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  • 9 months ago
भूतिया किसान _ Bhootiya Kissan _ Horror Stories in Hindi _ Hindi Kahaniya _ Moral Stories in Hindi(720P_HD)

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00:00BOOTYA KISAN
00:30शक्ती एक बिल्डर था जिसका मकसद मधुपूर गाउं की जमीन पर कबजा करना था
00:37वो हर बार किसी ना किसी किसान को अपने जाल में फसाता और उसकी जमीन अपने नाम कर लेता
00:43भानू की जाने के बाद शक्ती अपने कमरे में बैठा था कि तभी अचानक हवा का एक जोंका आता है और सामने रखी डेस्क पर से एक कबर जमीन पर गर जाता है
00:56ये ये कागजात यहाँ कैसे इसे तो मैंने जला दिये थे
01:03तभी कमरे की खिडकियों के दर्वाजे जोर-जोर से खुलने और बंद होने लग जाते हैं
01:09ऐसा लगता है मानो एक पल में ही सर्दी आ गई हो
01:12सिलिंग पर लगा पंखा जो बंद था अपने आप घूमने लग जाता है
01:18ये अचनक पंखा कैसे चलू हो गया
01:21और ये कड़ाके की ठन तो ऐसा लगता है मानो अचनक मही में दिसंबर आ गया हो
01:28शक्ती अपनी अलमारी खोलता है और काले रंग का सूट निकाल कर पहन लेता है
01:34विल्सन इस बैक
01:36अब किशोर को ठगने का समय आ गया है
01:42काले सूट और डोपी में शक्ती अपने घर से निकल पड़ता है और किशोर के पास पहुचता है
01:49अक्सक्यूज मी, जरा सुनिए
01:52शेरी बबू
01:54कहिए कहिए, मैं कैसे आपकी मदद कर सकता हूँ
02:00मैं एक होलसेलर हूँ
02:03अब आपको मार्केट के तलाश करने के ज़रूरत नहीं है
02:06मेरे लोग आपके ग्रैंस डिरेक्ली बाई कर लेंगे
02:10क्या शेरी बबू
02:12सही में
02:13अब हमको इधर उधर भटकना नहीं पड़ेगा
02:16विलसन किशोर के अनाजों को नकल रुपे दे कर खरीद लेता है
02:21अब तो आपको विश्वास हो गया ना
02:24कि मैं कोई ठग नहीं हूँ
02:26अगर आपको अपने बाखे ग्रैंस भी सेल करना हो
02:29तो मुझ सी मिलिएगा
02:31कुछ दिनों के लिए मैं आपके ही गाउं में हूँ
02:34ये मेरा अड्रेस है
02:36शक्ती वापस अपने घर पर पहुँचता है
02:39और भानों से कहता है
02:40जब भी ये शक्ती विलसन बनता है
02:43कोई ना कोई किशन फासे में ही फस जाता है
02:46अब देखना
02:48वो किशोर कुछ ही देर में यहां आता ही होगा
02:51फिर मैं उससे उसके जमीन के पेपर्स पर साइन करवा लूँगा
02:56तभी दर्वाजे पर दस तक होती है
03:02और किशोर अंडर आता है
03:04यह बाबुजी यह बाबुजी हमको अनाज बेचना है
03:09क्या करना होगा उसके लिए
03:11शक्ती भानों को देखकर मुस्कुराता है
03:14और उसे बाहर जाने का इशारा करता है
03:16इन पेपर्स पर सायन कर दो किशोर
03:19फिर जब भी तुम्हारे खेत में अना जुगेंगे
03:22मैं उन्हें खरिद लूँगा
03:24शक्ती यह कही रहा होता है
03:27कि तभी किशोर के आवाज बदल जाती है
03:29और वो कहता है
03:30धीरे धीरे किशोर का चेहरा बदलने लग जाता है
03:42वो एक बुड़ा किसांच ऐसा दिखने लग जाता है
03:45विजे तुम?
03:47तुम तो मर चुके थे?
