Skip to playerSkip to main content
  • 1 week ago
जब एक विदेशी रिपोर्टर ने विदेश मंत्री एस जयशंकर से सवाल दागा कि जब दुनिया में G20 पहले से था, तो ब्रिक्स नाम का नया क्लब बनाने की क्या ज़रूरत थी, तब उनका दिया जवाब पश्चिमी दुनिया के दोहरे रवैये पर सीधा तमाचा था। उन्होंने साफ़ कहा कि दुनिया में G7 नाम का एक ऐसा क्लब पहले से था जहाँ पश्चिमी देश किसी और को शामिल ही नहीं होने देते थे, इसलिए बाकी दुनिया ने अपना अलग मंच तैयार कर लिया।

आज उस जवाब की अहमियत देखिए—जिस ब्रिक्स को कभी कमतर आंका जाता था, आज उसमें जुड़ने के लिए 40 से ज़्यादा देश कतार में खड़े हैं। अलग-अलग इतिहास, भूगोल और प्राथमिकताओं के बावजूद ये सभी देश एक मंच पर इसलिए हैं क्योंकि वे ग्लोबल सिस्टम में अपनी आवाज़ और ताकत को दर्ज कराना चाहते हैं।

सबसे बड़ी बात यह है कि कभी पश्चिमी दबदबे से बाहर समझे जाने वाले इसी ब्रिक्स की 18वीं समिट को आज भारत खुद लीड कर रहा है। यही भारत की स्वतंत्र और दमदार विदेश नीति का असली सबूत है—आपको किसी एक गुट का पिछलग्गू बनने की ज़रूरत नहीं, बस खुद इतने ताकतवर बन जाओ कि हर गुट आपके साथ मेज पर बैठने को मजबूर हो जाए।

इस जबरदस्त कूटनीतिक जवाब पर आपकी क्या राय है? कमेंट में ज़रूर बताएं और निष्पक्ष जियोपॉलिटिकल विश्लेषण के लिए चैनल को सब्सक्राइब करें!

Category

📚
Learning

Recommended