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  • 6 months ago
अज्ञात लेखक - Witch Writer _ Horror Stories in Hindi _ Hindi Kahaniya _ Moral Stories in Hindi

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😹
Fun
Transcript
00:00अज्यात लेखाग
00:30एक दिन वो अपनी फ्रेंड से कहती है
00:32कितने दिन हो गए
00:34आज तक मैं उस राइटर की बारे में कुछ पता नहीं लगा सकी
00:38आज तक तो वहीं अटकी पड़ी है
00:41किताबों की दुनिया को वहीं तक छोड़ दे बैन
00:43कुछ नहीं रखा उसमें
00:45फिर तो तुझे कुछ पता ही नहीं
00:48उनकी हर यर एक बुक आती ही है
00:51जिसके सिर्फ बीस कॉपिस ही बनती है
00:53और मैं सारी कॉपिस खरीद लेती हूँ
00:56चल तुझे दिखाती हूँ
00:57नेकिता प्रिया को स्टोर रूम में लेकर जाती है
01:00रूम बिल्कुल ठंडा
01:02प्रिया को ऐसा मैसूस होता है
01:04जैसे वो यहाँ पहले आ चुकी है
01:07कुछ अजीब सा मैसूस हो रहा है
01:10मानो मुझे कोई अपनी और खीच रहा हो
01:13कमरे में चारो तरफ गूफ अंदेरा
01:16अपने फोन की फ्लैश लाइट आउन कर निकिता
01:19फोन को चारो तरफ घुमाती है
01:21हर तरफ बस उस अग्यात राइटर की ही किताबी थी
01:25सारी बुक्स को यहाँ छिपा कर रखती हूँ मै
01:28मेरे अलावा यहाँ कोई भी आता नहीं
01:31इसलिए इस बात के घर पर किसी को भनक तक नहीं है
01:34ऐसे क्या होता है उनकी किताबों में
01:37कि तु इतनी दिवानी हो गई है उस राइटर की
01:40निकिता वहीं अपने पास के सेफ से एक बुक उठाती है
01:45उसकी धूल जटकती हुई उसका पहला पन्ना पढ़ना शुरू करती है
01:49धंडे बंद कमरे में टॉच की एक सीधी रोष्टी के उजाले में
01:55वो दोनों मेरे लिखे किताबे पढ़ रही थी
01:57तब ही उसकी सहली को अपने कंदे पर किसी का हाथ मैसूस होता है
02:02क्या हूँ प्रिया तू चीकी क्यों
02:07मुझे ऐसा लगा किसी ने मेरे कंदे पर अपना हाथ रखा हो निकिता
02:11रुख तो मैं देखती हूँ
02:14निकिता हर तरफ लाइट दिखाती है पर वहाँ पर कोई नहीं होता
02:19देख तो कहा कोई है यहाँ छोड़ तू कहानी सुन
02:24फिर उसे लगता है मानो एक भारी सा हाथ उसके सर को सहलाता है
02:30क्या फाल तो किताब है बन कर इसे मैं घर जा रही हूँ
02:35दोनों कमरे से बाहर आ जाते हैं
02:38क्या हुआ यार तू ऐसे अचनक बाहर क्यों आ गई
02:41अरे कैसे किताब है यार प्रिया
02:44तू जो कुछ भी पढ़ रही थी सब वैसा ही हो रहा था
02:47अब समझ में आया तो खोई-खोई से क्यों रहने लगी है
02:51एक मिनिट क्या वो राइटर मुझे भी जानता है
02:56मेरे बारे में और क्या-क्या लिखा है उसमें
02:58निकिता के लाख मना करने के बाद भी प्रिया एक बुक लेकर चली जाती है
03:10और उसी दिन से उसका नंबर ओफ आने लगता है
03:13अगली सुबह निकिता को अपने घर के गेट पर ही वही बुक एक अन्वलोप में रैप्ट मिलता है
03:19एक हफते तक प्रिया की कोई खबर नहीं मिलती
03:22निकिता किताब का पन्ना पलटती है जहां प्रिया के गायब होने के बाद टू भी कंटिन्यूट लिखा था
