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Asma ul Husna yani Allah ke 99 khoobsurat naam jo uski rehmat, qudrat aur azmat ko bayan karte hain. In mubarak naamon ka zikr karna aur unhein yaad rakhna bohat badi fazilat rakhta hai.

Is video mein Asma ul Husna – 99 Names of Allah ki khoobsurat tilawat pesh ki gayi hai jo dil ko sukoon aur rooh ko tasalli deti hai. Allah ke in pyare naamon ko sunna aur parhna imaan ko mazboot karta hai aur zindagi mein barkat lata hai. Agar aap Islamic zikr aur roohani kalam pasand karte hain to is video ko zaroor sunein aur share karein.

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00:00आज 23 की रात है शब जुमा है तो कराइन के लिहाज से लगता है कि अमीद है यही होगी
00:10चुके जुमा की रात भी शामल हो रही है और हो सकता यह जुमत अलवदा हो इमकान है कि एक
00:17जुमा और बढ़ जाए अगर 30 का महीना हुआ और अगर 29 का हुआ तो फिर तो यह आखरी ज�
00:24तो यह शब जुमा वैसे ही बापरकत होती सारे साल की शब जुमा इंतहाई बापरकत होती शब जुमा में जो
00:33मौत ता जाए तो अमिनक फितनत अल्कबर के फितने से लगा उसको बचा लेता है
00:43तो यह दो चीज़ें कट्शी हो रहेगी जवान लोगों हम्मत करना मेरे लिए दौा करना बलके पुरी उम्मत के लिए
00:52दौा करना
00:53और यह इरान और यहुदों नसारा की जो जंग है इसमें अल्ला ताला इरान वाले बाईयों को फता नसी फर्माए
01:11तारिक की हर रात तरावी के बाद सिर्फ तारिक जमील ओफिशल पर
01:22एक दफ़ अल्ला के नभी सल लाह लिए उसलम ने फर्माया
01:28बनो इस्राइल में चार अंबिया ने मुसलसल असी साल जहाद किया
01:39तो सहबा ने अर्स कि या रसूल अल्ला हमारी तो अमरें भी असी साल नहीं होती
01:49और हो जाएं तो किसी काम के नहीं रहते हैं
01:54तो हम क्या करें
01:58उस पर अल्ला ने सुरह कदर उतारी
02:02इन्ना अन्जलनाहु फी लेलति अल्कदर
02:07वमा अदराकमा लेलतु अल्कदर
02:12लेलतु अल्कदर खेरु मिन अल्फिश शहर
02:20एक रात हम आपको दे रहे हैं
02:25जो असी साल से भी जादा है
02:28हजार महीने को तरासी साल बनते हैं
02:32तो खेरु मिन अल्फिश शहर
02:35यहर एक जो इस रात जागेगा
02:45हजार महीने की बन्दगी तो अल्ला जरूर देगा
02:49लेकिन जिसमें जितनी ज़्यादा
02:55अमल की खुबसूरती होगी
02:58उसके लिए पिर खैर का लवज है
03:02कि अल्ला हजार महीने से ज़्यादा जितना भी कर ले
03:07उसके लिए तो कोई मुश्किल नहीं है
03:15क्या खुबसूरत है कुरान
03:17कदर के जितने माणा हैं वो इस सूरत में आवे है
03:24कदर उ कीमत सुनाएं
03:29पहले ल्ला ने लवज कदर को कीमत में इस्तेमाल किया
