00:00आज 23 की रात है शब जुमा है तो कराइन के लिहाज से लगता है कि अमीद है यही होगी
00:10चुके जुमा की रात भी शामल हो रही है और हो सकता यह जुमत अलवदा हो इमकान है कि एक
00:17जुमा और बढ़ जाए अगर 30 का महीना हुआ और अगर 29 का हुआ तो फिर तो यह आखरी ज�
00:24तो यह शब जुमा वैसे ही बापरकत होती सारे साल की शब जुमा इंतहाई बापरकत होती शब जुमा में जो
00:33मौत ता जाए तो अमिनक फितनत अल्कबर के फितने से लगा उसको बचा लेता है
00:43तो यह दो चीज़ें कट्शी हो रहेगी जवान लोगों हम्मत करना मेरे लिए दौा करना बलके पुरी उम्मत के लिए
00:52दौा करना
00:53और यह इरान और यहुदों नसारा की जो जंग है इसमें अल्ला ताला इरान वाले बाईयों को फता नसी फर्माए
01:11तारिक की हर रात तरावी के बाद सिर्फ तारिक जमील ओफिशल पर
01:22एक दफ़ अल्ला के नभी सल लाह लिए उसलम ने फर्माया
01:28बनो इस्राइल में चार अंबिया ने मुसलसल असी साल जहाद किया
01:39तो सहबा ने अर्स कि या रसूल अल्ला हमारी तो अमरें भी असी साल नहीं होती
01:49और हो जाएं तो किसी काम के नहीं रहते हैं
01:54तो हम क्या करें
01:58उस पर अल्ला ने सुरह कदर उतारी
02:02इन्ना अन्जलनाहु फी लेलति अल्कदर
02:07वमा अदराकमा लेलतु अल्कदर
02:12लेलतु अल्कदर खेरु मिन अल्फिश शहर
02:20एक रात हम आपको दे रहे हैं
02:25जो असी साल से भी जादा है
02:28हजार महीने को तरासी साल बनते हैं
02:32तो खेरु मिन अल्फिश शहर
02:35यहर एक जो इस रात जागेगा
02:45हजार महीने की बन्दगी तो अल्ला जरूर देगा
02:49लेकिन जिसमें जितनी ज़्यादा
02:55अमल की खुबसूरती होगी
02:58उसके लिए पिर खैर का लवज है
03:02कि अल्ला हजार महीने से ज़्यादा जितना भी कर ले
03:07उसके लिए तो कोई मुश्किल नहीं है
03:15क्या खुबसूरत है कुरान
03:17कदर के जितने माणा हैं वो इस सूरत में आवे है
03:24कदर उ कीमत सुनाएं
03:29पहले ल्ला ने लवज कदर को कीमत में इस्तेमाल किया
03:40कि लेलत अल्कदर की कीमत क्या है
03:43एक हजार महीनों से ज़्यादा है
03:47कदर का दूसरा माना है तंगी
03:53वहम्मल इनसानों इजा मब्तलाहु फगदरा आलेही रिस्कहु
03:59यवसुतुर रिस्क लिमें ये शाओ वयकदिर
04:05जिसका कम कर दे गदरा कमी
04:09तो यहां
04:13अल्ला ताला कदर का दूसरा माना इस्तेमाल फर्मा रहे है
04:19तन्जलूलमलाइकत गर्रूह
04:22इतने फरिष्टे उतरते हैं
04:26कि जमीन तंग पड़ जाती है
04:29यहां गदर तंगी के माना में है
04:34कि मलाइका का नुजूल इतना होता है
04:39कि ये च्छोटी सी जमीन
04:42उनके आने की वर्कस से छोटी ही पड़ जाती
04:47तंग पड़ जाती
04:49साथ बिन माज रजे लावनों का
04:53की शहादत हुई
04:57जंग खंदक में जखमी हुए
04:59अब पिर चंद दिनों के बाद इंतकाल हुआ
05:03मारे नबी को पता चला तो
05:09जिवरील आए ना का
05:10या रसुल आपके साथियों में कौन फोट हुआ है
05:16क्यों का इहतज जाल्श रर्रह्मान तरवा
05:22अल्ला का अर्श खुशी से जूम रहा है
05:26कि कोई आ रहा है
05:28सुभानादा
05:30अपने का साथ जखमी था
05:34तो अपने मस्चद से दोड़ लगाई
05:39उनके घर पहुँचे तो वो इंतकाल फर्मा गए थे
05:44कमरा बिलकुल खाली था
05:46चार पाई पड़ी थी
