फांसी के तख्ते पर जाने से ठीक पहले का दृश्य किसी भी इंसान की रूह कंपा देने वाला होता है, खासकर जब मुजरिम के कांपते हाथों के सामने उसकी पसंद का आखिरी खाना परोसा जाता है। लेकिन मन में सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि जिस मुजरिम ने किसी मासूम की बेरहमी से जान ली हो या समाज में खौफनाक जुर्म किया हो, उसे मरने से पहले मनपसंद खाना खिलाने की क्या तुक है?
इतिहास के सबसे कुख्यात सीरियल किलर जॉन वेन गेसी ने तो अपनी मौत की सज़ा से ठीक पहले बकायदा केएफसी फ्राइड चिकन, फ्रेंच फ्राइज़ और स्ट्रॉबेरी की मांग कर डाली थी। दुनिया भर के जेलों और अदालतों में सदियों से चली आ रही इस रस्म को 'लास्ट मील' (Last Meal Tradition) कहा जाता है। कानून के जानकारों के मुताबिक इसके पीछे का सबसे बड़ा कारण यह है कि आधुनिक न्याय प्रणाली किसी मुजरिम से कोई निजी दुश्मनी या नफरत नहीं रखती। यह परंपरा यह दर्शाने के लिए निभाई जाती है कि कानून इंसाफ के लिए काम करता है, बदले की आग में नहीं।
वहीं इसके पीछे एक प्राचीन सांस्कृतिक मान्यता भी जुड़ी रही है कि अगर मरने वाले की अंतिम इच्छा का सम्मान न किया जाए, तो उसकी आत्मा असंतुष्ट होकर भटकती रहती है। चाहे इसे सिस्टम की इंसानियत कहें या एक प्राचीन रस्म, यह आज भी दुनिया के सबसे बड़े कानूनी और नैतिक विवादों में से एक है।
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