00:10कल्पना कीजे एक ऐसी कैद की जहाना सलाखें हैं और ना बेडियां
00:15फिर भी आप पिछले 4745 दिनों से एक ही बिस्तर पर पत्थर बन कर पड़े हैं
00:22और आपका अपना परिवार ही हाथ जोड़ कर आपके मरने की दुआ करें
00:26दूसरी चौकाने वाली हकीकत ये कि देश की सबसे बड़े अदालत ने पहली बार इस्विकार कर लिया
00:32कि जीने के अधिकार में कभी-कभी शांती से मरने का अधिकार भी शामिल होना चाहिए
00:37सर्वोच अन्यायाले ने बुधवार को हरिश्राणा बनाम की इन सरकार के मामले में
00:42जो इतिहास एक फैसला सुनाया वो भारत के कानूनी इतिहास में एक बड़े बदलाव का संकेत है
00:48गाजयबाद के 32 वर्षय हरिश्राणा तिरह साल पहले एक इमारत से गिर गए और तब से वे पर्मानेंट वेजिटेटिव स्टेट
00:55यानि की पूरी तरह से अचेत अवस्था में थे
00:58उनके मातपिता ने अपने बेटे को इस सहनिय पीड़ा और मशीनी जीवन से मुक्ति दिलाने के लिए खोट का दर्वाजा
01:05खटखटाया
01:06जस्टिस जीवी पारदीवाला और जस्टिस कीवी विश्वनातन की बैंच ने हरीश की हालत को देखती हुए भारत में निश्क्रिय इच्छा
01:14मृत्यू यानि की पैसिव यूथिनेश्या की अपील को सुईकार कर दिया
01:18इस बात की इस शब्द की खूब चर्चा है आपने हर जगे सुना होगा आज दिन भर सुना होगा की
01:24पैसिव यूथिनेश्या ट्रेंड भी कर रहा था आखिर इसका अर्थ क्या है इसके बारे में भी वीडियो में बात करेंगे
01:32इस फैसले के बाद सबसे बड़ा सवाल ये आखिर ये निश्क्रिया इच्छा मृत्यू क्या है और निश्क्रिय क्यों जुड़ा है
01:38इसके साथ क्या कोई सक्रिया इच्छा मृत्यू भी होती है इसका जबाब है हाँ चलिए उस पर भी बात करते
01:45हैं
01:45जहिर तोर पर इसका नाम निश्क्रिया इच्छा मृत्यू है तो ये उस इच्छा मृत्यू से कितनी अलग है जिसे हम
01:50अक्सर, फिल्मों या फिर चर्चाओं में सुनते हैं।
01:53दरसल इच्छा मृत्यू दो प्रकार की होती है, पहली है सक्रिया इच्छा मृत्यू, जिसमें डॉक्टर मरीज की चान लेने के
01:59लिए सीधे तौर पर कोई घात तक इंजेक्शन या जहर देते हैं, ताकि उसे तुरंत दर्द से रहात मिले।
02:23हटा लिया जाता है, उधारण के तौर पर अगर कोई मरीज, वेंटिलेटर, डायलेसिस या लाइफ सपोर्ट सिस्टम के भरू से
02:30सांस ले रहा हो, तो उन मशीनों और दवाओं को बंद किया जाएगा, इसका मकसद मरीज को प्राकृतिक मौत की
02:36और बढ़ने देना है, ताकि म
02:50इलाज विमारी से ग्रस्थ हैं, उन्हें मौत का चुनाफ करने का हक होना चाहिए, भारत में भी प्राची इनकाल से
02:55प्रायो पवेश और संथारा जैसी परंपराय रही हैं, जहां लोग आथ्यात्मिक कारणूं से स्वेच्छा से देत्याग देते हैं, आलागि आधुनिक
03:03स
03:18हमेशा यही की गई कि राज्य का गर्तव्य व्यक्ति को हर हाल में जीवित रखना हैं, हरिश राणा की मामले
03:24से पहले भी अरोना शानबाग जैसे कई चर्चित मामने सामने आए जिन्होंने देश को चक्छोर कर रख दिया, अदालतों ने
03:30हमेशा यही तर्क दिया कि इच्�
03:44मशीनी बूझ पंचाए, तो वहां मौत दया के समाद होती है, होट ने अब यह साफ कर दिया कि गरिमा
03:50के साथ मरना भी एक मौले का धिकार है, अजब नेदरलेंड, बेल्जियम और कैनेडा जैसे देश और सक्रिया इच्छा मृत्यों
03:56को भी कानूनी रूप दे चुके हैं,
03:58भारत ने निश्क्रिया इच्छा मृत्यों को अपना कर एक संतुलित रास्ता चुना, यह फैसला उन हजारों परिबारों के लिए किसी
04:05राहत से बलकुल कम नहीं है, जो अपनों को तड़पते हुए देखने की लाचारी छेर रहे हैं, अब हरीश को
04:12मशीनों के सहारे नहीं
04:26कॉमेंट बॉक्स में अपनी राय जरूर दीजेगा, मेरा नाम है मुकॉंद, तमाम ऐसी ही बड़ी अपडेट्स और एक्स्प्लेनर्स के लिए
04:32बने रहे वन इंडिया के साथ, शुक्रिया
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