05:48और आप कमरे में ऐसे दाखिल हुए
05:51जिससे सारा कमरा भरा हुआ हो
05:56और आप कोई कदम यहां रखते
05:58कोई ऐसे इस तरह इस तरह जिग जैग बनाते हुए
06:05साथ के सरहाने ऐसे करके बैठ़ गए ऐसे
06:11तो सहाबा ने अर्ज की या रसुल्ह
06:15कमरा तो खाली है
06:18हमें तो कोई नजर नहीं आ रहा
06:21आप ऐसे अंदर गए जैसे कमरा भरा हुआ है
06:25फिर आप ऐसे बैठे हैं जैसे बड़ी तंग जगा आपको मिली है
06:31आपने फर्माया जो मैं देख रहा हूँ तुम नहीं देख रहे ये कमरा फरिष्टों से भरा हुआ है
06:40तो मैं उनके कंदे पकड़ पकड़ के साथ की चार पाई के पास पहुंचा हूँ
06:49तो यहां भी जगा कोई नहीं थी एक फरिष्टे ने अपना पर सुकेड़ा है
06:54और मेरे बैठने की जगा बनाई है
06:57तो गदर कीमत खेर मिन अल्फ शहर गदर तंगी फरिष्टों कियामत से जमीन तंग पड़ जाते है
07:21गदर अंदाजा प्यमाईश
07:32तो मा फिस्समाए गदर राहत मिन सहाव
07:41ये एक हिदात अनाहव में मिसाल है
07:44आगे पीछे याद आने कि ये क्यों मिसाल लाई गई थी
07:49तो गदर मसाफ़त को पैमाईश को भी कहते है
07:58तो आखर में इसका माना बताया
08:03सलाम नही हत्ता मतलع الفج्र
08:08ये इसकी लंबाई क्या है पैमाईश क्या है
08:13मगर्ब से लेकर सुबह सादिक तक ये रात रहती है
08:20तो लफ़ गदर के सारे मानी अल्ला तहला ने छोटी सी सुरत में इस्तेमाल की
08:28अब जवान लोग है आज रात भी ताक रात है
08:40तो अपने हिम्मत दिखाओ राज एक तो गुजर गई एक ये आ रही है
08:48दो उसके बाद हैं तीन
08:51तो कोशिश करो के अल्ला ताला आपको हिम्मत दे
08:59और आप इस रात में अपने अल्ला की बारगाह में जितना भी कुछ कर सकते हैं करें
09:09तक जाएं उंग आ रही है फिर अल्ला का ने बेना का फिर सो जाएं फिर जागे नहीं
09:16जबर्दस्ती ना करें
09:18तो मैं सरबर्द से पहले पांचों रातें जागता था वे कोई तो होगी
09:35मैंने एक वाका भी सुनाया था कि जब मैं तीन चिले लगा रहा था
09:40तो रमदान में मेरा एक चिला भी था रमदान भी उसमें था एदमने लहौर पड़ी थी
09:49तो इदर माई राबो एक जगा है ठीन के आगे कसूर से दिपाल पर जाते हुए
09:59माई राबो अड़ा है
10:02उस वक्त तो अड़ा नहीं था खाली एक डंडा लगा हुआ था
10:07अब तो वहां बहुत बड़ा अड़ा बन चुका है
10:11तो मैंने पहले रमज़ान से मांगना शुरू किया या लगा तेरे सामने है रोजाना पैदल सफर करते हैं
10:22तो शब कदर जिस रात को हो मुझे उठा देना
10:27पांचों राते मैं नहीं जाक सकता
10:32तो एकीस की रात थी बारा बज़े मुझे किसी ने यहां से पकड़ा और यूं करके उठा दिये
10:42बिलकुल फिजिकली ऐसने के मुझे मासूस हुआ
10:46नहीं यहां से किसी ने मेरा करदन पे हाथ डाला यूं उठाया
10:53मैं एकदम खौफज़दा होके उठा
10:58दिसंबर की रातें थी
10:59नहीं कहीं यह मुझे किसने उठा दिया
11:02नहीं घड़ी देखी तो बारा बज़ रहे थी
11:06मैं फिर रज़ाई उपर ली और लेट रहे
11:09या लेटा तो मुझे याद है कि आज तो 21 की रात है
11:15यह तो अल्ला ने मुझे उठाया
11:18मैं फिर मैंने च्छांग लगाई
11:20और बाहर निकल गया
11:23उस रात गर्मी का जमाना हो या सर्दी का
11:27रात मौत अदिल होती रोशन होती
11:31तो मैं बाहर निकला सर्दी का कोई नाम निशानी नहीं था