03:49नहीं, नहीं, यह नहीं हो सकता
03:52शक्ती बहुत डर जाता है
03:54और बाहर भागने की कूशिश करता है
03:56विजे पास ही पड़े book self की और देखता है
03:59और वो शक्ती के उपर गिर जाता है
04:01जाने दो, मुझे जाने दो, छोड़ दो मुझे
04:04मुझे से गलती हो गई, गलती हो गई
04:07भानू मुझे, मुझे बचाओ भानू
04:10शक्ती के आवाज सुनकर भानू वहाँ आता है
04:13पर वहाँ कोई नहीं होता
04:15भानू अपने कमरे में जाता है
04:34और अपना कबोड खोल कर
04:36कुछ पुराने जमीन के पेपर्स निकालता है
04:38कहाँ गए विजे के जमीन के पेपर्स
04:41यहीं तो रखे थे
04:42नीचे किसे पहुँच गए
04:44तभी सभी के सभी पेपर्स में आग लग जाती है
04:48अरे यह सब क्या हो रहा है
04:50आग कैसे लग गई पेपर्स में
04:52अब इतनी मुश्किल से तो प्रॉपर्टी हर्पी थी मैंने
04:56बानू बानू
04:58ए भगवान यह क्या हो गया बॉस
05:02किस कल मुहें की हाई लगी है आपको
05:04मेरी हाई लगी है शक्ति तुझे
05:07मैं
05:09मैं मर गया
05:11अब तू मरेगा
05:13बहुत लोगों को लुटा है तूने
05:16हमारी जमीर खा गया तू
05:18विजे
05:21विजे ये तुम हो ना
05:24मैं
05:25मैं समझ गया
05:26मुझे जाने दो विजे
05:28विजय की आत्मा भानु की शरिर से निकलाती है, भानु बेहोश हो जाता है
05:34ये क्या खेल है, मैं पाकर हो जाओंगा, छोड़ दो मुझे
05:39अरे, ये सब क्या कर रहे हो तुम
05:42तब विजय की आत्मा अपनी कहानी सुनाना शुरू करती है
05:47मैं गेहों की खेती किया करता था
05:49कुछ दिन पहले ही मेरी मा का दिहान धुआ था
05:53शादी के 20 साल के बाद भी मैं बच्चे का मुझे नहीं देख पाया था
05:58पूरे घर में मैं और मेरी पत्नी मनोरमा अकिले हो गए थे
06:03बस खेती ही एक मात्र सहारा रह गया था घर चलाने का और मन बहलाने का
06:10चलता हूँ मैं खेत पर
06:13अभी खेत पर? अरे कल ही तो कटाई हुई है ना अनाज की
06:18आज तो खेत पर कुछ कामी नहीं होगा
06:21तो क्या करूँ बोलो? घर बैटा रहूँ और इन दीवारों से बात करता रहूँ
06:27अरे तुम तो रसो के काम में लग जाओगी और पूरा दिन कट जाएगा
06:32मैं कैसे काटू समय?
06:34आप ऐसे क्यों बोल रहे हैं जी? मैंने तो बस यूँ ही कह दिया था
06:38काम कैसे नहीं है? अभी कटाई हुई है, सफाई होगी
06:42फिर उसे बाजार में बेचना भी तो होगा
06:45जाइए जीए आप खेट पर ही जाइए
06:48शायद उस दिन ना ही मैं घर से बाहर निकलता
06:52और ना ही तुम मुझे द्रोखा देकर उस जमीन पर बिल्लिंग बनाता
06:58मैं जमीन नहीं मेरी आत्मा लूट ली
07:01मैं ये सद्मा बरदाश नहीं कर सका और मर गया
07:05और मेरे बाद मनरमा भी चल बसी
07:09पर अब मैं तुम्हें किसी और किसान की जमीन हड़कने नहीं दे सकता
07:14शक्ती एक बिल्डर था
07:17उसके मन में किसी के लिए कोई दया भावना थी ही नहीं
07:21गाओं के कई किसान उसकी लालच का शिकार बने थे
07:24पर जब अपनी मौद को वो सामनी देखता है तो वो डर जाता है
07:29और सभी किसानों को उनकी जमीन वापस भी कर देता है
07:36और आखिरकार मधुपुर गाओं फिर से खुशहाल हो जाता है

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