करीब 6.6 करोड़ साल पहले जब महज़ 10 किलोमीटर चौड़ा एक एस्टेरॉयड मैक्सिको के पास चिक्सुलब क्रेटर वाली जगह पर टकराया, तो मन में सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि धरती तो गोल है, फिर उस एक बिंदु पर हुई टक्कर से पृथ्वी के दूसरे छोर पर मौजूद डायनासोर्स एक साथ कैसे खत्म हो गए?
असल सच्चाई यह है कि टक्कर होते ही एक झटके में पूरी दुनिया के डायनासोर्स नहीं मरे थे। इतने छोटे उल्कापिंड में यह ताकत नहीं थी कि वह अकेले पूरे ग्रह की ज़िंदगी मिटा दे। असली तबाही तो टक्कर के कुछ हफ़्तों बाद शुरू हुई। इस महाविस्फोट से अरबों टन मलबा, धूल, सल्फर और काली राख हमारे वायुमंडल में चारों तरफ फैल गई, जिसने सूरज की 99% रोशनी को पूरी तरह ढक दिया।
सालों तक धूप न निकलने के कारण फोटोसिंथेसिस बंद हो गया और पेड़-पौधे सूख गए। इसके बाद शाकाहारी जानवर भूख और हाड़ कंपाने वाली ठंड से तड़पकर मरने लगे, और जब वे नहीं रहे तो मांसाहारी शिकारी भी भूख के शिकार हो गए। यह कुदरत का एक ऐसा ग्लोबल 'न्यूक्लियर विंटर' था जिसने धीरे-धीरे पूरी प्रजाति का नामोनिशान मिटा दिया।
अगर आज के समय में ऐसा कोई उल्कापिंड टकरा जाए, तो क्या इंसान बच पाएगा? कमेंट में अपनी राय ज़रूर बताएं और ऐसी ही दिलचस्प साइंस मिस्ट्रीज़ के लिए चैनल को सब्सक्राइब करें!
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