11:37तो ओ रात अल्ला ने मुझे ये मागने की तुफीक दी कि
11:43या ला सारी जिन्दगी के लिए कुबूल फर्मा ले इस काम के लिए
11:49और अगरे दिन मैं खुदी सोच में पढ़ गया
11:53ये तो उन्हें मांगा किया है
11:55कि सारी जिन्दगी के लिए कुबूल का तु मेडिकल डॉक्टर बन रहा है
12:01डॉक्टरी करेगा या तबलीग करेगा
12:06तो उसके दो दिन बाद हमारी वापसी थी राइमिंट
12:10सारे रास्ते बस में मैं ये सोचता गया
12:13ये तुने क्या मांग लिया
12:18वालदین चाहते हैं मैं खुद चाहता हूँ
12:20मैं मेडिकल डॉक्टर बन रहा हूँ
12:24और मैंने मांग लिया मुझे इस काम के लिए कुबूल कर ले
12:29फिर माना का अच्छा अल्ला को मन्जूर होगा और कर देगा
12:33जो उसे मन्जूर होगा कर देगा
12:36रब ते छोड़ सारे
12:39मालिक पे तू छोड़ दे डौरी
12:42जो उसको मन्जूर
12:44अगर अब मालिक पे डौरी छोड़ दे
12:48so now
12:49Allah has put down
12:51that
12:51why can't we do that
12:54I have done
12:56was a disease
12:56so I had
13:04yeah Allah
13:06five-something
13:07where I don't
13:08know how that
13:08should
13:09is
13:10so
13:1223
13:13the
13:13night
13:13I have
13:14said
13:15I have
13:15a
13:15شب قدر ہے
13:17میں اٹھ کے بیٹھ گیا
13:20صبح تک میں
13:21سہری تک اپنا جو بھی
13:23کر سکتا تھا وہ کرتا رہا
13:27پچیس کو
13:27میں پھر
13:29مجھے خام میں لگا جیسے
13:31میں اٹھ رہا ہوں
13:33پچیس کی رات کے لئے
13:34تو مجھے آواز آتی ہے لیلد القدر
13:37تئیس میں تھی
13:38پچیس میں نہیں ہے آرام سے سو جاؤ
13:42یہ دو واقع
13:43میرے ساتھ پیش آئے ہیں
13:46تو
13:48اللہ آپ کو
13:49حمد دے تو یہ رات
13:51جاگنے کی ہے
13:53ستائیس تک آپ کو اس لئے روکتا ہوں
13:55کہ اللہ کرے
13:57شب قدر آپ کو یہاں نصیب ہو
13:59کہ اللہ کے راستے
14:01کی شب قدر
14:03وہ تو پھر
14:05کروڑوں گناہ بڑھ جاتی ہے
14:07ہر عمل کروڑوں گناہ بڑھ جاتا ہے
14:10تو اس لئے
14:11میں
14:13میری تمہنہ ہوتی ہے کہ بھئی
14:15آپ زیادہ سے زیادہ
14:17تا کراتے ہیں یہاں گزاریں
14:18ایک رات رہ جاتی ہے وہ
14:20گھر جا کے گزار لیں
14:22یہ اللہ نے اس امت پہ کرم کیا
14:25ان کو
14:28اپنی رحمت سے
14:29نواز دیں کے لئے
14:31تو اس دن جبریل اترتے ہیں
14:36فرشتوں کے بہت بڑے لشکر کے ساتھ اترتے ہیں
14:41اور جو اس رات کو عبادت کر رہا ہوتا ہے
14:44اس سے مصافہ کرتے ہیں
14:48ہر ایک سے مصافہ کرتے ہیں
14:50وہ ہم محسوس نہیں کرتے
14:53لیکن ہر ایک سے مصافہ کرتے ہیں
14:57پھر
14:59سہری کے قریب فرشتے پوچھتے ہیں
15:01اللہ نے کیا کیا
15:04ایمان والوں کے ساتھ
15:06تو جبریل کہتے ہیں
15:07اللہ نے سب کی بخشش کر دی
15:10سوائے چار آدمیوں کے
15:14ایک جو مستقل شرابی ہو
15:17شراب پیتھو
15:19اس نے بھول چوک کے پی لی کبھی
15:21وہ اس میں شمل نہیں
15:23جو مستقل شراب کے بغیر رہ نہ سکتا ہو
15:27ایک اس کی بخشش نہیں ہوتی
15:29ایک جو مان باپ کو زلیل کر دے
15:34اقل والدین
15:38چھوٹی موٹی نافرمانی ہر اولاد سے ہو جاتی
15:41چھوٹی موٹی
15:43چھوٹی موٹی
15:45اونچی بات ہر اولاد سے ہو جاتی