03:40कि लेलत अल्कदर की कीमत क्या है
03:43एक हजार महीनों से ज़्यादा है
03:47कदर का दूसरा माना है तंगी
03:53वहम्मल इनसानों इजा मब्तलाहु फगदरा आलेही रिस्कहु
03:59यवसुतुर रिस्क लिमें ये शाओ वयकदिर
04:05जिसका कम कर दे गदरा कमी
04:09तो यहां
04:13अल्ला ताला कदर का दूसरा माना इस्तेमाल फर्मा रहे है
04:19तन्जलूलमलाइकत गर्रूह
04:22इतने फरिष्टे उतरते हैं
04:26कि जमीन तंग पड़ जाती है
04:29यहां गदर तंगी के माना में है
04:34कि मलाइका का नुजूल इतना होता है
04:39कि ये च्छोटी सी जमीन
04:42उनके आने की वर्कस से छोटी ही पड़ जाती
04:47तंग पड़ जाती
04:49साथ बिन माज रजे लावनों का
04:53की शहादत हुई
04:57जंग खंदक में जखमी हुए
04:59अब पिर चंद दिनों के बाद इंतकाल हुआ
05:03मारे नबी को पता चला तो
05:09जिवरील आए ना का
05:10या रसुल आपके साथियों में कौन फोट हुआ है
05:16क्यों का इहतज जाल्श रर्रह्मान तरवा
05:22अल्ला का अर्श खुशी से जूम रहा है
05:26कि कोई आ रहा है
05:28सुभानादा
05:30अपने का साथ जखमी था
05:34तो अपने मस्चद से दोड़ लगाई
05:39उनके घर पहुँचे तो वो इंतकाल फर्मा गए थे
05:44कमरा बिलकुल खाली था
05:46चार पाई पड़ी थी
05:48और आप कमरे में ऐसे दाखिल हुए
05:51जिससे सारा कमरा भरा हुआ हो
05:56और आप कोई कदम यहां रखते
05:58कोई ऐसे इस तरह इस तरह जिग जैग बनाते हुए
06:05साथ के सरहाने ऐसे करके बैठ़ गए ऐसे
06:11तो सहाबा ने अर्ज की या रसुल्ह
06:15कमरा तो खाली है
06:18हमें तो कोई नजर नहीं आ रहा
06:21आप ऐसे अंदर गए जैसे कमरा भरा हुआ है
06:25फिर आप ऐसे बैठे हैं जैसे बड़ी तंग जगा आपको मिली है
06:31आपने फर्माया जो मैं देख रहा हूँ तुम नहीं देख रहे ये कमरा फरिष्टों से भरा हुआ है
06:40तो मैं उनके कंदे पकड़ पकड़ के साथ की चार पाई के पास पहुंचा हूँ
06:49तो यहां भी जगा कोई नहीं थी एक फरिष्टे ने अपना पर सुकेड़ा है
06:54और मेरे बैठने की जगा बनाई है
06:57तो गदर कीमत खेर मिन अल्फ शहर गदर तंगी फरिष्टों कियामत से जमीन तंग पड़ जाते है
07:21गदर अंदाजा प्यमाईश
07:32तो मा फिस्समाए गदर राहत मिन सहाव
07:41ये एक हिदात अनाहव में मिसाल है
07:44आगे पीछे याद आने कि ये क्यों मिसाल लाई गई थी
07:49तो गदर मसाफ़त को पैमाईश को भी कहते है
07:58तो आखर में इसका माना बताया
08:03सलाम नही हत्ता मतलع الفج्र
08:08ये इसकी लंबाई क्या है पैमाईश क्या है
08:13मगर्ब से लेकर सुबह सादिक तक ये रात रहती है
08:20तो लफ़ गदर के सारे मानी अल्ला तहला ने छोटी सी सुरत में इस्तेमाल की
08:28अब जवान लोग है आज रात भी ताक रात है
08:40तो अपने हिम्मत दिखाओ राज एक तो गुजर गई एक ये आ रही है
