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उन्नाव केस में Supreme Court के नए आदेश ने एक बार फिर इस संवेदनशील मामले को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। इस बार अदालत ने Victim के वकील को वार्निंग देते हुए साफ़ संकेत दिया कि केस का फैसला मीडिया ट्रायल या सार्वजनिक दबाव से नहीं, बल्कि केवल कानूनी सबूतों के आधार पर होगा।

इस वीडियो में हमने Supreme Court मीडिया पार्क में मौजूद रहकर
Suraj Kumar Jha, Advocate, Supreme Court और
Vishal Singh Chandel, Advocate, Supreme Court
से सीधे बातचीत की और समझने की कोशिश की कि:

Supreme Court ने Victim के वकील को चेतावनी क्यों दी?


Court मीडिया ट्रायल से क्यों नाराज़ दिखी?


Delhi High Court को जल्द निपटारे का आदेश क्या संकेत देता है?


क्या इस आदेश से कुलदीप सेंगर को राहत मिल सकती है?


महमूद प्राचा अधिवक्ता की भूमिका और स्थिति क्या है?


वरिष्ठ अधिवक्ताओं का साफ़ कहना है कि

“कोर्ट का फैसला भावनाओं से नहीं, सबूतों से होगा।”

यह वीडियो कानूनी विश्लेषण (Legal Explainer) है, न कि किसी पक्ष का समर्थन या विरोध।
पूरी रिपोर्ट: Shivendra Gaur

The Unnao case has once again drawn national attention after the Supreme Court issued a strong order, including a warning to the victim’s lawyer. The Court made it clear that the verdict will be based strictly on legal evidence, not on media trials or public narratives.

In this video, reported from the Supreme Court Media Park, we speak directly to
Suraj Kumar Jha, Advocate, Supreme Court and
Vishal Singh Chandel, Advocate, Supreme Court,
to explain:

Why did the Supreme Court warn the victim’s lawyer?


Why is the Court unhappy with media trials?


What does the direction to the Delhi High Court for speedy disposal mean?


Does this development indicate possible relief for Kuldeep Sengar?


What is the legal position of advocate Mahmood Pracha in this case?


Legal experts emphasize that

“Judicial decisions are driven by evidence, not public perception.”

This is a courtroom-focused legal explainer, aimed at helping viewers understand the judicial process clearly.
Report by: Shivendra Gaur

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#VishalSinghChandel
#ShivendraGaur
#CourtroomReporting

