00:00पाट्टू अग्यात राइटर
00:30कालिंदी बच्पन से ही रहस्य मैं शक्तियों में मानती थी
00:37जहां उसकी उमर की लोग मौल घुमा करते
00:40उसे जंगल, सन्नाटा अपनी और खींचता था
00:43वो अपने सपनों को हकिकत से जोड़ने की कोशिश किया करती
00:47और अपने अनुभव को एक डाइरी में लिखा करती थी
00:50जिसके कारण उसकी बेंचमेट उसका बहुत मजाग उड़ाया करते थे
00:55फिर से कुछ लिखने बढ़ गई तू, कितनी बोरिंग है रहे तू
00:59बस रुपती हैं और सभी नीचे उतरते हैं
01:02वाटरफॉल के पास का नजारा बहुत ही खुबसूरत होता है
01:05सब अपनी अपनी फोटोज लेने में लग जाते हैं
01:09पर कालिंदी वाटरफॉल के नदी के बहाव को देखती रहती है
01:14नीचे उतरना है क्या? उतर जा
01:17सुश्मिता की बात पर कालिंदी चेड़ जाती है
01:21और नदी के बहाव के साथ चलती हुई उसी जंगल में पहुँचती है
01:25जिसको उसने पालन खेत नाम दिया था
01:28अंदर एक बहुत खुबसूरत सी हविली होती है
01:30वो अंदर क्या देखती है?
01:32एक औरत काले कपडे में बैठी एक कुंड में आहूती दे रही है
01:37ओमभट स्वाहा, ओमभट स्वाहा
01:42वो अरत हवा में हाथ खुमाती है
01:44और उसके हाथ में अपने आप कुंड में डालने की आहूती आ जाती है
01:48कालिंदी इसके पहले की कुछ सोच बाति उसका फोन बच जाता है
01:52अगले दिन कॉलेज केंटिन में जब सब लंच कर रहे होते हैं
01:56कालिंदी गेट से अंदर आती है
01:57यहां क्या कर रही है तू?
02:01अरे अरे तेरी डाइरी कहां गई बहन जी?
02:04आज बड़ी सुशल बन रही हो
02:07कालिंदी क्या बात है?
02:10सुश्मिता के सभी दोस्त कालिंदी को परिशान करने लग जाते हैं
02:13कालिंदी रोती हुई कॉलेज के टेरेस पर जाती है
02:16अब बहुत हुआ
02:17इन लोगों की हेकडी ना उतारी मैंने
02:19तो मेरा नाम कालिंदी नहीं
02:21कालिंदी बस पकड़कर बालन खेत निकल जाती है
02:24और उसी औरत के पास चाकर कहती है
02:27मुझे मदद चाहिए आपकी
02:29ये सब मुझे बहुत नीचा दिखाते हैं
02:32अब तो यहां से यहां में मर कर जाओंगी
02:34या बदला लेकर
02:35कालिंदी पैन उठाकर किताब में लिखने लगती है
03:05वहां बहुत सारे किताबे आ जाती है
03:07ये ये तो सच में जादू हो गया
03:11तुम्हारा मन बहुत अच्छा है बेटी
03:15जाओ अब खुश रहो
03:17कालिंदी वापस कॉलेज जाती है
03:20और अपने ही धुन में मगन हो जाती है
03:22उसकी खुशी बाकी लोगों से बरदाश नहीं होती
03:25और उसके पीजी के कमरे के बाहर
03:27सभी ताका जागे करने लग जाते है
03:30अब क्या मांगू
03:33जान छोटा सा जान हाथ में कैसा लगता होगा न
03:37ये ये क्या बकवास कर रही है
03:41सही में तेरा उपर का माला खाली है
03:44तुझे ही देखना था ना इसकी खुशी का रास
03:46चल अब
03:47दोनों आगे बढ़ी रहे होते हैं कि खिड़की सीक रोशनी आती है
03:51दोनों देखते हैं कि कालिंदी के हाथ में सच में चान्द है
03:55ये ये मेरी आँखों का धोखा है
03:59धोखा ऐसा कैसे हो सकता है
04:02ये भ्रम नहीं है ये सच्चा ही है
04:07पर इसे ये कहां से मिला
04:08सोच अगर हम इसे चुरा ले तो
04:11और रोहन उस पैन को चुराने में चुट जाता है
04:14वो सोचता है कि रात को कालिंदी के कमरे के बाहर आग लगा देगा
04:19ताकि वो भागेगी और रोहन पैन चुरा लेगा
04:22रात को रोहन पैन के लालश में आग लगाने जाता है
04:25पर आग बेकाबू हो जाती है और कालिंदी कमरे से बाहर ही नहीं आ पाती
04:30बचाओ, बचाओ
04:34कालिंदी बार जाती है
04:37मन्दा किनी को कालिंदी के मौत का एसास हो जाता है
04:40मार डाला उन्होंने मेरी बोली बच्ची को
04:43अब कोई नहीं बचेगा
04:45यहां आ बेटा मेरे पास आ कालिंदी
04:49कालिंदी की आत्मा वहां आकर अपना गुस्सा दिखाती हुई कहती है
04:54इस सारी शक्तियों के देउता अगर मैंने कभी भी किसी का भला चाहा हो
04:59तो मैं अपने सभी अच्छे कर्मों के बदले इंसाफ चाहती हूँ
05:03इस अगनी में अपनी आत्मा की आहुती देते हुए तो जिब बिंते करती हूँ
05:08के मुझे कैसी आत्मा बना दे इतने बुरी और शक्तिशाली जो अपने गुनेकारों को तरपा तरपा कर मारे
05:16ये कहकर कालिंदी के आत्मा आग में समाज आती है
05:20और आग से निकल कर कालिंदी के गुस्से से पैदा हुई आत्मा उसके पैन में समाज आती है
05:26और फिर शुरू होता है मौत का खेल
05:30सुश्मिता अपने कमरे में सो रही होती है
05:32रात को उसका फोन बचता है
05:35इसके पहले कि सुश्मिता कुछ बोल बाती फोन कट हो जाता है
05:48सुश्मिता नाइट ड्रेस में ही भागते हुए कॉलेज की पीछे की पहाडी पचाती है
05:53जंगल की धूत अंधेरे में दिखता है वो चमकता हुआ पैन
05:57मान गये रोहन तुमें तुमें आखिरकार पैन मिली गया
06:03सुश्मिता पैन उठाने जाती है कि पैन में से कालिंदी के आत्मा बहार निकल कर सुश्मिता को पहाडी के उपर से नीचे धका देती है
06:11ये तो बस शुरुआत थी सब मरोगे
06:16और वही होता है जिसने भी कालिंदी को दुख दिया था सब मर जाते हैं
06:22पर आत्मा अब इतनी क्रूर हो चुकी थी कि वो रुकती ही नहीं
06:26अब पैन और ज्यदा खून की प्यासी हो गई थी
06:30एक दिन सोला साल का एक लड़का करण नदी के किनारे बैठा हुआ होता है
06:36एक चमकती हुई पैन उसका ध्यान अपनी और खींचती है