वक्त हर्या सुमन को अपने साथ खेच पर ले जाता है, आस्मान में चांद पूरी तरह से चमक रहा था
08:47हर्या ने अपने खेच में बनी हुई छूटी सी जूपड़ी के अंदर, सुमन को अपने पास बिठा लिया और उसके बालों में हाथ फिराते हुए कहा
08:54कितनी खूबसूरत हो तुम, बहुत सुन्दर लग रही हो, एक एक चांद से भी ज़्यादा सुन्दर लग रही हो
09:17सुमन ने शर्माती हुए जैसे ही अपनी आखे खूली, उसके होश उड़ी, हर्या के बड़े बड़े दांत निकला आये थी और वो पूरी तरह से एक जानवर की तरह नज़र आ रहा था
09:27लेकिन हर्या ने सुमन के हाथ को कसकर पकड़ लिया, उसके नुकिले नाखुनों की वज़े से सुमन के हाथ से खून बेहने लगा था
09:41वही जो एक आदमी एक औरत के साथ करना चाहता है और उसके बाद मैं तुम्हें ले जाओंगा जहां पर तुम्हारा पती है
10:01पती है
10:13क्या मतलब क्या के नाचए ओ जांगा में तुम्हारा पती करो मैं तुम्हें उससे मिलवा देता हूं लेकिन उससे पहले तुम्हें मेरी प्यास बुजानी होगी
10:27और इतना क्या कर हरिया सुमन के उपर जानवरों की तरह तूट पड़ता है
10:33और खिर कौन था वो जानवर
10:35और क्या सुमन उसके शिकंजे से बचकर निकल पाई
10:39जानने के लिए देखे इस कहानी का अगला भाग
10:57झाल झाल झाल