03:30अब मैं नेक्स्ट पार्ट का वेट नहीं कर सकती
03:33प्रिया मेरे कारण ही गुमशुदा हुई है पर मैं क्या करूँ
03:37निकिता अन्वलोप में आए बुक को खोलती है जिसमें एक एड्रेस होता है
03:42एक ऐसी जगा जिसका नाम गूगल पर भी मौजूद नहीं था
03:47पर निकिता बस पकड़कर निकल पड़ती है
03:50पालंखेद पालंखेद ये तो वही जगह है
03:55मन्जिल ने राही को ढून ही लिया
03:57निकिता जैसे ही बस से उतरती है बस गायब हो जाती है
04:02लगता है ये बस मुझे यहाँ लाने के लिए ही आई थी
04:06निकिता रोड से जंगल की और बढ़ती है
04:09अंदर चलते हुए उसे एक खंडर दिखता है
04:13जिसके अंदर वो जाती है
04:15अंदर उसे एक लड़का डायरी लिखते हुए दिखता है
04:18अरे आदे ही याँ आप आईए आईए
04:22आप ही है वो राइटर
04:24मुझे बताईए कहां है प्रिया
04:26वहाँ देखो
04:28निकिता देखती है कि दिवार पर
04:30प्रिया की तस्वीर लगी हुई है
04:32जिस पर हार चड़ा हुआ है
04:33प्रिया की फोटो के साथ
04:35वहाँ कई और लोगों की तस्वीरे भी थी
04:38यह सब क्या है
04:40मेरी कलम श्रापी थै
04:43मैं ना भी चाहूँ तो भी यह चलेगी
04:45जिस किसी का जिक्र ये करती है उसे मार कर ही दम लेती है
04:49ये सिलसिला शुरू हुआ था जब मैं 16 साल का था
04:53एक नदी की किनारे मुझे पैन मिली
04:55मैं इसे अपने कबड में रख कर भूल गया
04:59फिर एक दिन अचनक कबड से लाल रोश्नी आई
05:02मैंने उसे खोला तो पैंच चमक रही थी
05:05और इसने लिखी मौत की दास्ता
05:08मेरा सब कुछ इसने छिन लिया
05:11सब कुछ
05:12मैंने उसे खतम करना चाहा
05:15पर नाकाम रहा
05:16मैं सब कुछ छोड़ कर जंगल में रहने लगा
05:19पर ये तब भी नहीं रुकी
05:20तो इससे रोकेगा कौन
05:22तुम तुम नहीं मरी
05:24बाकि जिस किसी का भी इसने जिक्र किया
05:26उसको इसने निगल लिया
05:28तुमने मेरी सारे बुक्स पड़ी
05:30उसे संभाल के रखा पर तुम्हें कुछ नहीं हुआ
05:33तुम ही वो मसीहा हो निकिता
05:35निकिता पैन उठाती है
05:41उसके पैन को पकड़ती ही
05:43एक औरत उरती हुई आती है
05:44और पीछे से उसे लिपट जाती है
05:46उसके शरिर से खून बहे जा रहा था
05:49खुले बाल जुरियों से भरा
05:51उसका चेहरा बड़ा डरावना लग रहा था
05:53पैन की माल किन
06:02रुहे खाती है यह
06:04इसकी बात मत सुनो निकिता
06:06लेखो निकिता
06:08फिर वो लड़की खुद को मार देती है
06:10निकिता पैन उठाती है और लिखती है
06:15करण उचल कर दूर गिर जाता है
06:17आन्धी तुफान चलने लग जाते है
06:19दिवार पर टंगी सभी तस्वीर नीचे गिर जाती है
06:22जिस चैर पर बैटकर निकिता लिख रही थी
06:25वो उड़कर दिवार से टकरा जाती है
06:27मैं जिन्दा हूँ
06:32निकिता तुमने ऐसा क्या लिखा था
06:34और कालिंदी की आत्मा पैन के साथ ही खत्म हो गई
06:39ये लिखकर मैंने पैन की नीव तोड़ दी थी
06:42दोनों उस हविली से बाहर आ जाते हैं और हविली गायब हो जाती है

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