15:48اللہ ماشاءاللہ
15:49یہ وہ مراد نہیں ہے
15:52یہ جو مان باپ کو زلیل کر دے
15:55ان کے دل کے ٹکڑے ٹکڑے کر دے
15:59اس کی بخشش نہیں ہوتی
16:02تیسرا
16:04جو ماں اور باپ سے رشتے بنتے ہیں
16:07چاچا
16:08خالہ
16:10پھوپی
16:13مامو
16:14مامی
16:15پھر آگے چچہ ذات اولاد
16:18مامو ذات اولاد
16:20پھوپی ذات اولاد
16:21ان خونی رشتوں سے جو نفرت کرے اور ان سے جگڑے کرے
16:27لڑائیاں کرے
16:29اس کی بھی بخشش نہیں ہوتی
16:32چودھا
16:33جو دل میں کسی کے لیے نفرت پا لے
16:38غصہ آجانا تب ہی چیز ہے
16:41اس پہ پکڑ نہیں ہے
16:43اگر اس کو نکال دے
16:45ذائق کے مندب اس کو پرداش کر کے اسے فنا کر دے
16:50غصے کو پال لے
16:52نفرت کو پال لے
16:54بوہز کو پال لے
16:56چوتھا وہ ہے جس کی بخش نہیں ہوتی
16:59بخش نہیں ہونے کا مندب کیا ہے
17:01کہ جب تک ان چیزوں پر ان بری آدات پر ہیں تو
17:05ان کی معافی نہیں ہوگی
17:08توبہ کر لیں تو وہیں معافی ہے
17:13اسی وقت معافی ہے
17:17حضرت اکرمہ بن ابی جہل جب آئے
17:21مسلمان ہونے
17:23کیا انہوں نے دشمنی باپ بیٹے نیت دکھائی تھی
17:29اور آپ نے فرمایا
17:30میری امت کا فیرون
17:33موسیٰ کے فیرون سے پڑا تھا
17:37زخمی ہو کے پڑا تھا تو عبداللہ بن مسود
17:41اس کے سینے پر جڑے گردن کاٹنے کے لئے
17:43من انتا
17:45کہنا عبداللہ بن مسود الحدلی
17:50یا روائی الغنم
17:53سعیت صعب المرتقہ
17:57روائی
17:59رائی نہیں کہا
18:00بکری چڑھانے والے
18:02تصغیر
18:04زلت کا حقارت کا لفظ
18:06سعیت المرتقہ
18:09بڑی چڑھائی پہ تو چڑھا ہے
18:12نیچے سے کاٹنا پتا چلے
18:14کسی سردار کی گردن ہے
18:16اور اپنے ساتھی کو کہنا
18:19جتنی کل تم سے نفرت کرتا تھا
18:23اس وقت اس سے بھی زیادہ کرتا
18:26اس پر آپ نے فرمایا کہ
18:28موسیٰ علیہ السلام کے فیرون نے تو کہا تھا
18:41اور اس فرما نے کہا
18:49کل جتنی نفرت تھی
18:51اس سے زیادہ
18:52مجھے اس وقت نفرت
18:54آج 23 کی رات ہے
18:56شب جمعہ ہے
18:58تو قرآن کے لحاظ سے
19:01لگتا ہے کہ
19:03امید ہے یہی ہوگی
19:05جو کہ جمعہ کی رات بھی شامل ہو رہی
19:07اور ہو سکتا ہے یہ جمعہ تو الودا ہو
19:10امکان ہے کہ ایک جمعہ اور بڑھ جائے
19:13اگر تیس کا مہینہ ہوا
19:15اور اگر انتیس کا ہوا
19:17تو پھر تو یہ آخری جمعہ ہے
19:19تو یہ شب جمعہ
19:21ویسے ہی بابرکت ہوتی
19:22سارے سال کی شب جمعہ
19:24انتہائی بابرکت ہوتی
19:27شب جمعہ میں جو موت
19:29تا جائے تو
19:30امینق
19:31فتنة القبر
19:33قبر کے فتنے سے اللہ اس کو بچا لیتا ہے
19:38تو یہ دو چیزیں کٹھی ہو رہی ہیں
19:41جوان لوگوں احمد کرنا
19:43میری لئے دعا کرنا
19:45بلکہ پوری امت کے لئے دعا کرنا
19:48اور یہ ایران اور
19:49یہودوں نصارہ کی جو جنگ ہے
19:52اس میں اللہ تعالی
19:53ایران والے بھائیوں کو فتح نصیب فرمائے
19:57ارپار کی طرح اس رمضان المبارک میں بھی
20:00مولانا تارک جمیل صاحب کی زبانی
20:03پروگرام ملاحظہ کیجئے
20:05رمضان المبارک کی ہر رات
20:07تراوی کے بعد
20:09صرف تارک جمیل اوفیشل پر
20:13موسیقا
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