ब्रिक्स (BRICS) समिट के इस बार के नतीजों ने पूरी दुनिया के भू-राजनीतिक समीकरण को हिलाकर रख दिया है। पर्दे के पीछे से सामने आए 3 सबसे बड़े फैसलों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल मचा दी है:
मोदी-शी जिनपिंग वार्ता: 2020 के गलवान घाटी तनाव के बाद पहली बार दोनों नेताओं के बीच औपचारिक द्विपक्षीय बातचीत हुई, जो सीमा पर तनाव कम करने और संबंधों को पटरी पर लाने की दिशा में एक बड़ा कूटनीतिक कदम माना जा रहा है।
डी-डॉलराइजेशन का व्यावहारिक फॉर्मूला: अमेरिका को सीधे तौर पर भड़काए बिना ब्रिक्स देशों ने अचानक कोई साझा ब्रिक्स करेंसी लॉन्च करने के बजाय, अपनी-अपनी लोकल करेंसियों (रुपया, युआन, रूबल आदि) में द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देने की सुरक्षित नीति अपनाई है।
ईरान, सऊदी अरब और यूएई एक मंच पर: अमेरिका के दोस्त (सऊदी अरब, यूएई) और कट्टर विरोधी (ईरान) एक ही मेज पर साथ बैठे और तनाव कम कर आपसी आर्थिक विकास पर फोकस करने पर सहमति जताई।
जानिए कैसे ब्रिक्स का यह नया पावर गेम वैश्विक व्यवस्था और अमेरिकी डॉलर के दबदबे को चुनौती दे रहा है!
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