00:00हारल कहन्याची
00:02कंचन रुदाली पाच्चू
00:07आ गई मेरी बीची अब मेरे पास
00:10ये कहती हुई अब टक रोती, छाती पीटती कंचन जूर जूर से हसने लग जाती है
00:19मुखागनी मैं दूंगी, मैं एक रुदाली आ जासेगी
00:25और तुम सब रोगे
00:28कंचन वही पड़ी नीशा की लाश की उपर से इट को हटाती है
00:34और नीशा की अर्थी को जलाती है
00:36बिना किसी सही रसम की नीशा का शरिर राख में मिल जाता है
00:41प्रेमनाथ और ठकुराइन बेसूध होकर सब कुछ देख कर भी
00:46पर अपने दिल और दिमाग पर लगे सदमी के कारण कुछ भी समझ नहीं पा रहे थे
00:50जलती चिता को छोड़ कंचन उठकर हवेली से बाहर चल दीती है
00:55बाहर की और निकलती रुदाली फिर एक बार पलटती है
00:59और ठकुराइन को देखती हुई कहती है
01:02चलती हो ठकुराइन जल्दी ही लाटंगी
01:06उसकी बाहर कदम रखती ही पूरे गाउं में मानो सैलाब उमड़ पड़ता है
01:11बारीश तुफान रुकने का नाम ही नहीं लेते
01:14चारों करफ त्राही माम त्राही माम के स्थिती बन जाती है
01:18इतनी गर्मी के मासम में ऐसी बारिश
01:22इसकी हर बुंद ऐसी है मानो किसी अपने के गम में फूट फूट कर रो रही हो
01:27हाँ तुम सही कहती हो रंभा
01:30और ये सब हुआ भी छोटी ठकुरायन की मौत के बाद
01:34क्या कारण हो सकता है इन सब का
01:36अरे अरे हम सब कब तक घरों में चिप कर बैठे रहेंगे
01:41अरे खेत की फसले बरबाद हो रही है सो अलग
01:45ठाकुर सहाब को ही जवाब देना होगा
01:47कि ये सब क्या है
01:49परिशान होकर सभी गाउंवाले तूफानी बारिश में
01:53ठाकुर सहाब के घर पाँचते हैं
01:55जहां वो लोग देखते हैं के ठाकुर सहाब की हालत बहुत नासुक है
01:59कंचन ये सब कुछ उसी का किया धरायना
02:03जाने क्या करके गई है
02:05जैसे ही उसने हवेली से जाते वक्त कहा
02:08जल्द ही लोटती हूँ
02:11तब से इनकी तब्यत बिगड़ती बिगड़ते ऐसी हो गई है
02:14शहर से कोई डॉक्टर भी आने को राजी नहीं हो रहे
02:17अब कंचन की घर जाना ही एक उपाई दिखता है
02:21तब ही ठाकर साहब सूर सूर से चीखने लग जाते है
02:25नहीं मुझे प्रेथ लोग नहीं जाना
02:27अरे ठाकुराइन देखना ये तेरी बेटी को क्या हो गया है
02:32मुझे साथ ले जाएगी ऐसा कह रही है
02:35यह क्या कह रहे हैं
02:38यहाँ पर कोई नहीं है
02:40अजी निशा क्यों ले जाएगी आपको ऐसा कुछ नहीं होगा जी
02:45अरे गट्टू तू भी आ गया देख रही हो ना ठकुराइन
02:50तुम्हारी बगिया संभालने वाला गट्टू आज तेरी बगिया उजाडने आया है
02:56ये ये तो बहुत बुरा संकेत है ठकुराइन
03:00ठकुर सहाब को सब मरे हुए लोग दीख रहे हैं
03:04अरे जीस दिन हमारी निशा मरी थी उसी रात गट्टू भी मरा था
03:09मरे हुए पति को छोड़ फिर भी कंचन ठकुर सहाब की बेटी को रोने आ गई
03:15अजेब सा नहीं लगा सुनकर
03:17क्या वो रुदाले गट्टू की पत्नी है
03:21ये सब क्यों हो रहा है
03:23इसका जवाब पस वही दे पाएगी
03:25आठकुराइन
03:27और हमें एक बच्चा होगा
03:31ये सपना भी गट्टू की पत्नी को ही आया था
03:34जबकि हमारे वंश को तो श्राब था श्राब
03:38तेज बारिश में सबी भीगते भीगते
03:41रुदाले की गट्या के बाहर पांच दे