08:48दो उसके बाद हैं तीन
08:51तो कोशिश करो के अल्ला ताला आपको हिम्मत दे
08:59और आप इस रात में अपने अल्ला की बारगाह में जितना भी कुछ कर सकते हैं करें
09:09तक जाएं उंग आ रही है फिर अल्ला का ने बेना का फिर सो जाएं फिर जागे नहीं
09:16जबर्दस्ती ना करें
09:18तो मैं सरबर्द से पहले पांचों रातें जागता था वे कोई तो होगी
09:35मैंने एक वाका भी सुनाया था कि जब मैं तीन चिले लगा रहा था
09:40तो रमदान में मेरा एक चिला भी था रमदान भी उसमें था एदमने लहौर पड़ी थी
09:49तो इदर माई राबो एक जगा है ठीन के आगे कसूर से दिपाल पर जाते हुए
09:59माई राबो अड़ा है
10:02उस वक्त तो अड़ा नहीं था खाली एक डंडा लगा हुआ था
10:07अब तो वहां बहुत बड़ा अड़ा बन चुका है
10:11तो मैंने पहले रमज़ान से मांगना शुरू किया या लगा तेरे सामने है रोजाना पैदल सफर करते हैं
10:22तो शब कदर जिस रात को हो मुझे उठा देना
10:27पांचों राते मैं नहीं जाक सकता
10:32तो एकीस की रात थी बारा बज़े मुझे किसी ने यहां से पकड़ा और यूं करके उठा दिये
10:42बिलकुल फिजिकली ऐसने के मुझे मासूस हुआ
10:46नहीं यहां से किसी ने मेरा करदन पे हाथ डाला यूं उठाया
10:53मैं एकदम खौफज़दा होके उठा
10:58दिसंबर की रातें थी
10:59नहीं कहीं यह मुझे किसने उठा दिया
11:02नहीं घड़ी देखी तो बारा बज़ रहे थी
11:06मैं फिर रज़ाई उपर ली और लेट रहे
11:09या लेटा तो मुझे याद है कि आज तो 21 की रात है
11:15यह तो अल्ला ने मुझे उठाया
11:18मैं फिर मैंने च्छांग लगाई
11:20और बाहर निकल गया
11:23उस रात गर्मी का जमाना हो या सर्दी का
11:27रात मौत अदिल होती रोशन होती
11:31तो मैं बाहर निकला सर्दी का कोई नाम निशानी नहीं था
11:37तो ओ रात अल्ला ने मुझे ये मागने की तुफीक दी कि
11:43या ला सारी जिन्दगी के लिए कुबूल फर्मा ले इस काम के लिए
11:49और अगरे दिन मैं खुदी सोच में पढ़ गया
11:53ये तो उन्हें मांगा किया है
11:55कि सारी जिन्दगी के लिए कुबूल का तु मेडिकल डॉक्टर बन रहा है
12:01डॉक्टरी करेगा या तबलीग करेगा
12:06तो उसके दो दिन बाद हमारी वापसी थी राइमिंट
12:10सारे रास्ते बस में मैं ये सोचता गया
12:13ये तुने क्या मांग लिया
12:18वालदین चाहते हैं मैं खुद चाहता हूँ
12:20मैं मेडिकल डॉक्टर बन रहा हूँ
12:24और मैंने मांग लिया मुझे इस काम के लिए कुबूल कर ले
12:29फिर माना का अच्छा अल्ला को मन्जूर होगा और कर देगा
12:33जो उसे मन्जूर होगा कर देगा
12:36रब ते छोड़ सारे
12:39मालिक पे तू छोड़ दे डौरी
12:42जो उसको मन्जूर
12:44अगर अब मालिक पे डौरी छोड़ दे
12:48so now
12:49Allah has put down
12:51that
