23 अगस्त को कश्मीर घाटी में सामने आए एक खौफनाक थ्रेट लेटर ने 1990 के काले दौर की यादें ताज़ा कर दी हैं। लश्कर-ए-तैयबा के नए छद्म संगठन 'यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल' ने कश्मीर में तैनात कश्मीरी पंडित कर्मचारियों के बाकायदा मकान नंबर और गली के नाम दर्ज कर खुली धमकी जारी की है।
निशाने पर वो कर्मचारी हैं जो प्रधानमंत्री पुनर्वास पैकेज (PM Employment Package) के तहत अपनी पुश्तैनी ज़मीन पर लौटे थे। घाटी में ऐसे करीब 6,000 कर्मचारी कार्यरत हैं। 2022 की टारगेटेड किलिंग्स के बाद से ही ये परिवार सुरक्षित इलाकों में ट्रांसफर की मांग कर रहे हैं।
धमकी के तुरंत बाद प्रशासन ने अस्थायी सुरक्षा के तहत वर्क फ्रॉम होम का आदेश दिया, लेकिन बड़ा सवाल वही है—क्या वर्क फ्रॉम होम से इन निर्दोष कर्मचारियों और उनके परिवारों की जान हमेशा के लिए सुरक्षित हो जाएगी?
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