बिना एक भी गोली चलाए या हथियार उठाए कोई महाशक्ति अंतरराष्ट्रीय संकट का रुख कैसे मोड़ सकती है, यह दुनिया को चीन से सीखना चाहिए। जब अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के कारण 'स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़' से वैश्विक कच्चे तेल की सप्लाई ठप होने की नौबत आई, तो दुनिया को भीषण एनर्जी क्राइसिस का डर सताने लगा। लेकिन चीन घबराने के बजाय पूरी तरह तैयार था।
चीन ने संकट के समय अपने तेल आयात को बढ़ाने के बजाय सीधे आधा कर दिया, जिससे वैश्विक बाज़ार में न तो हाहाकार मचा और न ही सप्लाई पूरी तरह टूटी। यह कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं था, बल्कि दशकों की सोची-समझी नीति थी। चीन ने सबसे पहले दुनिया का सबसे बड़ा स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिज़र्व खड़ा किया। इसके बाद उसने किसी एक देश के भरोसे रहने के बजाय रूस, सऊदी अरब, ईरान, ओमान और ब्राजील जैसे कई देशों में अपने स्रोत बांट दिए।
सबसे बड़ा दांव यह रहा कि चीन ने अपनी बिजली उत्पादन में तेल और गैस की निर्भरता को घटाकर महज़ 3% पर ला दिया, जबकि बाकी ऊर्जा कोयला, हाइड्रो, न्यूक्लियर और सोलर से हासिल की। अंतरराष्ट्रीय उठापटक के बीच चीन ने दिखा दिया कि असली ताकत हथियारों में नहीं, बल्कि दूरगामी आर्थिक और रणनीतिक तैयारी में होती है।
क्या दुनिया के बाकी देशों को भी चीन के इस एनर्जी सिक्योरिटी मॉडल से सीख लेनी चाहिए? अपनी राय कमेंट बॉक्स में ज़रूर बताएं और निष्पक्ष वैश्विक भू-राजनीतिक विश्लेषण के लिए चैनल को सब्सक्राइब करें!