12:51why can't we do that
12:54I have done
12:56was a disease
12:56so I had
13:04yeah Allah
13:06five-something
13:07where I don't
13:08know how that
13:08should
13:09is
13:10so
13:1223
13:13the
13:13night
13:13I have
13:14said
13:15I have
13:15a
13:15شب قدر ہے
13:17میں اٹھ کے بیٹھ گیا
13:20صبح تک میں
13:21سہری تک اپنا جو بھی
13:23کر سکتا تھا وہ کرتا رہا
13:27پچیس کو
13:27میں پھر
13:29مجھے خام میں لگا جیسے
13:31میں اٹھ رہا ہوں
13:33پچیس کی رات کے لئے
13:34تو مجھے آواز آتی ہے لیلد القدر
13:37تئیس میں تھی
13:38پچیس میں نہیں ہے آرام سے سو جاؤ
13:42یہ دو واقع
13:43میرے ساتھ پیش آئے ہیں
13:46تو
13:48اللہ آپ کو
13:49حمد دے تو یہ رات
13:51جاگنے کی ہے
13:53ستائیس تک آپ کو اس لئے روکتا ہوں
13:55کہ اللہ کرے
13:57شب قدر آپ کو یہاں نصیب ہو
13:59کہ اللہ کے راستے
14:01کی شب قدر
14:03وہ تو پھر
14:05کروڑوں گناہ بڑھ جاتی ہے
14:07ہر عمل کروڑوں گناہ بڑھ جاتا ہے
14:10تو اس لئے
14:11میں
14:13میری تمہنہ ہوتی ہے کہ بھئی
14:15آپ زیادہ سے زیادہ
14:17تا کراتے ہیں یہاں گزاریں
14:18ایک رات رہ جاتی ہے وہ
14:20گھر جا کے گزار لیں
14:22یہ اللہ نے اس امت پہ کرم کیا
14:25ان کو
14:28اپنی رحمت سے
14:29نواز دیں کے لئے
14:31تو اس دن جبریل اترتے ہیں
14:36فرشتوں کے بہت بڑے لشکر کے ساتھ اترتے ہیں
14:41اور جو اس رات کو عبادت کر رہا ہوتا ہے
14:44اس سے مصافہ کرتے ہیں
14:48ہر ایک سے مصافہ کرتے ہیں
14:50وہ ہم محسوس نہیں کرتے
14:53لیکن ہر ایک سے مصافہ کرتے ہیں
14:57پھر
14:59سہری کے قریب فرشتے پوچھتے ہیں
15:01اللہ نے کیا کیا
15:04ایمان والوں کے ساتھ
15:06تو جبریل کہتے ہیں
15:07اللہ نے سب کی بخشش کر دی
15:10سوائے چار آدمیوں کے
15:14ایک جو مستقل شرابی ہو
15:17شراب پیتھو
15:19اس نے بھول چوک کے پی لی کبھی
15:21وہ اس میں شمل نہیں
15:23جو مستقل شراب کے بغیر رہ نہ سکتا ہو
15:27ایک اس کی بخشش نہیں ہوتی
15:29ایک جو مان باپ کو زلیل کر دے
15:34اقل والدین
15:38چھوٹی موٹی نافرمانی ہر اولاد سے ہو جاتی
15:41چھوٹی موٹی
15:43چھوٹی موٹی
15:45اونچی بات ہر اولاد سے ہو جاتی
15:48اللہ ماشاءاللہ
15:49یہ وہ مراد نہیں ہے
15:52یہ جو مان باپ کو زلیل کر دے
15:55ان کے دل کے ٹکڑے ٹکڑے کر دے
15:59اس کی بخشش نہیں ہوتی
16:02تیسرا
16:04جو ماں اور باپ سے رشتے بنتے ہیں
16:07چاچا
16:08خالہ
16:10پھوپی
16:13مامو
16:14مامی
16:15پھر آگے چچہ ذات اولاد
16:18مامو ذات اولاد
16:20پھوپی ذات اولاد
16:21ان خونی رشتوں سے جو نفرت کرے اور ان سے جگڑے کرے
16:27لڑائیاں کرے
16:29اس کی بھی بخشش نہیں ہوتی
