00:00और अंतमे बाद देश में पहली इच्छामृत्यू की निश्क्र इच्छामृत्यू जो की हरिश्राणा को प्राप्त हुई हरिश्राणा का दिल्ली एमस
00:07में निधन हो गया है
00:08तेरह सालों की दर्द भरी दास्तां दर्द भरी सांसों से अब उन्हें मुक्ती मिल चुकी है कैसे हुआ हरिश्राणा का
00:16निधन कैसे मिली इन निश्क्रिया इच्छामृत्यू चले जानते हैं इस रेपार्ट में
00:20तेरह साल का वो लंबा और पत्रीला इंतिजार आज एक ऐसी खामोशी में तबदील हो गया जिसे सुनकर हर दिल
00:27दहल उठा
00:29घाजिबाद के हरीश रणा जो बीते एक दशक से जादा समय से कुमा की अंधेरी गुफा में कैद थे आज
00:35उस कैद से हमीशा के लिया आजाद हो गए
00:38दिल्ली के एम्स अस्पताल के दिवारों ने आज एक मा के सिस्किया और एक पिता की बेबसी का वो मनजर
00:44देखा जिसने पूरे देश की आँखों को नम कर दिया
00:47सुप्रीम कोट से मिली निश्क्रिय इच्छामृत्यों की इजाज़त के बाद हरीश ने अपनी आखरी सांस ली और उस असहनी दर्द
00:55को अलविदा कह दिया जिसने उन्हें जीते जी पत्थर बना दिया था
00:58ये कहानी उस हरीश की है जिसकी आँखों में कभी सुनहरे भविशी के सपने थे
01:03साल 2010 में चंडिगड युनिवर्सिटी में सिविल इंजिनिरिंग का चातर रहा हरीश धर का चिराग था
01:10लेकिन नियती को कुछ और ही मन्सूर था
01:12अगस 2013 का वो मन्हूस दिन आज भी उनके परिवार के जहन में किसी गहरे जखम की तरह ताजा है
01:20रक्षबंधन का पावन दिन था हाथ में बहन की बांधी राखी थी और फोन पर बहन से ही बाते हो
01:26रही थी
01:26इसी दौरान पीजी की चौथी मन्जल से पैर फिसला और हरीश सीधे जमीन पर आगिरा
01:32उसे एक पल ने हस्ते खेलते परिवार के दुनिया उचाड़ दी
01:36रीड की हड़ी में लगी उस चोट ने हरीश को क्वाड्री प्लेजिया का शिकार बना दिया
01:42दहां शरीर का हर अंग पत्थर हो गया और सिर्फ सांसे चलते रही
01:46पिछले तेरा साल इस परिवार के लिए किसी अगनी परिक्षा से कम नहीं थे
01:51एक बिस्तर पर पड़े बेजान बेटे को देखना और उसकी पत्राई आँखों में अपनी बेबसी को जहाकना
01:57माता पिता के लिए हर दिन मरने जैसा था
01:59जब दवाएं और दुआएं बेसर होने लगी और हरीश का शरीर गलने लगा
02:04तब ठक हार कर माता पिता ने वो फैसला लिया जो कोई भी माबाव कभी नहीं लेना चाहेंगे
02:10उन्होंने अपने कलेजे के टुकडे के लिए मौत मांगी
02:13दिल्ली हाई कोट ने जब इस याचिका को खारिच किया तो अमीदे तूट गई थी
02:17लेकिन सुप्रीम कोट ने हरीश के दर्द को समझा
02:20और 11 मार्च 2026 को निश्क्रिय इच्छा मृत्यों की अनुमती दे दी
02:25एम्स के पैलियेटिव केर वार्ड में बीते एक हफते से जो मनजर था
02:30वो पत्थर दिल इनसान को भी रुला थे
02:32निश्क्रिय इच्छा मृत्यों की प्रक्रिया के तहट हरीश को खाना और पानी देना बंद कर दिया गया था
02:38छे दिनों तक बिना अन्यजल के वो शरीर जिदगी की आखरी चद्दो जहत कर रहा था
02:43अस्पताल के गल्यारे में बेठी मा के हाथ में हनुमान चालीसा थी
02:47एक तरफ वो कानून के तहट अपने बेटे को मुक्ती दिलाना चाहती थी
02:51तो दूसरी तरफ ममता का वो कोना अब भी किसी चमतकार की उमीद लगाए पैठा था
02:57मा के शब्द कलेजा चीर देने वाले थे कि मेरा बेटा सांस ले रहा है
03:01उसकी धड़कन चल रही है फिर भी वो मुझे छोड़ कर जा रहा है
03:05आज जब हरीश की सांसों की डोड टूटी तो सिर्फ एक इनसान का निधन नहीं हुआ
03:10बलकि 13 साल के उस असहनिय संघर्ष का अंत हुआ जिसने पूरे परिवार को निचोड कर रख दिया था
03:16मेडिकल कमिटी की लंबी चर्चा और कानूनी प्रक्रियाओं के बीच
03:21हरीश राणा की मौत ने देश में डिग्निटी इन डेथ यानि सम्मान के साथ मरने के अधिकार पर एक नई
03:27बहस छेड़ती है
03:28हरीश अब इस दुनिया के शोर से दूर वहाँ चले गए हैं जहा कोई दर्द नहीं है
03:34कोई अस्पताल की गंध नहीं है और ना ही कोई बिस्तर की मजबूरी
03:38हरीश राणा की ये विदाई हमें ये सोचने पर मजबूर कर देती है कि कभी-कभी मौत भी एक वरदान
03:44बन जाती है
03:45उनकी आत्मा को शांती मिले और उस बहादुर परिवार को इस दुख को सहने की शक्ती
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