00:00देश की सबसे बड़ी अदालत और उसके सामने एक ऐसा मामला जिसने कोर्ट रूम में मौजूद हर शक्स को चौका
00:07दिया।
00:07मामला था एक तथा कथित संगठन या राजनीटिक नाम कौकरोज जन्ता पार्टी का।
00:13लेकिन सुनवाई से पहले ही सुप्रीम कोर्ट में ऐसा माहौल बन गया कि खुद चीफ जस्टिस अफ इंडिया को कहना
00:19पड़ा इसे इतना भावनात्मक तरीके से मत लीजिए।
00:22इंट्रेस्टिंग ये है कि ये पार्टी सीजे आई सूर्यकांत के ही एक बयान के बाद बनाई गई थी।
00:28सीजे आई ने कहा था कि कुछ योवा कौकरोज की तरहां हैं जिन्हें रोजगार नहीं मिलता और प्रोफेशन में जगहा
00:34नहीं मिलती।
00:35फिर वे मीडिया, सोशल मीडिया, RTI अक्टिविस्ट बनकर हर किसी पर हमला करने लगते हैं।
00:40उन्होंने कुछ लोगों को पैरसाइट्स यानि परजीवी भी कहा था जो सिस्टम पर हमला करते हैं।
00:46ये टिटपणी एक सुनवाई के दोरान आई थी, जहां फर्जी डिग्री और न्याय पालिका पर लगातार हमलों को लेकर बहस
00:52चल रही थी।
00:53बाद में इस बयान पर विवाद बढ़ने के बाद सीजे आई ने सफाई धी कि उनका निशाना देश के बेरोजगार
00:59युवा नहीं थे बलकि वे लोग थे जो फर्जी और बोगस डिग्री के जरिये पेशों में प्रवेश कर रहे हैं।
01:06फिर बनी कौकरोच पार्टी, जिस पर सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को एक वकील ने जनहित याचिका दाखिल कर मांग की
01:13कि कौकरोच जनता पार्टी से जुड़े मामले पर जल्द सुनवाई की जाए।
01:41चीफ जस्टिस ने कहा कि उचित समय आने पर मामले की सुनवाई होगी लेकिन इसे व्यक्तिगत या भावनात्मक मुद्दा बनाने
01:48की जरूरत नहीं है।
02:06की गंभीरता को प्रभावित कर सकते हैं और जनता के बीच गलत संदेश दे सकते हैं।
02:11हाला कि सुप्रीम कोट ने इस मुद्दे पर तुरंत कोई टिपपनी नहीं की।
02:14अदालत ने सिर्फ इतना कहा कि हर याचिका पर सुनवाई का अपना समय और तरीका होता है।
02:19कोट ने ये भी संकेद दिया कि सिर्फ भावनात्मक अपील के आधार पर ततकाल सुनवाई संभव नहीं है।
02:25सुप्रीम कोट की टिपपनी इसलिए भी एहम मानी जा रही है क्योंकि हाल के समय में अदालत के सामने कई
02:30ऐसे मामले आए हैं जिन में राजनीतिक बयानबाजी, नामकरण और प्रतीकों को लेकर विवाद पैदा हुए है।
02:37लेकिन अदालत लगातार ये संदेश देती रही है कि न्याएक प्रक्रिया भावनाओं से नहीं समविधान और कानून से चलती है।
03:07लेकिन अदालत का काम लोगप्रिय भावना के आधार पर फैसला देना नहीं, बलकि कानूनी वैधता को परखना होता है।
03:13शायद यही वजह थी कि CGI ने याचिका करता को भावनात्मक होने से बचने की सलह दी।
03:19फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने मामले की ततकाल सुनवाई से इनकार नहीं किया है, लेकिन साफ कर दिया है कि सुनवाई
03:25तै प्रक्रिया के अनुसार ही होगी।
03:27अब सबकी नजर इस बात पर है कि आने वाले दिनों में अदालत इस मामले को किस तरह देखती है
03:32और क्या इस पर कोई विस्तृत सुनवाई होती है या नहीं।
03:35लेकिन एक बात जरूर साफ हो गई है कि सुप्रीम कोर्ट ने ये संदेश दे दिया है कि अदालत में
03:40भावनाओं से ज्यादा महत्व कानून और समवैधानिक प्रक्रिया का होता है।
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