00:00हारल कहान्याची
00:30खेती सुप गई, लोग भूखे मनने लगे
00:32रुकमा को गाउं से बहार निकाल दिया गया
00:36और तब से वो गाउं के बहार जोपड़ी बना कर रहने लगी
00:39कोई भी रुकमा के घर के आजुबाजु से गुजरता तक नहीं था
00:43एक दिन गाउं के रहने वाले रतन और उसकी पत्नी आनन्दी को
00:48दूसरे गाउं से आते वक्त रात हो गए
00:50और अंधेरे में रास्ता भटक के वो रुकमा की जोपड़ी के पास जा पहुँचे
00:55अरे आनन्दी, ये क्या हो गया?
00:59हम तो रुकमा डायन की जोपड़ी के पास आप पहुँचे
01:03अब तो सब बुरा होगा, जल्दी, जल्दी से निकल यहां से
01:06हांची सही कहते हैं आप, ये डायन हमको खा जाएगी, जल्दी भागो यहां से
01:12तब भी रुकमा जोपड़ी से बाहर आती है
01:15अरे रुको, तुम लोग यहां मेरी जोपड़ी में आराम कर लो
01:20और देखो, इस रास्ती पर आगे मत जाना
01:24हां हां, हमें आगे जाने से इसलिए रोक रही है ना
01:29ताकि हमें मार डाले तू
01:31अरे ना ना, मैं तो तुम्हारी जान बचाना चाहती हूँ
01:36मेरी बात तो सुनो
01:38डर की वज़े से आनन्दी और रतन वहां से भाग जाते हैं
01:42लेकिन फिर अगले दिन गाउं में खबर फैलती है
01:44कि रतन और आनन्दी ने अपने घर में फासी लगाकर आत्माहत्या कर ली
01:49वज़े क्या थी, किसी की समझ में नहीं आया
01:53अगले दिन गाउं में जोर का तूफान आया
01:55और भयानक तरीके से किसी के रोने की आवाज भूजने लगी
01:59अरे भाई लगता है उस डायन रुकमान ने गाउं पे काला जादू कर दिया है
02:06हाँ भाई, मुझे भी ऐसा ही लग रहा है
02:10लगता है, कल आनंदी और रतन मर गए
02:14लगता है ये उसी का किया धरा है
02:17हमें सरपंच के पास चलना चाहिए
02:20वो दोनों आदमी सरपंच की घर पाचते है
02:23अरे, तुम इस वक्त यहाँ पर क्यों आये हो
02:28जानते नहीं, बाहर क्या हो रहा है
02:32कितनी डरावनी आवाज गाओं में गुंज रही है
02:35बस मालिक, किसी तरह आ गए
02:38पूरे गाओं वालों की जिंदगी का सवाल है
02:41अरे, मालिक, ऐसे तो सब एक एक करके मर जाएंगे
02:45हम, तो क्या चाहते हो, क्या किया जाए
02:49मालिक, मालिक हमें रुकमा को मारना होगा
02:53अरे, जब तक वो डायन गाओं में जिंदा रहेगी
02:56तब तक गाओं में ये सब होता ही रहेगा
02:59हम, शायर ठीक कह रहे हो तुम लोग
03:03बगर ये काम करेगा कौन
03:06मालिक, अगर आप कहे तो
03:09हम दोनों मिलके इस काम को अंजाम दे दे
03:12बस आपको हमें यकिन दिलाना होगा
03:15कि हम पकड़े नहीं जाएंगे
03:17ठीक है, लेकिन बाहर जो आतंग का साया है
03:22उसमें तुम दोनों रुकमा तक पहुँचो को कैसे
03:25हैं, क्या तुम्हें डर नहीं लगता
03:28मालिक, आप उसकी चिंता ना करे
03:31काल भेरों का भबुत है हमारे पास
03:35रुकमा तक पहुँच कर
03:37आसानी से मौत के घाट उदार देंगे उसको हाँ
03:41हम, मैं भी चलूँगा तुम लोगों के साथ
03:45उस डायन को मरती हुए देखने की बड़ी इच्छा है मुझे
03:49सरपंच उन दोनों लोगों के साथ गाउं के बाहर की तरफ चल दीता है
03:54गाउं में घंघूर काली रात पसरी हुई थी
03:58और दिल दहलाने वाली चीख की आवाज
04:01माहुल को बेहत खोफरांक बना रही थी
04:04हाथ में काल भेरों का भबुत लिए
04:06वो तीनों रुकमा की जुपड़ी के तरफ जा रहे थे
04:09वहाँ पहुचने के बाद
