क्या आप जानते हैं कि जिस वर्ल्ड मैप (Mercator Projection) को हम स्कूल-कॉलेजों में देखते आए हैं, वह असल में दुनिया का सही आकार दिखाता ही नहीं?
1569 में नाविकों की सहूलियत के लिए गोल धरती को सपाट कागज़ पर उतारा गया था, जिसकी वजह से ध्रुवों के पास वाले देश (जैसे ग्रीनलैंड, कनाडा और अमेरिका) अपनी असलियत से कई गुना बड़े दिखने लगे। हकीकत यह है कि ग्रीनलैंड पूरे अफ्रीकी महाद्वीप से 14 गुना छोटा है, लेकिन नक्शे में दोनों बराबर नज़र आते हैं!
अब यूनाइटेड नेशंस (UN) में दुनिया के 'True Size Map' को मान्यता देने और आधिकारिक रूप से सही आकार वाले नक्शे को बढ़ावा देने के लिए प्रस्ताव लाया गया। 164 देशों ने इसके समर्थन में वोट दिया, लेकिन अमेरिका ने इसके खिलाफ वोट डाला! जानिए इस नक्शे के पीछे का दिलचस्प विज्ञान और राजनीति।
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