03:43तेज बारिश में बाहर और दे काले कपड़े में अपने बालों को खुले
03:47अपने घुटनों पर बैटी जोर जोर से अपना सर गुमा रही थी
03:51आएगा आएगा गयारे
04:04ऐसे कुछ अजीबो गरिब गाना गाती हुई
04:06जोर जोर से सर घुमाती बारते
04:09बहुत डरामी लग रही थी
04:11हमें अंदर चलना चाहिए
04:13सबी दर्वाजा खट-कटाते हैं
04:16पर कोई दर्वाजा नहीं खोलता
04:17तोड़ दर्वाजा
04:19तोड़ तो दर्वाजा
04:21दर्वाजा तोड़ तो
04:23दर्वाजा तोड़ कर सभी अंदर आते हैं
04:26सामने का द्रिश्य ऐसा भयावना
04:28कि कोई अपनी आखों पर विश्वास नहीं कर पा रहा था
04:32ये ये क्या
04:34ये भगवान
04:36ये कंचन कौन है
04:38इसके घर से तो प्रेत लोग का रास्ता जाता है
04:41कंचन उठकर आगे बढ़ती है
04:44और जाते हुए अंगारों को पार करती
04:47एक अजीब से चेहरे के राक्षस के पास पहुंचती है
04:50जिसके हाथ में चाबुक था
04:52जिससे वो रूहों को सजा दीता था
04:54पुरा गाव आगया है मालिक
04:58अब साब की बली ले लो
05:00और नीशा और मेरे पते को वापस उनके शरीर में भेज़ दो
05:04दोनों के शरीर को संजो कर रखा है मैंने
05:07ये नीशा बिटिया का शरीर
05:10तो सबने जलती हुए देखा है
05:12तो रूदाली के पास शरीर कैसे है
05:15ये क्या राज है
05:17रूदाली गट्टो और नीशा के शरे को सबकी सामी रखती है
05:21और क्यादी है
05:23नीशा मेरी बेटी थी
05:25मेरी एकलावती बच्ची
05:27जिसे
05:28जिसे मेरे पती ने ठाकुर सहाब को प्रसाउप दिया था
05:32क्योंकि
05:33क्योंकि आपको भी माह नहीं बन सकती थी
05:36बोली ठाकुराइन, सच है न ये
05:39आप लोगों के पैसे के आगे मेरी ममता का गला घोड दिया गया
05:44जस दिन गट्टू ने मुझे बताया कि मेरी बिटी आपके घर जाने वाली है
05:49मैंने उसी दिन से प्रेत लोग को अपना घर बना लिया था
05:53पर मैं तो मा बनी थी, मेरे शरिर में सभी लक्षर थी, ये कैसे हो सकता है
06:00आपको एक दवाई दी जाती थी, जिसके कारण आपका शरिर एक गर्बवती औरत की तरह बतलने लगा
06:07और फिर मैंने आपके गर्ब में डाल दिया प्रेत का आश, वो आश जो मेरी बेटी को मुझे वापस पाने में मदद करता
06:15पर, पर तुम्हारे वंश हीन होने के श्राप ने उस गर्ब का नाश कर दिया
06:21निशा तुम्हें सांप दी गई, उसने मेरी कोक में ही सब तंत्रा मंत्रा सीख लिये थे
06:27इसलिए उसे वही चीज़े अपनी और खींचने लगी
06:31अम आवस के दिन उसकी वही शक्तियां उस पर हावी हो गई और वो चली गई सब कुछ छोड़ कर
06:37पर मैं, मैं उसे कैसे जाने दिती, उसकी आत्मा को प्रेट लोग से उसके पिता ने बचा लिया
06:44और उसकी आत्मा उसके शरीर में आ गई, पर प्रेट सरकार बहुत करोधित हुई
06:51इसलिए आप सबकी आँखों में धूल जोकर, मैंने एक पुतले को जलाया ना की मेरे बेटी को
06:57आप उसी सरकार की मदद से, मैं फिर से अपनी बेटी और पती को पालूँगी
07:03और उसके बदले ये पूरा गाउने सौप दूँगी
07:06भागो भागो यहां से भागो भागो भागो यहां से
07:13हमें भी शरीर दिलवा देना कंचन इन सबका शरीर तो है ही
07:23आज कितनी ही साल बीद गए
07:29गाउं अब आत्मा और प्रेतों की नाम से जाना जाता है
07:34इतने मुर्दों में रह गई है जिन्दा तो बस कंचन