~ED.104~HT.408~

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Transcript
00:00में सुप्रेम कोड ने कह दिया है कि जो अक्यूजड है उसका भी कॉंस्टिशनल डाइट हो कि ट्राइल जो है फेयर हो और स्पीडी हो उन सभी लोगों के लिए भी एक संदेश है जो आजकल चोटे-चोटे वीडियो बनाकर अपने एड़ोकेसी के प्रोफेशन को सॉलिसी�
00:30सेंगर हाइड कोड से बाईजद बरी होंगे यह कोई बता सकते एक बार फिर सुप्रिम कोड में कुल्दीव सेंगर के मामले में में सुनवाई हुई क्या अंदर भहस हुई यह सब बाते समझेंगे हम सुप्रिम कोड के वरिश्ट अधिभकता विसाल सिंग जी और सूरज क
01:00और उनको 30,000 कोड के द्वारा जो आज इवन कारावास तिल इस नेचुनल लाइफ दिया गया था उसको पलट दिया था तो इसके एवज में CVI ने ओनरेबल सुप्रीम कोड में कमप्लेन किया उसके SLP दाखिल की और SLP पर ये सुनवाई चल रही थी पहले 4 विक का टाइम दि
01:30मैंटर को आप सुनकर अपील को डिसाइड करिए और अगर इन्हें न्याय दिया जा सकता है तो न्याय दीजिए इसमें कई बहस होई हाला कि बड़ा संतुलित कोड का रुख जो था जो मैंने पढ़ा पर मैंना उसका जो है समझने का और आपका समझाने में अंतर भी हो सकत
02:00कि कसाप का नाम क्यों आ गया तो यह जो कोड की टिपनी थी यह आम आदमी के लिए या जो न्याय मांगने आते हैं चाहें वो आरोपी हैं और चाहें पीडित हैं किस तरह से आप देखते हैं यह आर्टिकल ट्वेंटी वन ऑफ इंडिया हमें गारंटी देता है फेयर ट्रा
02:30कि कसाप जो 2008 का विक्टिम था 26 भाई 11 के हमले का उसको भी हमने देखा था कि वीडियो में वो गोली चला रहा है बंदुक मिला है उसको भी हमने फेयर ट्रायल का मौका दिया वो अपनी मर्सीबेटीशन मी लगाया और सारे केसिस को सुनने के बाद उसे अंत में फासी की स�
03:00सब्सक्राइब कर दिया गया और बाकी के लोगों की मिर्ति होगी बाद में फासी देखें तो कहीं न कहीं फेयर ट्रायल का जो कॉंसेप्ट है वो गारिंटीज होता है अंडर आर्टिकल 21 सभी व्यक्ति को पूरा अधिकार है कि वह अपने मामले को विभोर्ट ऑनरेबल स�
03:30कि यह तै है जब एक कोड का इस तरह है जिला कोट हाई कोट सुप्रिव कोड की एक बैंच और बड़ी बैंच और बड़ी बैंच यह है लेकिन हमने यह देखा है कि जहां किसी के पक्ष का निर्ण ने नहीं आया वह मीडिया ट्रैल करने पहुंच गया कि जजों ने पैसे �
04:00किसी आंदोनों को फढ़नी पढ़ता सीजी आई को वाक्षी साथ दोनों जुकी तिपड़ी इसमें लगा तो वह बात प्राचा जी को भी इसी बात को कि मीडिया बाहर करते हैं कोई निर्णा कुछ हो गया सुप्रिंग को ने बदल सिस्टम आपके बाद है तो इस पर किस �
04:30पढ़ते हैं तो उनको पता होता कि मीडिया में क्या चलना चीज़ों के लेकर वह भी तो इंसान है और रखना भी पता भी होना चाहिए साब साब उन्होंने कहा कि आपने मीडिया ट्राइल अगर बाहर चलाया तो मैं आपका लैसेंस केंसिल कर दूंगा और यह बात इस केस
05:00क्या हुआ और उसके माइने क्या है बिल्कुल लेकिन अगर हम आप मिलकर के कोट के अभी तो कोट का और सिड़ी है ना उसको किस तरह से कोट में हमारी आपकी जो मीडिया बात वह रहे इसकी किस चीज़ में आराजगी जदा यह मैं चाहिए क्या रहा हूं कि देखिए दिस
05:30कि आडेंटिटी आप डिस्क्लोज नहीं करेंगे वह मेडिया मागर डिरेक्ट दिल्ली आई कोट के दो जज़े जो थे जस्टिस रंग स्री हडिसंकर और स्वामी उन दोनों के उपर यहां से भी नया पालिका के उपर एक दवाब हुआ और उसके बाद जंतर मंतर पहोंग
06:00पहुत पराचा को भी उन्हें ने अगार किया था और उसके बाद आज लेगी है मैटा आज पहले उन्हें कोटर के लिटाम ले आज मैटा लागा था साफ साफ जुस्टिस वरिकांदर जुस्टिस वरिकांदर बाग्ची निकाए क्योंकि आपकी कंड़क्ट में देख रहा
