क्या आप सोच सकते हैं कि इंसान का मलमूत्र और पेशाब भी दुनिया के सबसे ऊंचे पहाड़ के प्राचीन ग्लेशियरों को पिघला सकता है?
वैज्ञानिक जर्नल 'रीजनल एनवायरनमेंटल चेंज' (Regional Environmental Change) में प्रकाशित छह अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों की एक हालिया रिसर्च ने दुनिया को चौंका दिया है। माउंट एवरेस्ट पर बढ़ती पर्वतारोहियों की भीड़ के कारण बेस कैंप और ऊपरी कैंप्स पर हर दिन करीब 6,000 लीटर गर्म यूरिन बर्फ में विसर्जित हो रहा है।
ऊंचाई पर डिहाइड्रेशन और ऑक्सीजन की कमी से बचने के लिए ट्रैकर्स भारी मात्रा में पानी पीते हैं। सामान्य तौर पर एक व्यक्ति के विसर्जन से कोई बड़ा अंतर नहीं पड़ता, लेकिन हज़ारों पर्वतारोहियों द्वारा लगातार किया जाने वाला यह गर्म विसर्जन बर्फ के स्थानीय तापमान संतुलन को बिगाड़ रहा है और सदियों पुराने ग्लेशियरों को अंदर से तेजी से गला रहा है।
वैज्ञानिकों ने सख्त चेतावनी दी है कि यदि इस वेस्ट को नीचे शहरों में लाकर सुरक्षित रूप से डिस्पोज़ नहीं किया गया, तो एवरेस्ट का यह नाज़ुक इकोसिस्टम स्थायी रूप से नष्ट हो जाएगा।
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