16:32چودھا
16:33جو دل میں کسی کے لیے نفرت پا لے
16:38غصہ آجانا تب ہی چیز ہے
16:41اس پہ پکڑ نہیں ہے
16:43اگر اس کو نکال دے
16:45ذائق کے مندب اس کو پرداش کر کے اسے فنا کر دے
16:50غصے کو پال لے
16:52نفرت کو پال لے
16:54بوہز کو پال لے
16:56چوتھا وہ ہے جس کی بخش نہیں ہوتی
16:59بخش نہیں ہونے کا مندب کیا ہے
17:01کہ جب تک ان چیزوں پر ان بری آدات پر ہیں تو
17:05ان کی معافی نہیں ہوگی
17:08توبہ کر لیں تو وہیں معافی ہے
17:13اسی وقت معافی ہے
17:17حضرت اکرمہ بن ابی جہل جب آئے
17:21مسلمان ہونے
17:23کیا انہوں نے دشمنی باپ بیٹے نیت دکھائی تھی
17:29اور آپ نے فرمایا
17:30میری امت کا فیرون
17:33موسیٰ کے فیرون سے پڑا تھا
17:37زخمی ہو کے پڑا تھا تو عبداللہ بن مسود
17:41اس کے سینے پر جڑے گردن کاٹنے کے لئے
17:43من انتا
17:45کہنا عبداللہ بن مسود الحدلی
17:50یا روائی الغنم
17:53سعیت صعب المرتقہ
17:57روائی
17:59رائی نہیں کہا
18:00بکری چڑھانے والے
18:02تصغیر
18:04زلت کا حقارت کا لفظ
18:06سعیت المرتقہ
18:09بڑی چڑھائی پہ تو چڑھا ہے
18:12نیچے سے کاٹنا پتا چلے
18:14کسی سردار کی گردن ہے
18:16اور اپنے ساتھی کو کہنا
18:19جتنی کل تم سے نفرت کرتا تھا
18:23اس وقت اس سے بھی زیادہ کرتا
18:26اس پر آپ نے فرمایا کہ
18:28موسیٰ علیہ السلام کے فیرون نے تو کہا تھا
18:41اور اس فرما نے کہا
18:49کل جتنی نفرت تھی
18:51اس سے زیادہ
18:52مجھے اس وقت نفرت
18:54آج 23 کی رات ہے
18:56شب جمعہ ہے
18:58تو قرآن کے لحاظ سے
19:01لگتا ہے کہ
19:03امید ہے یہی ہوگی
19:05جو کہ جمعہ کی رات بھی شامل ہو رہی
19:07اور ہو سکتا ہے یہ جمعہ تو الودا ہو
19:10امکان ہے کہ ایک جمعہ اور بڑھ جائے
19:13اگر تیس کا مہینہ ہوا
19:15اور اگر انتیس کا ہوا
19:17تو پھر تو یہ آخری جمعہ ہے
19:19تو یہ شب جمعہ
19:21ویسے ہی بابرکت ہوتی
19:22سارے سال کی شب جمعہ
19:24انتہائی بابرکت ہوتی
19:27شب جمعہ میں جو موت
19:29تا جائے تو
19:30امینق
19:31فتنة القبر
19:33قبر کے فتنے سے اللہ اس کو بچا لیتا ہے
19:38تو یہ دو چیزیں کٹھی ہو رہی ہیں
19:41جوان لوگوں احمد کرنا
19:43میری لئے دعا کرنا
19:45بلکہ پوری امت کے لئے دعا کرنا
19:48اور یہ ایران اور
19:49یہودوں نصارہ کی جو جنگ ہے
19:52اس میں اللہ تعالی
19:53ایران والے بھائیوں کو فتح نصیب فرمائے
19:57ارپار کی طرح اس رمضان المبارک میں بھی
20:00مولانا تارک جمیل صاحب کی زبانی
20:03پروگرام ملاحظہ کیجئے
20:05رمضان المبارک کی ہر رات
20:07تراوی کے بعد
20:09صرف تارک جمیل اوفیشل پر
20:13موسیقا
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