क्या आप सोच सकते हैं कि किसी देश के प्रधानमंत्री की सालाना सैलरी ₹26 करोड़ रुपये हो सकती है? यह सच है! हाल ही में सिंगापुर के प्रधानमंत्री की सैलरी ₹16 करोड़ से बढ़कर ₹26 करोड़ सालाना हो गई है।
यह आँकड़ा सुनकर दुनिया हैरान है, खासकर तब जब हम तुलना करते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति को सालाना करीब ₹4 करोड़ और भारतीय प्रधानमंत्री को महज़ ₹21 लाख रुपये मिलते हैं। तो फिर सिंगापुर अपने नेताओं को इतना अंधाधुंध पैसा क्यों देता है?
इसके पीछे सिंगापुर के संस्थापक और पहले प्रधानमंत्री ली कुआन यू (Lee Kuan Yew) की एक बहुत ही अलग और दूरदर्शी सोच है। 1990 के दशक में उन्होंने यह फॉर्मूला लागू किया था। उनका मानना था कि अगर सरकारी अफ़सरों और नेताओं की सैलरी कम रखोगे, तो बेहतरीन टैलेंट प्राइवेट सेक्टर में भाग जाएगा। और जो बचेंगे, वे भ्रष्टाचार या घूसखोरी की तरफ मुड़ सकते हैं।
ली कुआन यू का मानना था, 'सरकारी अफसरों का पेट भरो, ताकि वे देश को न लूटें और अपना पूरा ध्यान देश के विकास में लगाएं'। इसी नीति ने सिंगापुर को दुनिया के सबसे अमीर, आधुनिक और ईमानदार देशों में से एक बना दिया। जानिए क्या है इस अजीब-सी सैलरी पॉलिसी के पीछे का पूरा सच!
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