06:30कि आज के बाद इस के जुड़े आप विबादित बयान यह किसी कोई ऐसा बयान नहीं देंगा जिससे के मेरिट पर इंपक्त पड़े आपको जो कुछ कहना है आप अप अपील नहीं मिली उन्होंने सिर्फ कुल्दीप से सेंगर की मैं आप जज्मेंट में भी आ रहा हूं
07:00सब्सक्राइब करेंगे जो ठीक है या पलट देंगे दोनों सिच्वेशन कुछ तो कडिये निया होते दिखना भी चाहिए
07:27तो सुप्रीम कोट ने आज उनको नहीं होते दिखने वाली जो सिध्यांत है उसको स्थापित कि उन्होंने सीधा सिधा कि तीन महिने में आप डिसाइड करेंगी जब अपील फैनल होगा फिर सुप्रेम कोट भी आपील आएगा सुप्रेम कोट भी यहां भी माटर चलेगा
07:57या जेल जाएंगे या फासी होगी हमारा इससे कोई लिना देन नहीं है हम यहां पर खड़े हुए हैं उस विश्वास के बारे में बात करने के लिए जो जिला कोट से लेके हो सुप्रेम कोट तक आदमी नायकी मांग करने जाता है बहां बो भी जाता है वो पीडियो तो औ
08:27कर नाराजगी होगी सर जी मुझे लगता है कि उन्रेबल सुप्रेम कोट ने बहुत ही सही नेड़े दिया है और उन सभी लोगों के लिए भी एक संदेश है जो आजकल चोटे-चोटे वीडियो बना कर अपने एड़ोकेसी के प्रोफेशन को सॉलिसीट करने की कोसिस करते ह
08:57अपने खिलाब पाते हैं तो आप हायरत होटी के पास जाईए उनके उपर जो सुपर वीजन कर रहे हैं उनके पास जाईए अपनी बातों को रखी आपको कौन रोक रहा है लेकिन अगर आप धरने पर बैठ जाएंगे जज उसको गाली देंगे यह कहेंगे कि पैसे लेकर �
09:27पूछने वाला था जी उसमें इन्हों ने अपने फरजी दस्तावेज लगा कर बहुत सारे ऐसे की हैं जिस जो की ऑनरेबल सुप्रीम कोट के सुपर वीजन में था और उस समय भी जश्टिस सुरिकान थी थे और उन्हों ने उनको उस समय माफ कर दिया था क्योंकि इनके ल
09:57जब यह किताब चपी तो यह अंतिम किताब नहीं मानी आ सकती जस्टीस चंद्रशूर सहाब के इंटर्विव आतराम मंदिर को ले करके उसके बाद उन्होंने एक पट्याला होस्त में एक अप्लिकेशन लगाई थी कि जो आयोध्या वाला वर्डिक्ट सुप्रीम कोट का �
10:27प्लिक्ट से नहीं के उसके अगर आप देखें 29 तारीक 29 दिसंबर को था उसमें आसा मुझे लगता है
10:48मैं और बल्कॉट का दे रिश्पेक्ट मानते में कहता हूं कि कहीं ने कहीं उस दिन मीडिया ट्राइल हुआ था क्योंकि जो उनके तरफ से आये थे दो
10:55सब्सक्राइब को बोलने तक नहीं दिया गया तो कहीं कहीं संबेदना और सारी अंजियों महिल जो
11:03फंडिंग कि कहे लेते हैं मैं जैसे रेकता हूं कोल्दीव से संगर बड़ी माने जाएंगे यह होगा ही होगा तो टाइम फ्रेम की बात है वो जितने दल्दी
11:11मैं जो समझ पा रहा हूं आपने जैसे का तो मुझे पिछली बार भी लगा जो आज जब कोट में बात हुई तो बिल्कुल लगा कोट निस्पक्ष है उन्होंने सब्सक्राइब कोई फ़रक ही नहीं तो कैसे हो सकता में यह उन्होंने तरीके खारी जी किया ना मीडिया वाली
11:41सब्सक्राइब करता है इसमें कुछ लोग आरोप लगाते हैं कि पैसे लेके कोट बिग गई हमारे फेबर में नहीं तो जड़े लगाई है
12:08कोई कारवाई होती है कंटेम्ट आफ कोट कोट ले सकता है और आर्टिकल 129 इसकी परमीसन देता है उन्रेबल सुप्रीम कोट को पहले ही डेट पे उन्रेबल सुप्रीम कोट ने चिताया था कि अब अगर इसमें मीडिया ट्रायल हुआ तो मैं किसी को बखसूंगा नहीं औ
12:38सकते हैं लेकिन आप इसमें किसी को करप्ट नहीं कर सकते हैं और एक दो लोगों के वज़े से पूरे जुडिसरी पर कोश्चन नहीं उटा सकते हैं यह उन्रेबल सुप्रीम कोट का पहले ही दिन रिमार्ट का हमारे एक सो में जब इसी पर हमने सो किया था तो पूर्ब मतन
13:08इसमें मैं यह समझना चाहता हूं एक चीज और एक चीज कहीं पर आया कि आप जल्दी यह जो कर रहे हैं यह पैमाना नहीं है दस साल सजाकाटली क्योंकि दूसरे बात यह आई कि दूसरे मामले में उम्रकैद हैं तो यानि यहीं उसकी जो पिछला इपहास है जो उसका कार
