00:00सब को माफ करते हुए
00:04कौन मादा पिता परना चाहता है कि अपने बेटे को ऐसे करे
00:07मस्तव से मापी मखते हुए
00:11क्या बताओ मैं आप बाप को कैसे लगता हुगा
00:15आज आप
00:23तेरह साल का वो लंबा और पत्रिला इंतिजार आज एक खामूशी के साथ
00:28खत्म होता नजर आया
00:29एक ऐसी खामूशी में तब्दील हो गया जिसे सुनकर हर एक दिल दहल उठे
00:34गाजयबाद के हरीश राणा जो की बीते एक दशक से कहीं ज्यादा समय से
00:38कूमा की अंधेरी कुफा में कैट थे
00:40आज उस कैट से हमीशा के लिए आजाद हो गए
00:44दिल्ली के एमस अस्पताल की दिवारों ने आज एक मा की सिसक्यां और एक पिता की वेवसी का वो मंजर
00:50देखा
00:50जिसने पूरे देश की आँखों को नम कर दिया
00:53सुप्रीम कूर से मिली निश्प्रिय इच्छा मृत्यू की इजासत के बाद हरीश ने अपनी आग्री सांस ली और उस असहन
00:59या दर्द को हमीशा के लिए अलविदा कह दिया
01:02जिसने उसे जीते जी पत्थर बना दिया था और तिल-तिल मरने को मचपूर किया
01:08ये कहानी उस हरीश की है जिसकी आँखों में कभी सुनहरे भविश्य के सपने थे
01:12साल 2010 में चंडिगड युनिवर्सिटी में सिविल इंजिनिरिंग की छात्र और सिविल इंजिनिरिंग की पढ़ाई करने वाले हरीश घर का
01:21चिराग थे
01:22लेकिन नियती को कुछ और ही मंजूर था अगस 2013 का वो मनहूस दिन आज भी उनके परिवार के जहन
01:28में किसी गहरे जख्म की तरह ताजा है
01:31रक्षा बंदन का पावन दिन था हाथ में बहन की बांधी राखी थी फोन पर बहन से बाते थी और
01:37इसी दोरान पीजी की चौती मंजल से पैर फिसला और हरीश सीधे जमीन पर गिरे
01:43उसे एक पल ने हसते गेलते परिवार की दुनिया उचाड़ दी रीड की हड़ी में लगी उस चूट ने हरीश
01:49को क्वाड्री प्लेजिया का शुकार बना दिया
01:52जहां शरीर का हरंग पत्थर हो गया और सिर्फ सांसे चल रही थी पिछले तेरह सालों में परिवार के लिए
01:58ये एक अगनी परीशा जैसा था
02:00एक बिस्तर पड़े बेजान बेटी को देखना उसकी पत्राएं आखों में अपनी बेबसी को छांकना माता पिता के लिए हर
02:08एक दिन मरने जैसा था
02:09जब दवाएं और दुआएं बेएसर होने लगी और हरीश का शरीर गलने लगा तब ठक हार कर माता पिता ने
02:16वो फैसला लिया जो कि कोई भी मापाप कभी नहीं लेना चाहेगा
02:20उन्होंने अपने कलेजे के टुकडे के लिए मौत मांग ली दिलिहाई कोट ने जब इस याचिका को खारिच किया तो
02:26उमीदें तूट गई
02:27लेकिन सुप्रीम कोट ने हरीश के दर्द को समझ लिया हरीश के दर्द को समझा और 11 मार्च 2026 को
02:34निश्क्रिया इच्छा मृत्यों की अनुमती मिली
02:37एमस के पैलियाटिव के अरवार्ड में वी देख हफते से जो मंजर था वो पत्थर दिल इंसान को भी रुला
02:42दे
02:43निश्क्रिय अच्छा मृत्यों की प्रग्रिया के तहट हरीश को खाना और पानी देना बंद कर दिया गया था
02:48छे दिनों तक बिना अन जल के वो शरीर जिंदगी की आखरी जद्दुजहत कर रहा था
02:53अस्पताल के गलियारे में बैठी मा के हाथ में हनुमान चालिसा थी
02:57एक तरफ वो कानून के तहट अपने बेटे को मुक्ती दिलाना चाहती थी
03:01तो दूसरी तरफ ममता का वो कोना अब भी किसी चमतकार की उम्मीद लगा रहा था
03:06मा की शब्द कलेजा चीर देने वाले थे कि मेरा बेटा सांस ले रहा है
03:10उसकी धड़कन चल रही है फिर वी वो मुझे छोड़ कर जा रहा है
03:14अजब हरीश की सांसों की डूर टूटी तो सिर्फ एक इंसान का निधन नहीं हुआ
03:19बलकि 13 साल के उस सहनिय संहर्ष का अंत हो गया
03:23जिसने एक पूरे परिवार को निचोड़ दिया
03:25मेडिकल कमेटी की लंबी चर्चा
03:27कानूनी प्रक्रियाओं के बीच हरीश राना की मौत ने इस देश को रुलासा दिया
03:32दिश में डिग्निटी इन डेथ यानि की सम्मान के साथ मरने के अधिकार पर एक नई बहत छेड़ दी
03:38हरीश अब इस दुनिया में नहीं है दुनिया की शोर से दूर चले गए
03:42जहां कोई दर्द नहीं है कोई अस्पताल की गंध नहीं है और नहीं कोई बिस्तर की मजपूरी
03:47हरीश राना की ये विदाई हमें ये सोचने पर मजपूर करती है कि कभी-कभी मौत की एक वर्दान बन
03:53जाती है
03:54उनकी आत्मा को शांती मिले और उस बहादुर परिवार को इस दुख सहने की शक्ती मिले
03:59बहराल अब कुरे मामले को आप कैसे देखते हैं हरीश को और उसकी इच्छा मृत्ति उपलेकर
04:05आपकी क्या राय है कॉमन बॉक्स में जरूर बताईएगा मेरा नाम है मुकुंद आप आने रही वन इंडिया के साथ
04:11शुप्या
04:15सब्सक्राइब टो वन इंडिया और नेवर मिस अन अप्डेट
04:20डाउनलोड टो वन इंडिया अप नव
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