04:11ये लोग खंजर और पार कर दो इस डायन के कलेजे के अंदर
04:17मालिक आप बस यहीं खड़े होकर नजारा देखो
04:21आज ना बचेगी ये
04:23हाँ मालिक ये भबुत अब इसकी जरूरत नहीं है
04:28मैं इसे यहाँ पेड़ी की डाली पे रख देता हूँ
04:32लोटते वक्त हमारी रक्षा करेगा
04:34वो दोनों आदमी चुपके से सोती हुई रुकमा देवी के उपर वार करते हैं
04:38एक जोरदार चीक से वो इलाका गुण जुटता है
04:41लेकिन आचानक रुकमा के शरीर से जो खून बैता है उसका रंग नीला था
04:47ये देखकर वो दोनों आदमी डर से काम पने लगते हैं
04:52अरे अरे अरे अरे अरे ये क्या
04:54अरे इसके खून का रंग तो नीला है
04:57अरे तों क्या हुआ डायन जो ठहरी इंसान नहीं है ये
05:02और आज इस बात का पक्का यकिन हो गया है
05:05मर गई चुडएल मर जाने दे
05:07चल सरपंच साहब को जाकर ये खबर सुनाते हैं
05:12वो दोनों जैसे ही बाहर आये
05:14उन्होंने देखा सरपंच की लाश पेड़ पे लटकी हूँ थी
05:17ये देखकर वो दोनों डर के मारे चीकते हुए वहां से भागे
05:21लेकिन तब ही एक पेहट डरावनी औरत
05:24उनकी सामने आकर खड़ी हो गई
05:26कहा जा रहे हो
05:28तो मैं क्या लगा
05:30किसे का खोन करके बच जाओगे तुम
05:33कौन हो तुम
05:37कौन हो
05:38हमने तो डायन को मारा है
05:40कुछ गलत नहीं किया भाई
05:42वो डायन नहीं थी
05:44वो इस गाओं की रक्षा कर रही थी
05:47तुम तुम कौन हो
05:50और तुम्हें कैसे पता
05:52वो कौन थी
05:53उसने रतन और आनंदी को मार डाला
05:56रतन और आनंदी को मना गया था रुकमा ने इस रास्ते से आगे जाने से
06:04पर वही दुनों माने नहीं
06:06और उन दोनों ने मुझे देख लिया था
06:09इसलिए उनका मरना तो तै था
06:13क्या मतलब तुने तुने मारा था
06:16और हम समझ रहे थे कि रुकमा ये सब कर रही है
06:20अरे वो तो मेरे कबसे में थी
06:22रोज अपने खून का चड़ावा दे कर इस गाओं को बचा रही थी
06:27तब ही तो उसका खून नीला पड़ गया था
06:30लेकिन तुमने तो उसे मार कर मेरा काम आसान कर दिया
06:35अरे नहीं नहीं हम नहीं मानते कि ये सच है
06:42नहीं मानते तो बता हो सार पंच कैसे मरा फिर
06:48क्योंकि उस वक्त तो तुम लोग रुकमा को मार रहे थे ना
06:52जवाब दो
06:54हाँ बात तो सही है इसका मतलब
06:59इसका मतलब अब तुम लोगों ने अपनी मौत को खुद दावत दी है
07:07क्योंकि जो तुम लोगों को बचाने की कूशिश कर रही थी
07:11वो तो अब रही नहीं
07:13अरे लेकिन कौन? कौन है वो जो हम लोगों को मारना चाहता है?
07:22आत्मा, रुकमा के घर वालों की आत्मा
07:29खुनी भेडिये थे और रुकमा ने उनका ये राज जान लिया था
07:33रुकमा के अंदर शक्तियां थी जिसके चलते उसने उन सब को खत्म कर दिया
07:38क्या? क्या? अरे लेकिन पूरा गाउं तो समझ रहा था कि रुकमा अपने घर वालों को खा गई
07:46खा रुकमा नहीं मैं आ गई
07:53क्योंकि असले डायन मैं हूँ और अब कोई नहीं बचेगा इस गाउं में
08:01कोई नहीं भागो तुम दोनों वो दोनों आदमी बागलों की तरह भागते हुए गाउं पहुचते हैं
08:12वहाँ देखते हैं के पूरा गाउं खुद की नदी बन चुका था हर तरफ लाशे ही लाशे पड़ी थी
08:18और रुकमा के मरे हुए घर वाले उन लाशों को खा रहे थी
08:23कुछ दिर के बाद उन दोनों का भी वही हाल हुआ
08:48और वहाँ भागते हैं
08:55कि झाल
09:02कर दोनों
09:12लों