13:38सिमम पनिस्मेंट दस साल की है नौ साल तीन महीने वह पूरे पनिस्मेंट को काट चुके हैं अगर ऐसे इनका पील पेंडिंग रहा और यह जेल में रहे तो कहीं न कहीं कानून का एक सिद्दान जो यह कहता है कि कि किसी भी एक्यूजड को दस साल से जादे साब ट्राइल क
14:08करता है और वो रिमीशन का लाविनें नहीं मिलें इसको जड़ा एक आम आदमी बहासाम समझाए क्या है देखिए रिमीशन का मतलब यह होता है कि कोई भी जो मैक्सिमम पनिस्मेंट होती है उसमें दो तरीके के पनिस्मेंट होता है पहला तो वह जब केस हुआ उसके बाद
14:38साथ साल वाली बाद जस्टीस बातची ने कहीं वह ने कहीं पहले जेल में रहे हैं डिसीजन आने से पहले हम उसका लाविने नहीं देश सकते एक लास्स बिलकुल सरा आप लोगा मैंसा में बहुत कम बहुत ले लिया मैंने पर एक सम यह चीज एक बात उन्हें कहा कि जब �
15:08में पेटिशनर या फिर रिस्पॉंडेंट जो हते हैं उन में से किसी की डेथ हो जाती है लेकिन उनका परिवार लड़ते रहता है सिर्फ इसलिए कि हमें अपने पिता को या पती को या बेटे को नियाय दिलाना है और उसके उपर जो यह आरोप लगा है चोरी का या रेप
15:38हाई कोट इस मैटर को डिसाइड करें और वही हाई कोट वही बेंच इन्हें माना है कि यह कोई जो है आफिंस नहीं किया है तीसरी बात जो सबसे बड़ी बात है जिसमें यह कहा जा रहा है कि कॉंस्टुटूशनल बेंच बैटेगी और अर अंतुले के जजमेंट को उल्�
16:08कहा गया है कि MLA को पब्लिक सर्वेंट मानना चाहिए या नहीं मानना चाहिए पॉक्सो के एक्ट में जब पनिसमेंट देखेंगे तो एक पब्लिक सर्वेंट के द्वारा एक सोरफ साल 17 साल यह 18 साल से कम की बच्ची के साथ कुछ होता है तो उसका मैक्सिमम पनिसमेंट है
16:38पब्लिक सर्वेंट नहीं मानने पर इनको मैक्सिमम पनिस्मेंट जो होगी लाइफ इंप्रिज्मेंट की होगी उसका आधा पिरियड यह जो है विता चुके तो इसमें सी बात एक यह है कि जितने भी MLA MP हैं अभी कानून क्या यह कहता इससे हमारी समझ में मेरी साधार समझ म
17:08जो PSO होता है या जो सुड़च्छा में पुलीस होता है उसको हम पब्लिक सर्वेंट मान रहे हैं अंडर सेक्षन 21 आप आई बीसी तो फिर MLA को कैसे नहीं पब्लिक सर्वेंट मान रहे हैं और उस जजमेंट में MLA को पब्लिक सर्वेंट मानने के लिए इनको 9 जजों की ब
17:38कुछ और आप बगर बता नहीं मैं यहीं कहूंगा कि आपके चानल के माध्यम से कि साइंगर सहाब को आज भले बेल नहीं मिली लेकिन जिस तरीके से ट्राय आज सुनवाई हुई है निस्पक्ष रूप से जजेज वह कहीं ने कहीं उनमें जो है उनको तीन महीने कंदर अ�
18:08हला कि जो आरोपी उसका इतिहास क्या है अगर वो दूसरे अपरादे के स्यासों में रहा है तो भो भी अदालत देखती है लेकिन मौका सब को देखती है और अब सुप्रीम कोड जो मीडिया ट्रायल है जिस तरीके से कोड के बाहर कोड के बारे में उल्टा सीधा कहा जाता
18:38वो सब कोड के पास है वो छूटेंगे की जेल जाएंगे कि उनकी सजा जादा होगी कम होगी हमें हाई कोड के निर्णे का दियार रहे का वहां भी निर्णा होता उसका फिर वापे सुप्रीम कोड का बगिल तो यह प्रकिरिया इसमें रहना चाहिए लेकिन अदालत का सम्म
19:08इत्यास रहा है तो फिलान इस वीडिव में इतना ही ये पूरे डिस्कसान से आप क्या समझते हैं हमारी कोड किस तरह काम करती Peg she
19:21आपको आपकी जो राय वो रख सकते हैं और अगर हमें कोई प्रस्वास में बहुत अच्छा लएगा तो असे फिर हम जो यह समानित गिल साहब हैं जो कानून के जानकार हैं इनसे उस पर भी डिपेट करेंगा बहुत धन बाद
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